अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

परमाणु डील पर वार्ता नाकाम,ट्रंप की हमले की चेतावनी से अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर

वाशिंगटन,30 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु डील को लेकर चल रही उम्मीदें एक बार फिर टूट गई हैं। न्यूक्लियर प्रोग्राम और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन को सीमित करने के मुद्दे पर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शुरू हुई शुरुआती बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुँच सकी। बातचीत के ठप पड़ते ही दोनों देशों के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है,जिसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए पलटकर जवाब देने की धमकी दी है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े टकराव की आशंका को गहरा कर दिया है।

परमाणु डील पर सहमति न बनने के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान का अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पर किसी भी तरह की सख्त पाबंदी स्वीकार न करना माना जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि ईरान न केवल परमाणु गतिविधियों को तेज़ कर रहा है,बल्कि मिसाइल तकनीक के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। वहीं ईरान का तर्क है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अपनी रक्षा क्षमता से कोई समझौता नहीं करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस असफलता के बाद बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि अगर ईरान ने जल्द ही बातचीत की मेज पर लौटकर एक “सही और बराबर” समझौता नहीं किया,तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप ने कहा कि ईरान पर अमेरिका का अगला हमला पिछली गर्मियों में किए गए सैन्य हमलों से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2025 में अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था,जिसमें कई ईरानी वैज्ञानिक मारे गए थे।

ट्रंप ने अपने संदेश में अमेरिकी सैन्य शक्ति का खुलकर प्रदर्शन करते हुए कहा कि युद्धपोतों का एक विशाल समूह,जिसे उन्होंने “खूबसूरत आर्माडा” कहा,ईरान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उनके अनुसार यह फ्लीट वेनेजुएला भेजे गए अमेरिकी बेड़े से भी बड़ा है और इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियरों में से एक अब्राहम लिंकन लीड कर रहा है। ट्रंप ने लिखा कि यह फ्लीट पूरी तैयारी,ताकत और स्पष्ट मकसद के साथ आगे बढ़ रहा है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने में सक्षम है।

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि समय तेजी से निकलता जा रहा है और अब भी मौका है कि तेहरान समझदारी दिखाते हुए डील करे। उन्होंने लिखा कि पहले भी ईरान को यही सलाह दी गई थी,लेकिन उसने नहीं मानी और नतीजा “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के रूप में सामने आया,जिसमें ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप के अनुसार अगला हमला उससे भी ज्यादा भयानक हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की इन धमकियों पर ईरान की प्रतिक्रिया भी उतनी ही तीखी रही। ईरान ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका की किसी भी सैन्य कार्रवाई का तुरंत और कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के एक शीर्ष सलाहकार ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान इजरायल को निशाना बना सकता है। यह बयान क्षेत्रीय तनाव को और भड़काने वाला माना जा रहा है,क्योंकि इजरायल पहले से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के अंदरूनी हालात भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। हाल के महीनों में खामेनेई सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई,जबकि बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई की खबरों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता पैदा की है। अमेरिका इन घटनाओं को ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन के तौर पर पेश कर रहा है और इसे तेहरान पर दबाव बढ़ाने का एक और आधार बना रहा है।

अमेरिकी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्रंप प्रशासन अब कई सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इनमें ईरान के शीर्ष नेताओं और उन सुरक्षा अधिकारियों को निशाना बनाना भी शामिल है,जिन्हें हालिया हत्याओं और दमनात्मक कार्रवाइयों के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इसके अलावा ईरानी परमाणु ठिकानों और प्रमुख सरकारी संस्थानों पर हमले की संभावनाएँ भी तलाशी जा रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक किसी अंतिम कदम पर मुहर नहीं लगाई है,लेकिन उनका मानना है कि इस महीने की शुरुआत से अमेरिका के सैन्य विकल्प पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत और व्यापक हो गए हैं। अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिंद महासागर के रास्ते ईरान के करीब पहुँचना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस सैन्य तैनाती को ईरान पर दबाव बनाने और बातचीत के लिए मजबूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

दूसरी ओर,अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है। कई देशों को डर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव हुआ,तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार,व्यापार मार्गों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। तेल की कीमतों में उछाल और क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका पहले से ही जताई जा रही है।

परमाणु डील पर बातचीत के विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान एक बार फिर टकराव के खतरनाक मोड़ पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। ट्रंप की आक्रामक चेतावनियाँ और ईरान की जवाबी धमकियाँ संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति आखिरी वक्त पर हालात सँभाल पाएगी या फिर पश्चिम एशिया एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।