अरिजीत सिंह (तस्वीर क्रेडिट@mohitgupta0908)

अरिजीत सिंह का पार्श्वगायन से विदा लेने का ऐलान,फिल्मी संगीत जगत में भावनात्मक सन्नाटा

मुंबई,28 जनवरी (युआईटीवी)- बॉलीवुड और भारतीय संगीत जगत के लिए मंगलवार का दिन बेहद भावुक कर देने वाला साबित हुआ,जब देश के सबसे लोकप्रिय और सफल गायकों में शुमार अरिजीत सिंह ने पार्श्वगायन से विदा लेने की घोषणा कर दी। इस फैसले ने न सिर्फ उनके करोड़ों प्रशंसकों को चौंका दिया,बल्कि फिल्मी संगीत से जुड़े कलाकारों और संगीत प्रेमियों के बीच भी गहरी चर्चा छेड़ दी। अरिजीत सिंह,जिनकी आवाज़ पिछले एक दशक से हर पीढ़ी की भावनाओं की पहचान बन चुकी है,ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह स्पष्ट किया कि वह अब फिल्मों के लिए पार्श्वगायक के रूप में कोई नया काम नहीं करेंगे।

अपने संदेश में अरिजीत ने बेहद सादगी और आत्मीयता के साथ अपने अब तक के सफर को याद किया। उन्होंने लिखा कि यह यात्रा उनके लिए शानदार रही और ईश्वर की कृपा से उन्हें श्रोताओं का अथाह प्यार मिला। नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ साझा किए गए इस पोस्ट में उन्होंने अपने प्रशंसकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इतने वर्षों तक उन्हें जो स्नेह और समर्थन मिला,उसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे। इसी के साथ उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्श्वगायन से विदा लेना उनके लिए एक भावनात्मक फैसला है,लेकिन इसे वह सम्मान और संतोष के साथ स्वीकार कर रहे हैं।

अरिजीत सिंह ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि वह संगीत से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वतंत्र रूप से संगीत बनाना जारी रखेंगे और एक छोटे कलाकार की तरह सीखते रहने की इच्छा रखते हैं। उनके अनुसार,संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है और वह अपने दम पर नए प्रयोग करते रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल उनकी कुछ प्रतिबद्धताएँ बाकी हैं,जिन्हें वह पूरा करेंगे,इसलिए आने वाले समय में कुछ गाने रिलीज हो सकते हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया कि यह फैसला फिल्मी पार्श्वगायन तक सीमित है,न कि संगीत से संन्यास का संकेत।

38 वर्षीय अरिजीत सिंह ने अपने इस निर्णय के पीछे की वजह को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी,लेकिन उनकी पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कई प्रशंसकों ने इसे फिल्मी संगीत के एक युग के अंत की तरह बताया,तो कुछ ने इसे स्वीकार करना मुश्किल बताया। कमेंट सेक्शन में हजारों संदेशों के जरिए लोगों ने अपनी निराशा,भावुकता और अरिजीत के प्रति अपने प्यार का इज़हार किया। किसी ने लिखा कि उनकी आवाज़ के बिना बॉलीवुड अधूरा लगेगा,तो किसी ने कहा कि अरिजीत के गाने जीवन के सबसे कठिन पलों में सहारा बनते रहे हैं।

इस घोषणा पर संगीत जगत से भी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। मशहूर गायक और संगीतकार अमाल मलिक ने अरिजीत की पोस्ट पर भावुक प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह खबर सुनकर वह खुद को खोया हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अरिजीत के फैसले का सम्मान करते हैं,लेकिन यह मानना मुश्किल है कि आगे फिल्मी संगीत में उनकी आवाज़ सुनाई नहीं देगी। अमाल ने यह भी लिखा कि अरिजीत के बिना फिल्मी संगीत पहले जैसा नहीं रहेगा और वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्होंने अरिजीत के दौर में संगीत को जिया है।

 

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अरिजीत सिंह का सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने वर्ष 2005 में रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ में एक प्रतियोगी के रूप में हिस्सा लेकर अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय शायद ही किसी ने अंदाजा लगाया होगा कि यह साधारण सा दिखने वाला युवक आने वाले वर्षों में भारतीय संगीत की सबसे प्रभावशाली आवाज़ बन जाएगा। शुरुआती वर्षों में संघर्ष और असफलताओं के बाद उन्हें 2011 में फिल्म ‘मर्डर 2’ के गीत ‘फिर मोहब्बत’ से पार्श्वगायक के रूप में पहचान मिली। इस गाने ने श्रोताओं का ध्यान उनकी भावपूर्ण आवाज़ की ओर खींचा और उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत शुरुआत दिलाई।

हालाँकि,असली सफलता 2013 में आई,जब फिल्म ‘आशिकी 2’ का गीत ‘तुम ही हो’ रिलीज हुआ। यह गाना न सिर्फ सुपरहिट हुआ,बल्कि अरिजीत सिंह को रातों-रात घर-घर में मशहूर कर दिया। इस गीत ने प्रेम,दर्द और भावनाओं को जिस तरह से आवाज़ दी,उसने अरिजीत को युवाओं की धड़कन बना दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक ऐसे गाने दिए,जो आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा हैं।

‘चन्ना मेरेया’, ‘अगर तुम साथ हो’, ‘राबता’, ‘केसरिया’, ‘गेरुआ’, ‘ऐ दिल है मुश्किल’ और ‘चलेया’ जैसे गीतों ने अरिजीत को हर तरह की भावनाओं की आवाज़ बना दिया। चाहे प्रेम का इज़हार हो,बिछड़ने का दर्द हो या आत्ममंथन की खामोशी—अरिजीत की आवाज़ हर भावना में खुद को ढाल लेती थी। यही वजह है कि उन्हें केवल एक गायक नहीं,बल्कि भावनाओं का कलाकार कहा जाने लगा।

अरिजीत सिंह की खासियत यह रही कि उन्होंने भाषा की सीमाओं को तोड़ा। हिंदी के अलावा उन्होंने बंगाली,तमिल,तेलुगु,मलयालम और मराठी जैसी कई भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए। हर भाषा में उनकी आवाज़ ने उसी गहराई और सच्चाई के साथ श्रोताओं के दिलों को छुआ। बड़े संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ काम करते हुए उन्होंने खुद को हर दौर और हर शैली में साबित किया।

उनके इस फैसले को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं,लेकिन खुद अरिजीत ने इसे व्यक्तिगत और रचनात्मक यात्रा का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि वह अब संगीत को एक अलग दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं और खुद के लिए, अपने तरीके से रचना करना चाहते हैं। यह बयान उनके उस स्वभाव को दर्शाता है, जिसमें हमेशा सादगी,आत्ममंथन और संगीत के प्रति गहरा सम्मान रहा है।

अरिजीत सिंह का पार्श्वगायन से विदा लेना निश्चित रूप से फिल्मी संगीत के लिए एक बड़ा मोड़ है। उनकी आवाज़ ने एक पूरी पीढ़ी के प्रेम,दर्द और सपनों को शब्द दिए हैं। हालाँकि,वह फिल्मों के लिए अब नए गीत नहीं गाएँगे,लेकिन उनके बनाए गए गीत आने वाले वर्षों तक लोगों के दिलों में गूँजते रहेंगे। संगीत प्रेमियों के लिए यह एक भावनात्मक क्षण है,जहाँ विदाई का दर्द है,लेकिन इस उम्मीद के साथ कि अरिजीत सिंह की संगीत यात्रा नए रूप में आगे भी जारी रहेगी।