बेंगलुरु,29 जनवरी (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह एक नए विवाद में घिर गए हैं। कर्नाटक पुलिस ने उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएफएफआई) के मंच से जुड़ा है,जहाँ अभिनेता पर कथित तौर पर कर्नाटक के तटीय इलाकों में पूजनीय चावुंडी दैव और पारंपरिक दैव पूजा का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। इस घटना के बाद न सिर्फ कर्नाटक बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
यह एफआईआर बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस थाने में दर्ज की गई है। शिकायत प्रशांत मेथल नाम के एक वकील ने कराई है,जिन्होंने आरोप लगाया है कि रणवीर सिंह ने आईएफएफआई के मंच पर ऐसा आचरण किया,जिससे लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद मामले की कानूनी जाँच शुरू कर दी है और संबंधित वीडियो फुटेज व अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।
एफआईआर के मुताबिक,रणवीर सिंह पर भारतीय न्याय संहिता की तीन अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें सार्वजनिक शांति और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने से जुड़ी धारा,जानबूझकर किसी धर्म या आस्था का अपमान करने से संबंधित धारा और ऐसे शब्दों,हरकतों या इशारों से जुड़ी धारा शामिल है,जिनका उद्देश्य किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाना माना जाता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अभिनेता का कृत्य इन सभी श्रेणियों में आता है।
शिकायत में विस्तार से बताया गया है कि चावुंडी दैव कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में पूजनीय संरक्षक देवता माने जाते हैं और उन्हें दिव्य स्त्री शक्ति का प्रतीक माना जाता है। दैव पूजा वहाँ की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है,जिसे पीढ़ियों से श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, रणवीर सिंह ने मंच पर फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1’ के एक भावनात्मक दृश्य को प्रस्तुत किया,जो सीधे तौर पर चावुंडी दैव के सम्मान और उनसे जुड़ी आस्था से संबंधित था।
प्रशांत मेथल का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान रणवीर सिंह से यह अनुरोध किया गया था कि वे उक्त दृश्य को मंच पर प्रस्तुत न करें,क्योंकि यह धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। इसके बावजूद अभिनेता ने वह एक्ट किया और कथित तौर पर चावुंडी दैव को ‘भूत’ कहा। शिकायतकर्ता के अनुसार,यह शब्द न सिर्फ अपमानजनक है,बल्कि दैव परंपरा और हिंदू धर्म की मान्यताओं के प्रति गंभीर असम्मान को दर्शाता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि रणवीर सिंह की यह हरकत आकस्मिक नहीं,बल्कि जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि अभिनेता का मकसद लोकप्रिय मंच का इस्तेमाल कर ऐसी टिप्पणी करना था,जिससे व्यापक स्तर पर ध्यान आकर्षित हो और विवाद खड़ा हो। उनका कहना है कि इस तरह के बयान समाज में धार्मिक आधार पर तनाव और नफरत फैलाने का कारण बन सकते हैं।
प्रशांत मेथल ने अपनी शिकायत में व्यक्तिगत पीड़ा का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि चावुंडी दैव उनके परिवार के कुलदेवता हैं और वे बचपन से उनकी पूजा करते आ रहे हैं। ऐसे में मंच से देवता के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाना उनके लिए बेहद आहत करने वाला है। उनका कहना है कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत भावना का सवाल नहीं है,बल्कि उन लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा है,जो चावुंडी दैव को सम्मान और श्रद्धा के साथ पूजते हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग अभिनेता की आलोचना करते हुए सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं,वहीं कुछ वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कलात्मक प्रस्तुति से जोड़कर देख रहा है। हालाँकि,शिकायतकर्ता और उनके समर्थकों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी एक सीमा होती है और किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाना किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
फिलहाल,रणवीर सिंह या उनकी टीम की ओर से इस एफआईआर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार,मामले की जाँच के तहत कार्यक्रम के आयोजकों,प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित तकनीकी साक्ष्यों की जाँच की जाएगी। जाँच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में ले आया है कि सार्वजनिक मंचों पर कलाकारों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए और धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। आने वाले दिनों में इस प्रकरण पर कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।
