77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेताओं की ऐतिहासिक मौजूदगी (तस्वीर क्रेडिट@Shrutiikoshiya)

77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेताओं की ऐतिहासिक मौजूदगी,भारत-ईयू साझेदारी को मिला नया आयाम

नई दिल्ली,27 जनवरी (युआईटीवी)- भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह ने इस बार न सिर्फ देश की सैन्य,सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक शक्ति को प्रदर्शित किया,बल्कि भारत और यूरोपीय यूनियन के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत का भी संकेत दिया। राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड में यूरोपीय यूनियन के बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और खास बना दिया। यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस साल मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह में शामिल हुए। उनके साथ ईयू के ट्रेड और इकोनॉमिक सिक्योरिटी कमिश्नर मारोस शेफकोविक और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास की उपस्थिति ने भारत-ईयू संबंधों की गहराई को स्पष्ट रूप से दर्शाया।

गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के बाद यूरोपीय नेताओं ने भारत के साथ बढ़ती साझेदारी,साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के सहयोग को लेकर उत्साह जताया। ईयू के ट्रेड और इकोनॉमिक सिक्योरिटी कमिश्नर मारोस शेफकोविक ने इस अवसर को भारत-ईयू रिश्तों के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत के रिपब्लिक डे पर अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना उनके लिए सम्मान की बात है। उनके मुताबिक,भारत और यूरोपीय यूनियन की साझेदारी को फिर से मजबूत करने और एक बड़े ईयू-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए इसे नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए इससे बेहतर समय कोई और नहीं हो सकता। शेफकोविक के इस बयान को उस व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है,जिसमें दोनों पक्ष लंबे समय से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी गणतंत्र दिवस समारोह को भारत के इतिहास और भविष्य का प्रतीक बताया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यूरोपीय संघ को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की शानदार परेड में शामिल होने का निमंत्रण मिलना सम्मान की बात है। कोस्टा के अनुसार,यह आयोजन भारत के समृद्ध इतिहास,जीवंत सांस्कृतिक विविधता और आने वाले वर्षों की उम्मीदों का शानदार उत्सव है। उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि यूरोपीय यूनियन भारत को केवल एक आर्थिक साझेदार के रूप में नहीं,बल्कि एक सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में भी देखता है।

यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास ने भारत के साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए। उन्होंने कहा कि भारत के साथ और करीबी सहयोग के लिए यह एक मजबूत क्षण है और यूरोपीय यूनियन इसका पूरा लाभ उठा रही है। नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होना उनके लिए खुशी और सम्मान दोनों की बात है। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि भारत और ईयू के गहरे होते रिश्तों के प्रतीक के रूप में ईयू नेवल ऑपरेशन्स,अटलांटा और एस्पाइड्स के कर्मी पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा ले रहे हैं। यह कदम दोनों पक्षों के बीच बढ़ते रक्षा और समुद्री सहयोग को दर्शाता है।

काजा कैलास ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले दिन होने वाले शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। उनके अनुसार,यह समझौता मैरीटाइम सिक्योरिटी,साइबर सिक्योरिटी और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में ठोस नतीजे देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का सहयोग न केवल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को मजबूत करेगा,बल्कि वैश्विक सुरक्षा ढाँचे में भारत और ईयू की भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगा।

यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनना अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि एक सफल और मजबूत भारत दुनिया को ज्यादा स्थिर,खुशहाल और सुरक्षित बनाता है,जिससे सभी को लाभ होता है। उनका यह बयान भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर यूरोप की सकारात्मक सोच को दर्शाता है। वॉन डेर लेयेन के शब्दों में यह विश्वास झलकता है कि भारत की प्रगति केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

भारत में आयोजित भव्य समारोह के साथ-साथ दुनिया भर में भारतीय राजनयिक मिशनों ने भी 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया। कई देशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया,सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्र के नाम संदेश पढ़ा गया। इन आयोजनों ने प्रवासी भारतीयों के बीच देशभक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना को और मजबूत किया।

न्यूजीलैंड में भारत की उच्चायुक्त नीता भूषण ने वेलिंगटन में तिरंगा फहराकर गणतंत्र दिवस समारोह की अगुवाई की। इसके बाद राष्ट्रगान गाया गया और गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्र के नाम संदेश पढ़ा गया। इस अवसर पर आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। खास तौर पर ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित नृत्य नाटक ने प्रवासी भारतीयों और स्थानीय नागरिकों के बीच गहरी छाप छोड़ी और भारत के साहस व बलिदान की भावना को जीवंत कर दिया।

77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत और भारत-ईयू साझेदारी की मजबूती को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। यह आयोजन न केवल भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव बना,बल्कि आने वाले वर्षों में भारत और यूरोप के बीच सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक मजबूत संकेत भी साबित हुआ।