वाशिंगटन,30 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि क्यूबा से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को एक “असामान्य और गंभीर” खतरा है,जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी खतरे के मद्देनजर उन्होंने एक नई शुल्क यानी टैरिफ व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया है,जिसके तहत उन देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जा सकता है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से क्यूबा को तेल की आपूर्ति करते हैं। यह फैसला व्हाइट हाउस में हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश के जरिए लागू किया गया है और इसे अमेरिका-क्यूबा संबंधों में अब तक के सबसे कठोर कदमों में से एक माना जा रहा है।
कार्यकारी आदेश में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि क्यूबा सरकार की नीतियाँ और उसका समग्र आचरण अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत अब असाधारण कदम उठाना जरूरी हो गया है। ट्रंप ने राष्ट्रपति के रूप में अपनी जिम्मेदारी का हवाला देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और विदेश नीति की रक्षा करना उनका संवैधानिक कर्तव्य है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि क्यूबा से जुड़ी स्थिति अमेरिका के लिए एक ऐसा खतरा है,जो न केवल गंभीर है बल्कि जिसका स्रोत काफी हद तक अमेरिका के बाहर है।
ट्रंप के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा आधार क्यूबा के उन अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बताया गया है,जिन्हें अमेरिका अपने लिए खतरे के रूप में देखता है। आदेश में आरोप लगाया गया है कि क्यूबा रूस,चीन और ईरान जैसे देशों का समर्थन करता है,जिन्हें अमेरिका अपने रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी और कुछ मामलों में दुश्मन मानता है। इसके अलावा,ट्रंप प्रशासन ने हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे संगठनों का भी नाम लिया है,जिन्हें अमेरिका आतंकी संगठन मानता है। राष्ट्रपति का कहना है कि क्यूबा इन ताकतों को न सिर्फ राजनीतिक समर्थन देता है,बल्कि उन्हें अपने क्षेत्र में सक्रिय होने का अवसर भी देता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में आरोप लगाया कि क्यूबा “खुलेआम संयुक्त राज्य अमेरिका के खतरनाक दुश्मनों को पनाह देता है” और उन्हें अपने क्षेत्र में अत्याधुनिक सैन्य और खुफिया क्षमताएँ स्थापित करने के लिए आमंत्रित करता है। उनके अनुसार,ये गतिविधियाँ सीधे तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालती हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि क्यूबा में रूस का सबसे बड़ा विदेशी खुफिया केंद्र सक्रिय है,जो अमेरिकी हितों पर नजर रखने और उन्हें नुकसान पहुँचाने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही उन्होंने चीन के साथ क्यूबा के बढ़ते सैन्य और रक्षा सहयोग को भी चिंता का विषय बताया।
कार्यकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि क्यूबा हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे संगठनों को पनाह देकर उन्हें क्षेत्र में अपने आर्थिक,सांस्कृतिक और सुरक्षा नेटवर्क मजबूत करने का मौका देता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल अमेरिका,बल्कि पूरे पश्चिमी गोलार्ध की स्थिरता और सुरक्षा को नुकसान पहुँच सकता है। आदेश के मुताबिक,इस तरह की गतिविधियाँ क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देती हैं और अमेरिका के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों के खिलाफ जाती हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर लंबे समय से अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को कमजोर करने के प्रयासों का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि क्यूबा अन्य दुश्मन देशों को सैन्य और सुरक्षा सहायता देकर प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करता रहा है। इसके साथ ही ट्रंप ने क्यूबा सरकार पर आतंकवाद को बढ़ावा देने,अवैध प्रवासन को प्रोत्साहित करने और हिंसा के जरिए पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि क्यूबा की नीतियों का असर सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं,बल्कि उसके अपने नागरिकों पर भी पड़ रहा है।
