वाशिंगटन,30 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुँचता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दोबारा कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर हालात नहीं बदले तो इस बार अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पिछली बार से कहीं ज्यादा बड़ी और विनाशकारी होगी। ट्रंप के इस सख्त रुख के साथ ही अमेरिका ने हिंद महासागर में अपने सबसे घातक एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को तैनात कर दिया है,जो तेजी से ईरान के करीब बढ़ रहा है। इस कदम को पश्चिम एशिया में संभावित सैन्य ऑपरेशन की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप सोमवार को हिंद महासागर में दाखिल हुआ। यह कैरियर ग्रुप न केवल हमले की स्थिति में अहम भूमिका निभा सकता है,बल्कि ईरान की ओर से किसी भी संभावित जवाबी कार्रवाई से अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों की रक्षा करने में भी सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब्राहम लिंकन जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती अपने आप में एक मजबूत रणनीतिक संदेश है,जो ईरान पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी नीति को दर्शाता है।
इस बीच,अमेरिकी मीडिया ने यह भी खुलासा किया है कि इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष संपर्क बना हुआ था। सूत्रों के अनुसार,ओमानी राजनयिकों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ,जिसमें अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल थे। इन संदेशों में संभावित अमेरिकी हमले को टालने के लिए एक बैठक की संभावना पर चर्चा की जा रही थी। बताया जा रहा है कि यह बातचीत उन धमकियों से जुड़ी थी,जो ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौतों को लेकर दी थीं।
हालाँकि,इन बैकचैनल संपर्कों के बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा। इसके उलट,राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के दिनों में अपनी सैन्य चेतावनियों को और तेज कर दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया तो अमेरिका कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि एक बड़ा फ्लीट ईरान की तरफ बढ़ रहा है और इसे अब्राहम लिंकन लीड कर रहा है,जो पूरी ताकत,तेजी और स्पष्ट मकसद के साथ आगे बढ़ रहा है। उनके इस बयान को अमेरिका की सैन्य शक्ति के खुले प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
सैन्य तैयारियों के संकेत केवल नौसेना तक सीमित नहीं हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सैनिकों और ठिकानों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात कर रहा है। इसमें अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियाँ शामिल हैं,ताकि ईरान की ओर से किसी भी मिसाइल या ड्रोन हमले को रोका जा सके। इसके अलावा,अमेरिकी मीडिया ने कई सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिका ने एक या उससे अधिक थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी इस इलाके में तैनात किए हैं। थाड सिस्टम लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है और इसे बेहद उन्नत रक्षा प्रणाली माना जाता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड भी पूरी तरह सतर्क मोड में नजर आ रही है। सेंटकॉम के तहत एएफसीईएनटी कमांडर और कंबाइंड फोर्सेज एयर कंपोनेंट कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डेरेक फ्रांस ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी वायुसेना मध्य पूर्व में कई दिनों तक एयर एक्सरसाइज करेगी। उन्होंने कहा कि इन अभ्यासों का मकसद यह दिखाना है कि अमेरिकी एयरमैन कठिन और चुनौतीपूर्ण हालात में भी सुरक्षित,सटीक और अपने साझेदार देशों के साथ बेहतर तालमेल के साथ ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं। यह बयान साफ संकेत देता है कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है।
ईरान के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। पहले से ही आंतरिक विरोध प्रदर्शनों और अंतर्राष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा ईरान अब अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी से चिंतित है। ट्रंप की धमकियों के जवाब में ईरानी नेतृत्व पहले भी कह चुका है कि किसी भी अमेरिकी हमले का कड़ा और तुरंत जवाब दिया जाएगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य तैयारियों का यह दौर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती केवल सैन्य जरूरत नहीं,बल्कि एक राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश भी है। अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि वह न केवल बातचीत के जरिए दबाव बना सकता है,बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकेगा। वहीं,ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मान रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं। बैकचैनल बातचीत की कोशिशों के बावजूद ट्रंप का आक्रामक रुख और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि संकट अभी टला नहीं है। अब पूरी दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि क्या कूटनीति आखिरी वक्त पर टकराव को रोक पाएगी या फिर पश्चिम एशिया एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
