विदेश मंत्री जयशंकर और ग्रीक रक्षा मंत्री निकोस डेंडियास (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

भारत–ग्रीस रणनीतिक साझेदारी को नई गति: विदेश मंत्री जयशंकर और ग्रीक रक्षा मंत्री निकोस डेंडियास के बीच अहम बातचीत

एथेंस,7 फरवरी (युआईटीवी)- नई दिल्ली में शुक्रवार को भारत और ग्रीस के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल देखने को मिली, जब विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ग्रीस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोस डेंडियास के साथ व्यापक और गहन चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है,जब ग्रीस के रक्षा मंत्री भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निमंत्रण पर आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुँचे हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, भू-राजनीति और औद्योगिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दे एजेंडे में हैं।

बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि ग्रीस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें प्रसन्नता हुई। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। जयशंकर ने डेंडियास के विचारों और आकलन की सराहना करते हुए संकेत दिया कि दोनों देशों के दृष्टिकोण में कई मामलों पर सामंजस्य और आपसी समझ दिखाई देती है। यह टिप्पणी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारत और ग्रीस न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के इच्छुक हैं,बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ाने को तैयार हैं।

ग्रीस के रक्षा मंत्री निकोस डेंडियास ने भारत पहुँचने से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह दौरा उनके लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा था कि वह भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात को लेकर उत्सुक हैं। डेंडियास ने यह भी बताया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है,बल्कि वह भारत–यूरोपीय संघ (ईयू) फोरम में भाग लेकर अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों,उभरती सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक रणनीतिक संतुलन जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। यह फोरम ऐसे समय पर हो रहा है,जब दुनिया रूस–यूक्रेन युद्ध,मध्य पूर्व की अस्थिरता,हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ऊर्जा व आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है।

डेंडियास की भारत यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बेंगलुरु भी है,जहाँ वह भारत के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और ग्रीक रक्षा उद्योग इकोसिस्टम के बीच संभावित सहयोग के अवसरों पर विचार करेंगे। ग्रीस की मंशा है कि वह भारत के तेजी से बढ़ते रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाए,जबकि भारत भी यूरोप में अपनी रक्षा साझेदारियों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन,तकनीक हस्तांतरण,संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को इस संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

ग्रीस के रक्षा मंत्री का यह दौरा केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। इसी सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन का दौरा किया था,जहाँ उनकी मुलाकात अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और रक्षा नीति के लिए जिम्मेदार अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी से हुई। वॉशिंगटन यात्रा के समापन पर डेंडियास ने बताया कि इन बैठकों के दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र से जुड़े कई व्यापक मुद्दों,उभरती रणनीतिक चुनौतियों और ग्रीक सशस्त्र बलों में सुधार से जुड़े ‘एजेंडा 2030’ पर ग्रीस का दृष्टिकोण रखा। ‘एजेंडा 2030’ ग्रीस की सेना को आधुनिक बनाने,उसकी क्षमताओं को बढ़ाने और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप ढालने की एक महत्वाकांक्षी योजना मानी जाती है।

डेंडियास ने अमेरिका के साथ हुए कई रक्षा समझौतों का भी उल्लेख किया,जिनमें एफ-35 लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़ा करार प्रमुख है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों को ग्रीक सशस्त्र बलों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए लागू किया जाएगा। एफ-35 जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों की खरीद ग्रीस की सैन्य क्षमता को नई ऊँचाई देने के साथ-साथ पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। इसी क्षेत्रीय संदर्भ में भारत और ग्रीस के बीच बढ़ता संवाद विशेष महत्व रखता है।

पिछले महीने अमेरिका में एक अहम द्विदलीय विधेयक ने कांग्रेस में एक बड़ी बाधा पार की थी,जिसने पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र को अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में रखने की दिशा में संकेत दिया है। ‘ईस्टर्न मेडिटेरेनियन गेटवे एक्ट’ नामक इस विधेयक को हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने भारी बहुमत, यानी 45–2 मतों से पारित किया। इस कानून के समर्थकों का मानना है कि यह पहल पूर्वी भूमध्यसागर को भारत,मध्य पूर्व और यूरोप के बीच एक रणनीतिक कड़ी के रूप में मजबूत करती है, खासकर भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) के संदर्भ में।

आईएमईसी की घोषणा वर्ष 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी, जिसे अमेरिका और कई अन्य साझेदार देशों का समर्थन प्राप्त है। इस कॉरिडोर का उद्देश्य मध्य पूर्व के जरिए रेल,बंदरगाह,ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क को जोड़ते हुए भारत को यूरोप से जोड़ना है। इसमें पूर्वी भूमध्यसागर को यूरोप के लिए एक अहम प्रवेश द्वार के रूप में देखा जा रहा है। ग्रीस,अपनी भौगोलिक स्थिति और बंदरगाह अवसंरचना के कारण,इस कॉरिडोर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में भारत और ग्रीस के बीच रणनीतिक संवाद केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित न रहकर व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक व सुरक्षा ढाँचे से भी जुड़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश मंत्री जयशंकर और रक्षा मंत्री डेंडियास के बीच हुई यह बैठक भारत–ग्रीस संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों,नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग में विश्वास रखते हैं। रक्षा,समुद्री सुरक्षा,ऊर्जा,कनेक्टिविटी और उद्योग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से न केवल द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होंगे,बल्कि यूरोप,मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत को जोड़ने वाली व्यापक रणनीति को भी बल मिलेगा।

ग्रीस के रक्षा मंत्री की भारत यात्रा और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ हुई बातचीत यह दर्शाती है कि भारत और ग्रीस बदलते वैश्विक परिदृश्य में एक-दूसरे को अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में रक्षा सहयोग,आर्थिक कनेक्टिविटी और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर समन्वय के जरिए यह साझेदारी और गहरी होने की संभावना है,जिसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ सकता है।