कार्यकारी आदेश में क्यूबा सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर भी तीखा हमला किया गया है। इसमें कहा गया है कि कम्युनिस्ट सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को सताती और यातना देती है,क्यूबा के लोगों को बोलने और प्रेस की स्वतंत्रता से वंचित रखती है और आम जनता के दुख से भ्रष्ट तरीके से मुनाफा कमाती है। आदेश में यह भी आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक कैदियों के परिवारों के खिलाफ बदले की कार्रवाई की जाती है,धार्मिक लोगों को परेशान किया जाता है,नागरिक समाज पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं और स्वतंत्र प्रेस को दबाया जाता है। इसके अलावा ऑनलाइन और ऑफलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी गंभीर सीमाएँ लगाए जाने की बात कही गई है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि “संयुक्त राज्य अमेरिका कम्युनिस्ट क्यूबा सरकार की ज्यादतियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी विदेश नीति,राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। साथ ही ट्रंप ने यह दावा किया कि अमेरिका क्यूबा के लोगों की एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक समाज की आकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। उनके अनुसार,यह संघर्ष क्यूबा के लोगों के खिलाफ नहीं,बल्कि वहाँ की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ है।
राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के साथ ही ट्रंप ने एक नई शुल्क व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया है,जिसे इस संकट से निपटने का प्रमुख आर्थिक हथियार माना जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत यदि कोई विदेशी देश सीधे या परोक्ष रूप से क्यूबा को तेल बेचता है या उपलब्ध कराता है,तो उसके सामान पर अमेरिका में अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जा सकता है। यह टैरिफ न केवल क्यूबा पर दबाव बनाने का जरिया है,बल्कि उन देशों के लिए भी एक सख्त संदेश है जो क्यूबा के साथ ऊर्जा व्यापार कर रहे हैं।
आदेश के अनुसार,यह तय करने की जिम्मेदारी वाणिज्य मंत्री को दी गई है कि कौन-कौन से देश क्यूबा को तेल की आपूर्ति कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में वाणिज्य मंत्री विदेश मंत्री से सलाह लेंगे और यह भी देखा जाएगा कि आपूर्ति किसी तीसरे देश या बिचौलिए के माध्यम से तो नहीं हो रही है। इसके बाद विदेश मंत्री,वित्त मंत्री,ट्रेजरी विभाग,वाणिज्य विभाग,होमलैंड सिक्योरिटी और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के साथ मिलकर यह निर्णय लेंगे कि अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जानी चाहिए या नहीं और अगर लगाई जाए तो किस स्तर तक।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की पारंपरिक प्रतिबंध नीति से कहीं आगे जाता है। जहाँ पहले प्रतिबंध मुख्य रूप से क्यूबा तक सीमित रहते थे,वहीं अब ट्रंप प्रशासन ने तीसरे देशों को भी निशाने पर ले लिया है। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। खास तौर पर वे देश जो क्यूबा को तेल की आपूर्ति करते हैं,अब अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात को लेकर चिंता में पड़ सकते हैं।
क्यूबा को लेकर ट्रंप का यह रुख उनके पहले के बयानों और नीतियों के अनुरूप माना जा रहा है,जिसमें उन्होंने कम्युनिस्ट सरकारों और अमेरिका विरोधी ताकतों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही थी। हालाँकि,आलोचकों का कहना है कि इस तरह के कदम से क्यूबा की आम जनता पर और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है,जो पहले से ही कठिन हालात का सामना कर रही है। दूसरी ओर ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि यह फैसला अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है और इससे क्यूबा सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा।
फिलहाल क्यूबा की ओर से इस राष्ट्रीय आपातकाल और नई टैरिफ व्यवस्था पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन इतना तय है कि ट्रंप के इस फैसले ने अमेरिका-क्यूबा संबंधों में एक नया और तनावपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय,खासकर क्यूबा के सहयोगी देश,इस कदम पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह टैरिफ व्यवस्था वास्तव में क्यूबा की नीतियों में कोई बदलाव ला पाती है या नहीं।
