युमनाम खेमचंद सिंह ने ली मणिपुर के सीएम पद की शपथ (तस्वीर क्रेडिट@airnewsalerts)

मणिपुर को मिला नया नेतृत्व: युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली,राष्ट्रपति शासन समाप्त,नेमचा किपगेन और लोसी दिखो बने डिप्टी सीएम

इंफाल,4 फरवरी (युआईटीवी)- मणिपुर की राजनीति में बुधवार को एक अहम मोड़ आया,जब पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह शपथ ग्रहण ऐसे समय हुआ है,जब एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने नई दिल्ली में 61 वर्षीय मैतेई समुदाय के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह को विधानसभा दल का नया नेता घोषित किया था। इसके साथ ही मणिपुर में लंबे समय से जारी राजनीतिक अनिश्चितता के दौर के बाद एक नई निर्वाचित सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इंफाल स्थित लोक भवन में आयोजित एक सादे लेकिन महत्वपूर्ण समारोह में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह,दो उपमुख्यमंत्रियों और दो अन्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में सत्ता परिवर्तन की औपचारिकता के साथ-साथ राज्य में संवैधानिक व्यवस्था की बहाली का संदेश भी दिया गया। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा,उसके सहयोगी दलों और राज्य प्रशासन के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री के साथ जिन नेताओं ने मंत्रिपद की शपथ ली,उनमें भाजपा की नेमचा किपगेन और गोविंदास कोंथौजम,नागा पीपुल्स फ्रंट के लोइशी दिखो और राष्ट्रीय जन पार्टी के खुरैजाम लोकेन सिंह शामिल हैं। खास बात यह रही कि पूर्व मंत्री नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से ऑनलाइन माध्यम के जरिए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं,नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल. दिखो ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर एनडीए गठबंधन में अपनी पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

हालाँकि,खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली नई सरकार का यह केवल शुरुआती स्वरूप है। फिलहाल मंत्रिमंडल में सात पद रिक्त हैं और अधिकारियों के अनुसार सरकार का विस्तार बाद में किया जाएगा। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का पूर्ण गठन किया जाएगा,ताकि राज्य के विभिन्न समुदायों और इलाकों को प्रतिनिधित्व मिल सके।

इस शपथ ग्रहण समारोह में कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियाँ मौजूद रहीं। भाजपा के नवनियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ,पार्टी के पूर्वोत्तर समन्वयक और वरिष्ठ नेता संबित पात्रा,मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह,विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यब्रता सिंह,राज्य भाजपा अध्यक्ष अधिकारीमयुम शारदा देवी के अलावा कई विधायक और अन्य गणमान्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। उनकी मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व राज्य में स्थिर और मजबूत सरकार के गठन को लेकर गंभीर है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह रहा कि बुधवार को ही केंद्र सरकार ने मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया। इससे राज्य में निर्वाचित सरकार के गठन का औपचारिक मार्ग प्रशस्त हुआ। अधिकारियों के मुताबिक,केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद ही युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में एनडीए सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी की जा सकी।

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आदेश का हवाला दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए,राष्ट्रपति ने मणिपुर राज्य के संबंध में 13 फरवरी, 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी, 2026 से निरस्त कर दिया है। इस अधिसूचना के साथ ही राज्य में राष्ट्रपति शासन आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया और लोकतांत्रिक शासन की वापसी सुनिश्चित हुई।

युमनाम खेमचंद सिंह को एक अनुभवी नेता के तौर पर देखा जाता है। वे पहले विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री रह चुके हैं और राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हैं। भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए ऐसे समय में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है,जब मणिपुर सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि खेमचंद सिंह का चयन विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन साधने और प्रशासन को स्थिरता देने के उद्देश्य से किया गया है।

शपथ ग्रहण के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि नई सरकार राज्य में शांति,विकास और विश्वास बहाली को प्राथमिकता देगी। हाल के वर्षों में मणिपुर ने राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना किया है,ऐसे में नई सरकार के सामने कानून-व्यवस्था,सामाजिक सौहार्द और विकास कार्यों को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

युमनाम खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री पद की शपथ और राष्ट्रपति शासन की समाप्ति मणिपुर के लिए एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई एनडीए सरकार किस तरह से राज्य की जमीनी समस्याओं से निपटती है और आने वाले दिनों में स्थिरता और विकास का भरोसा कितना मजबूत कर पाती है।