मुंबई,31 जनवरी (युआईटीवी)- भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के लिए एक ऐतिहासिक रास्ता आखिरकार खुल गया है। शुक्रवार को एनएसई ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि उसे अपने बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से अंतिम मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी ऐसे समय में आई है,जब एनएसई करीब एक दशक से अधिक समय से नियामकीय बाधाओं,विशेष रूप से चर्चित को-लोकेशन मामले और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े सवालों के कारण अपने आईपीओ को लेकर संघर्ष कर रहा था।
सेबी की मंजूरी के बाद अब गेंद काफी हद तक एनएसई के पाले में है। बाजार से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक,एनएसई मार्च के अंत तक अपने लिस्टिंग दस्तावेजों का मसौदा दाखिल करने की तैयारी में है। इसके साथ ही ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) को अंतिम रूप देने के लिए इन्वेस्टमेंट बैंकर्स और कानूनी फर्मों के साथ बातचीत तेज कर दी गई है। डीआरएचपी में आईपीओ का आकार, प्रमोटर्स और शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर,वित्तीय स्थिति,जोखिम कारक और भविष्य की रणनीति से जुड़ी तमाम अहम जानकारियाँ सामने आएँगी,जिन पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।
एनएसई के चेयरपर्सन श्रीनिवास इंजेती ने सेबी से मंजूरी मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि यह एनएसई की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि नियामक की मंजूरी के साथ एनएसई अपने सभी पक्षकारों—निवेशकों,सदस्यों,कर्मचारियों और व्यापक पूँजी बाजार के लिए मूल्य सृजन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है। इंजेती के अनुसार,यह मंजूरी न सिर्फ एनएसई की साख को मजबूत करती है,बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के एक अभिन्न अंग और पूँजी बाजारों के मार्गदर्शक के रूप में एक्सचेंज पर भरोसे को भी रेखांकित करती है।
एनएसई की आईपीओ यात्रा आसान नहीं रही है। वर्ष 2016 में पहली बार एनएसई ने अपने शेयरों को सूचीबद्ध कराने की योजना बनाई थी। हालाँकि,उसी दौरान सामने आए को-लोकेशन मामले ने पूरे संस्थान को झकझोर कर रख दिया। इस मामले में कुछ चुनिंदा ब्रोकरों को हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग के लिए एनएसई के सर्वर तक असमान पहुँच मिलने के आरोप लगे थे। इसके बाद सेबी और अन्य एजेंसियों की जाँच,भारी जुर्माने,प्रबंधन में बदलाव और कॉरपोरेट गवर्नेंस सुधारों की लंबी प्रक्रिया चली, जिसके चलते आईपीओ बार-बार टलता रहा।
बीते कुछ वर्षों में एनएसई ने अपनी गवर्नेंस व्यवस्था को मजबूत करने और नियामकीय चिंताओं को दूर करने के लिए कई कदम उठाए। बोर्ड संरचना में बदलाव,स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका बढ़ाना,तकनीकी प्रणालियों को पारदर्शी बनाना और जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करना,ऐसे ही कुछ अहम सुधार रहे हैं। सेबी की मौजूदा मंजूरी को इन्हीं प्रयासों की परिणति के रूप में देखा जा रहा है।
एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीषकुमार चौहान ने भी हाल ही में इस अहम पड़ाव को लेकर अपनी भावनाएँ जाहिर की थीं। इस महीने वे अपने परिवार के साथ तिरुपति गए,जहाँ भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में पूजा-अर्चना कर उन्होंने एनएसई, इसके सदस्यों,शेयरधारकों और देश के लिए आशीर्वाद माँगा। चौहान ने कहा कि उन्होंने एक्सचेंज की भलाई और राष्ट्र के व्यापक विकास के लिए प्रार्थना की है। बाजार के जानकार इसे एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में भी देख रहे हैं कि एनएसई एक नई शुरुआत के लिए खुद को मानसिक और संस्थागत रूप से तैयार कर चुका है।
इससे पहले सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने भी संकेत दिया था कि एनएसई को इस महीने के भीतर आईपीओ के लिए मंजूरी मिल सकती है। उनका यह बयान बाजार में उम्मीदों को और मजबूत करने वाला साबित हुआ और अब उस पर मुहर लग चुकी है। एनएसई के आईपीओ को भारतीय पूँजी बाजार के इतिहास की सबसे अहम लिस्टिंग्स में से एक माना जा रहा है,क्योंकि यह न केवल एक बड़े वित्तीय संस्थान का सार्वजनिक होना है,बल्कि नियामकीय सुधारों और बाजार की परिपक्वता का भी संकेत देता है।
आने वाले दिनों में डीआरएचपी दाखिल होने के साथ ही आईपीओ से जुड़ी तमाम बारीक जानकारियाँ सार्वजनिक होंगी। निवेशकों,ब्रोकर्स और विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज हो चुकी है कि एनएसई का मूल्यांकन क्या होगा और यह लिस्टिंग भारतीय शेयर बाजार के लिए किस तरह के नए मानक स्थापित करेगी। एक दशक के लंबे इंतजार के बाद,एनएसई का आईपीओ अब हकीकत बनने की दहलीज पर खड़ा है।
