मॉस्को,5 फरवरी (युआईटीवी)- रूस और अमेरिका के बीच रणनीतिक परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली ऐतिहासिक ‘न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी’ यानी न्यू स्टार्ट समझौते के समाप्त होने के बाद वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। रूस के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि इस समझौते की अवधि खत्म होने के साथ ही अब रूस और अमेरिका,दोनों पर इससे जुड़ी किसी भी तरह की कानूनी या राजनीतिक बाध्यता नहीं रह गई है। मंत्रालय का मानना है कि अब दोनों देश इस संधि के नियमों और शर्तों को मानने के लिए मजबूर नहीं हैं और अपने अगले कदम स्वतंत्र रूप से तय कर सकते हैं।
रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि न्यू स्टार्ट समझौता 5 फरवरी को औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका है। मौजूदा हालात में रूस यह मानता है कि समझौते से जुड़े सभी पक्ष अब इससे जुड़ी शर्तों,सीमाओं और आपसी घोषणाओं से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसमें समझौते के मुख्य नियम भी शामिल हैं,जिनके तहत दोनों देशों के परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाली प्रणालियों की संख्या पर सख्त सीमाएँ लागू थीं।
रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद भी परमाणु हथियारों की तय सीमा को स्वेच्छा से बनाए रखने के रूस के प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से अब तक कोई औपचारिक और स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। रूस का कहना है कि उसने पहले ही संकेत दिया था कि यदि हालात अनुकूल रहते हैं और रणनीतिक संतुलन को कोई खतरा नहीं होता,तो वह कुछ समय तक इन सीमाओं का पालन करने के लिए तैयार है। हालाँकि,अमेरिका की तरफ से इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया न मिलने से स्थिति और अधिक अनिश्चित हो गई है।
इस बयान में रूस ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी कहा कि यदि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी नए खतरे का सामना करना पड़ा,तो वह उससे निपटने के लिए कठोर सैन्य और तकनीकी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान ऐसे समय आया है,जब पहले ही वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर आशंकाएँ फिर से चर्चा में हैं।
हालाँकि,रूस ने पूरी तरह से बातचीत के दरवाजे बंद करने का संकेत नहीं दिया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार,रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सही हालात बनते हैं,तो रूस रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद के लिए तैयार है। इसका मतलब यह है कि रूस एक ओर जहाँ अपनी सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह संभावित बातचीत की गुंजाइश भी खुली रखे हुए है।
न्यू स्टार्ट समझौता रूस और अमेरिका के बीच वर्ष 2010 में हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले साधनों, जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों,पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली मिसाइलों और भारी बमवर्षक विमानों की संख्या को सीमित करना था। यह समझौता 5 फरवरी 2011 से लागू हुआ था और इसे हथियार नियंत्रण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता रहा है।
शुरुआत में इस संधि की अवधि 10 साल के लिए तय की गई थी,जिसे बाद में दोनों देशों की सहमति से बढ़ाकर 5 फरवरी 2026 तक कर दिया गया था। लंबे समय तक यह समझौता अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक स्थिरता का एक अहम आधार बना रहा। इसके जरिए न केवल हथियारों की संख्या पर नियंत्रण रखा गया,बल्कि पारदर्शिता और आपसी भरोसे को भी बढ़ावा मिला,क्योंकि दोनों देशों को एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों की जाँच का अधिकार भी मिला हुआ था।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में कहा था कि अगर अमेरिका ऐसे कदम नहीं उठाता,जिससे रणनीतिक संतुलन बिगड़ता हो,तो रूस न्यू स्टार्ट समझौते की मूल सीमाओं का पालन समाप्ति के बाद भी एक साल तक करता रहेगा। पुतिन का यह बयान उस समय आया था,जब यह साफ हो गया था कि समझौते के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में कहा था कि उन्हें इस समझौते के खत्म होने की ज्यादा चिंता नहीं है। उन्होंने यह उम्मीद जताई थी कि रूस और अमेरिका भविष्य में किसी नए समझौते पर पहुँच सकते हैं। हालाँकि,अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है,जिससे दोनों देशों के बीच हथियार नियंत्रण को लेकर खालीपन और ज्यादा स्पष्ट हो गया है।
गौरतलब है कि न्यू स्टार्ट समझौता ही अब रूस और अमेरिका के बीच हथियार नियंत्रण से जुड़ा आखिरी बड़ा समझौता था। इससे पहले अमेरिका वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज यानी आईएनएफ संधि से बाहर निकल चुका है। आईएनएफ संधि के खत्म होने के बाद न्यू स्टार्ट ही एकमात्र ऐसा ढाँचा बचा था,जो दोनों परमाणु महाशक्तियों को कानूनी रूप से बाँधता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू स्टार्ट के समाप्त होने से वैश्विक हथियार नियंत्रण व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। अब जब अमेरिका और रूस पर कोई कानूनी सीमा लागू नहीं रही,तो परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू होने का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि दुनिया भर में परमाणु संतुलन और सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
रूस के विदेश मंत्रालय का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि न्यू स्टार्ट के बाद की दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर अनिश्चितता और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं। अब यह आने वाला समय ही बताएगा कि क्या अमेरिका और रूस इस खालीपन को नए समझौते और संवाद के जरिए भरते हैं या फिर वैश्विक सुरक्षा एक और खतरनाक दौर में प्रवेश करती है।
