जयशंकर–रूबियो और बेसेंट की अहम मुलाकातें (तस्वीर क्रेडिट@DDNewsUP)

जयशंकर–रूबियो और बेसेंट की अहम मुलाकातें: भारत-अमेरिका रणनीतिक व आर्थिक साझेदारी को नई दिशा

वाशिंगटन,4 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम के तहत विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग के व्यापक एजेंडे,क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ उभरते रणनीतिक क्षेत्रों पर गहन चर्चा हुई। यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में सामने आई है, जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच एक नए व्यापार समझौते की घोषणा की थी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मार्को रूबियो से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए इसे एक सकारात्मक और सार्थक बैठक बताया। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी सीनेटर रूबियो से मिलकर उन्हें बेहद खुशी हुई और दोनों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के एजेंडे के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर के अनुसार,भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के जिन प्रमुख पहलुओं पर बातचीत हुई,उनमें व्यापार,ऊर्जा, परमाणु सहयोग,रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र शामिल रहे। उन्होंने यह भी बताया कि साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थागत मैकेनिज्म की जल्द बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी है।

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज,खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक रूप देने पर भी चर्चा हुई। यह क्षेत्र तेजी से भारत-अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का एक केंद्रीय स्तंभ बनकर उभर रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव,स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उन्नत तकनीकों की बढ़ती माँग के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता को लेकर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

यह बैठक ऐसे समय में हुई,जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने और बाजार पहुँच का विस्तार करने के उद्देश्य से एक नए व्यापार समझौते की घोषणा की थी। विदेश विभाग के बयान में कहा गया कि सेक्रेटरी रूबियो और मंत्री जयशंकर ने इस समझौते का स्वागत किया और इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक अहम उपलब्धि बताया। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नए आर्थिक अवसरों को खोलने और साझा ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए भारत और अमेरिका का मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।

चर्चा के दौरान साझेदारी के क्षेत्रीय और बहुपक्षीय आयामों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। रूबियो और जयशंकर ने सुरक्षा संवाद के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि एक समृद्ध,स्थिर और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंद-प्रशांत को लेकर भारत और अमेरिका पहले से ही समान दृष्टिकोण साझा करते रहे हैं और यह बैठक उस रणनीतिक समझ को और गहरा करने की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।

इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट से भी मुलाकात की। इस बैठक का फोकस मुख्य रूप से भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी और वित्तीय सहयोग पर रहा। जयशंकर ने ‘एक्स’ पर स्कॉट बेसेंट के साथ मुलाकात की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उनसे मिलकर उन्हें खुशी हुई और दोनों के बीच भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर उपयोगी चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार,इस बातचीत में निवेश,वित्तीय स्थिरता,वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और उभरते बाजारों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। अमेरिका भारत को एक बड़े निवेश गंतव्य और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक अहम साझेदार के रूप में देखता है,जबकि भारत के लिए अमेरिका तकनीक,पूँजी और बाजार पहुँच का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। ट्रेजरी स्तर पर यह संवाद दोनों देशों के बीच आर्थिक समन्वय को और मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर की ये बैठकें भारत-अमेरिका संबंधों में मौजूदा गति को बनाए रखने और उसे और आगे ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। व्यापार समझौते की घोषणा के तुरंत बाद हुए ये संवाद इस बात का संकेत देते हैं कि दोनों देश रणनीतिक,आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को एक समग्र ढाँचे में आगे बढ़ाना चाहते हैं। ऊर्जा सुरक्षा,महत्वपूर्ण खनिज,रक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।

वॉशिंगटन में हुई ये उच्चस्तरीय बैठकें इस बात को रेखांकित करती हैं कि भारत और अमेरिका वैश्विक चुनौतियों के बीच एक-दूसरे को भरोसेमंद साझेदार मानते हैं। चाहे हिंद-प्रशांत की स्थिरता हो,वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार या ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग—दोनों देशों के बीच बढ़ती समझ और संवाद आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकते हैं।