ड्रोन मिशन को लेकर आमने-सामने ईरान और अमेरिका के दावे (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

खाड़ी में बढ़ता तनाव: ड्रोन मिशन को लेकर आमने-सामने ईरान और अमेरिका के दावे

तेहरान/वॉशिंगटन,4 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनातनी एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। इस बार विवाद का केंद्र अरब सागर और अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में कथित ड्रोन गतिविधियाँ हैं। ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान की सेना का एक ड्रोन समुद्र में एक अहम मिशन पूरा करके सुरक्षित लौट आया है,जबकि अमेरिका का कहना है कि उसने अपने एक एयरक्राफ्ट कैरियर के बेहद करीब आए ईरानी ड्रोन को मार गिराया। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ खड़ी कर दी हैं।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना का यह ड्रोन अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक “निगरानी मिशन” पर था। फार्स न्यूज एजेंसी ने बिना नाम लिए सूत्रों के हवाले से बताया कि इस ड्रोन ने ईरान के आसपास के समुद्री इलाकों में सैन्य गतिविधियों पर सफलतापूर्वक नजर रखी और रियल टाइम में सभी अहम जानकारियाँ ग्राउंड बेस तक पहुँचाई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस तरह के मिशन क्षेत्र में समग्र निगरानी के लिए जरूरी हैं,ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने भी ईरानी मीडिया के हवाले से बताया कि यह ड्रोन मिशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसका उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद विदेशी सैन्य गतिविधियों की निगरानी करना था। ईरानी पक्ष का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की निगरानी उसकी संप्रभु सुरक्षा जरूरतों के तहत आती है और इसमें किसी भी तरह का उकसावा शामिल नहीं था।

हालाँकि,ईरान की सेमी-ऑफिशियल तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक अलग जानकारी देते हुए बताया कि ईरान का अपने एक ड्रोन से संपर्क टूट गया है। एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से कहा कि इस संपर्क टूटने के कारणों की जाँच की जा रही है और जैसे ही स्थिति स्पष्ट होगी,आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा की जाएगी। इस बयान ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है,क्योंकि इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यही वही ड्रोन है,जिसे अमेरिका ने मार गिराने का दावा किया है।

इस घटनाक्रम से कुछ समय पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर कहा था कि अरब सागर में तैनात एक अमेरिकी एफ-35सी लड़ाकू विमान को एक ईरानी शाहेद-139 ड्रोन को मार गिराने के लिए मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी सेना के अनुसार,यह ड्रोन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के बहुत करीब आ गया था। कमांड ने बताया कि जब यह कैरियर ईरानी तट से लगभग 800 किलोमीटर दूर अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहा था,तब ड्रोन ने उसकी दिशा में उड़ान भरी।

अमेरिकी बयान में कहा गया कि इस कार्रवाई को पूरी तरह आत्मरक्षा के तहत अंजाम दिया गया। सेना के मुताबिक,ड्रोन से संभावित खतरे को देखते हुए उसे निष्क्रिय करना जरूरी हो गया था। सेंट्रल कमांड ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटनाक्रम में कोई भी अमेरिकी सैनिक घायल नहीं हुआ और न ही किसी सैन्य उपकरण को नुकसान पहुँचा।

ईरान और अमेरिका के इन परस्पर विरोधी बयानों ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। एक तरफ ईरान अपने ड्रोन मिशन को नियमित निगरानी गतिविधि बता रहा है,वहीं अमेरिका इसे अपने सैन्य ठिकानों और जहाजों के लिए सीधा खतरा करार दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और संवाद के अभाव के चलते ऐसी घटनाएँ भविष्य में भी सामने आ सकती हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है,जब मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना की मौजूदगी पहले से ही काफी मजबूत है। ट्रंप प्रशासन ने जनवरी के आखिर में एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और कई युद्धपोतों को इस क्षेत्र में तैनात किया था। इसके पीछे वजह यह बताई गई थी कि ईरान को किसी भी तरह की “उकसाने वाली कार्रवाई” से रोका जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार तेहरान को चेतावनी देते रहे हैं कि वह क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में न डाले।

ईरान की नजर में,हालाँकि,अमेरिकी सैन्य तैनाती ही तनाव की असली वजह है। तेहरान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र और मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी के जरिए दबाव बनाने की नीति अपना रहा है। ड्रोन निगरानी मिशन को भी ईरान अपनी सुरक्षा और जवाबी रणनीति का हिस्सा बताता है।

अरब सागर में ड्रोन को लेकर सामने आए ये दावे और प्रतिदावे एक बार फिर इस बात की याद दिलाते हैं कि अमेरिका और ईरान के रिश्ते कितने नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। एक छोटी-सी सैन्य घटना भी बड़े टकराव का रूप ले सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस तनाव को कूटनीतिक स्तर पर सँभालने की कोशिश करते हैं या फिर क्षेत्र में हालात और अधिक अस्थिर होते हैं।