शशि थरूर (तस्वीर क्रेडिट@ShashiTharoor)

संसद परिसर में दो घटनाओं ने खींचा ध्यान: शशि थरूर का फिसलना और राहुल गांधी-बिट्टू नोकझोंक पर सियासी हलचल

नई दिल्ली,5 फरवरी (युआईटीवी)- नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में बुधवार को हुए दो अलग-अलग घटनाक्रमों ने दिनभर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर खासा ध्यान खींचा। एक ओर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का सीढ़ियों पर फिसलने का वीडियो वायरल हुआ,जिसमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव उन्हें संभालते नजर आए,वहीं दूसरी ओर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया।

पहली घटना संसद भवन परिसर की सीढ़ियों पर हुई,जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर फोन पर बात करते हुए चलते-चलते अचानक लड़खड़ा गए। वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जैसे ही थरूर ने सीढ़ी पर पैर रखा,उनका संतुलन बिगड़ गया और वे फिसलने लगे। उसी समय उनके पास खड़े समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने फुर्ती दिखाते हुए उन्हें सँभाल लिया। अखिलेश यादव ने न सिर्फ थरूर को गिरने से बचाया,बल्कि कुछ पल तक उनका हाथ थामे रखा और धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरने में मदद की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हल्की बातचीत भी होती दिखी।

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शशि थरूर के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उनके ठीक होने की कामना की। हालाँकि,इन अटकलों पर खुद शशि थरूर ने विराम लगा दिया। उन्होंने इस वायरल वीडियो को अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, “जिस दीए को तूफां में जलना होगा,उसे सँभल-सँभल के चलना होगा। मैं ठीक हूँ।” थरूर की इस पंक्ति को जहाँ एक ओर उनकी सेहत को लेकर आश्वासन के तौर पर देखा गया,वहीं कुछ राजनीतिक हलकों में इसके गहरे मायने भी निकाले जाने लगे। कई लोगों ने इसे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्ष की चुनौतियों से जोड़कर देखा।

इसी दिन संसद परिसर में एक और घटना ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,दोनों नेताओं के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि राहुल गांधी ने बिट्टू को “गद्दार” कह दिया। राहुल गांधी ने इस दौरान यह भी कहा, “चिंता मत करो,तुम वापस आओगे।” बयान के बाद माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।

हालाँकि, दिलचस्प बात यह रही कि इस तीखी टिप्पणी के बावजूद राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया,लेकिन बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार करते हुए वहाँ से चले जाना बेहतर समझा। इस दृश्य ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए और सोशल मीडिया पर भी इस पर जमकर चर्चा हुई।

इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एक केंद्रीय मंत्री को “गद्दार” कहना न सिर्फ संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है,बल्कि यह बेहद आपत्तिजनक भी है। दिल्ली से भाजपा के सात सांसदों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान की कड़ी निंदा की है। उनका दावा है कि इस टिप्पणी से सिख समुदाय की अस्मिता पर सीधा प्रहार हुआ है,क्योंकि रवनीत सिंह बिट्टू सिख समुदाय से आते हैं।

भाजपा सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी को अपने शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए और इस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए,जो किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती हैं। पार्टी नेताओं ने यह भी माँग की है कि राहुल गांधी को इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। वहीं,कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है,लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि पूरी घटना को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है।

एक ही दिन में संसद परिसर में हुई इन दोनों घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल कितना संवेदनशील और तनावपूर्ण है। शशि थरूर का फिसलना जहाँ मानवीय और सहज घटना के तौर पर देखा गया,वहीं अखिलेश यादव द्वारा उन्हें सँभालना राजनीतिक शिष्टाचार और आपसी सम्मान का प्रतीक माना गया। दूसरी ओर,राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू की नोकझोंक ने यह दिखाया कि संसद के भीतर और बाहर सियासी टकराव किस हद तक बढ़ चुका है।

फिलहाल,शशि थरूर ने खुद को पूरी तरह ठीक बताते हुए सभी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है,जबकि राहुल गांधी-बिट्टू विवाद पर सियासत तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयानबाजी का संसद की कार्यवाही और राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।