बेंगलुरु,9 फरवरी (युआईटीवी)- भारतीय टेनिस के लिए बेंगलुरु की धरती रविवार को ऐतिहासिक गवाह बनी,जब भारत ने डेविस कप में दुनिया की नंबर छह टीम नीदरलैंड्स को रोमांचक मुकाबले में 3-2 से हराकर बड़ी सफलता हासिल की। इस जीत के साथ भारत ने सितंबर में होने वाले क्वालिफायर्स के दूसरे राउंड में जगह बना ली है,जहाँ आठ टीमें डेविस कप फाइनल्स में प्रवेश के लिए जोर आजमाइश करेंगी। पिछले कई वर्षों से लगातार निराशाओं से जूझ रही भारतीय डेविस कप टीम के लिए यह जीत न केवल आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है,बल्कि देश में टेनिस के भविष्य के लिए भी नई उम्मीदों का संकेत देती है।
इस यादगार जीत के नायक दक्षिणेश्वर सुरेश रहे,जिन्होंने पूरे टाई में असाधारण प्रदर्शन करते हुए भारत को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। सुरेश ने जिस तरह दबाव के क्षणों में खुद को साबित किया,उसने उन्हें रातोंरात भारतीय टेनिस का नया चेहरा बना दिया। शनिवार को उन्होंने डच टीम के टॉप रैंक खिलाड़ी जेस्पर डी जोंग को सिंगल्स में हराकर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई थी। उस जीत ने न केवल स्कोरबोर्ड पर फायदा पहुँचाया,बल्कि भारतीय खेमे में विश्वास भी भर दिया कि वे मजबूत मानी जा रही नीदरलैंड्स टीम को चुनौती दे सकते हैं।
रविवार को मुकाबला और भी रोमांचक हो गया,जब सुरेश ने युकी भांबरी के साथ मिलकर डबल्स में भारत की लाज बचाई। डेविड पेल और सैंडर एरेंड्स जैसी अनुभवी डच जोड़ी के खिलाफ यह मुकाबला लगभग तीन घंटे तक चला और हर पॉइंट पर सांसें थाम देने वाला रोमांच देखने को मिला। सुरेश और भांबरी की यह पहली साझेदारी थी,लेकिन कोर्ट पर उनके तालमेल में कहीं से भी नएपन की झलक नहीं दिखी। भारतीय जोड़ी ने पहला सेट टाईब्रेक में 7-6(0) से अपने नाम किया,दूसरे सेट में 3-6 से पिछड़ने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और निर्णायक तीसरे सेट के टाईब्रेक में 7-6(1) से जीत दर्ज कर भारत को टाई में बढ़त दिला दी।
डबल्स जीत के बाद भारत की नजरें टाई को यहीं खत्म करने पर थीं,लेकिन रिवर्स सिंगल्स में सुमित नागल को जेस्पर डी जोंग के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। नागल ने पहले सेट में कड़ा संघर्ष किया,लेकिन 5-7 से सेट गंवा बैठे। इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरा सेट 6-1 से जीत लिया,जिससे भारतीय समर्थकों में उम्मीद जगी। हालाँकि,निर्णायक तीसरे सेट में डी जोंग ने अनुभव का फायदा उठाया और 6-4 से जीत हासिल कर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया।
नागल की इस हार के बावजूद उनका जज्बा काबिल-ए-तारीफ रहा। वह दाहिनी जांघ में ग्रेड टू टियर की गंभीर चोट के बावजूद कोर्ट पर उतरे और पूरी ताकत से लड़े। उनकी यह कोशिश टीम के लिए इसलिए भी अहम रही,क्योंकि इससे निर्णायक मुकाबले से पहले भारतीय खेमे को जरूरी समय मिला और खिलाड़ियों को रणनीति बनाने का मौका मिला। नागल की इस जुझारू भावना ने साबित कर दिया कि भारतीय टीम सिर्फ जीत के लिए नहीं,बल्कि सम्मान और जज्बे के लिए भी खेल रही थी।
निर्णायक मुकाबले में सारी जिम्मेदारी एक बार फिर दक्षिणेश्वर सुरेश के कंधों पर आ गई। वर्ल्ड नंबर 457 होने के बावजूद उन्होंने अपने से कहीं अधिक रैंक वाले गाइ डेन ओडेन के खिलाफ दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। सुरेश ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और सीधे सेटों में मुकाबला जीतकर भारत के नाम ऐतिहासिक टाई दर्ज कर दी। जैसे ही आखिरी पॉइंट भारत के पक्ष में गया,स्टेडियम में मौजूद दर्शक खुशी से झूम उठे और खिलाड़ियों ने कोर्ट पर एक-दूसरे को गले लगाकर इस यादगार पल का जश्न मनाया।
इस प्रदर्शन के साथ दक्षिणेश्वर सुरेश ने एक खास उपलब्धि भी अपने नाम कर ली। वह 2004 में लिएंडर पेस के बाद एक ही डेविस कप टाई में तीन मैच जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। यह आँकड़ा अपने आप में उनकी मानसिक मजबूती,फिटनेस और तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है। सुरेश का यह उभार भारतीय टेनिस के लिए एक सुखद संकेत माना जा रहा है,खासकर ऐसे समय में जब देश लंबे समय से किसी नए सिंगल्स स्टार की तलाश में था।
यह जीत भारत के लिए पिछले 15 वर्षों में डेविस कप में सबसे गहरा सफर भी साबित हुई है। लंबे समय से भारत शुरुआती दौरों में ही बाहर हो जाता था,लेकिन इस बार टीम ने न केवल मजबूत विरोधी को हराया,बल्कि यह भी दिखा दिया कि वह विश्व स्तर पर मुकाबला करने की क्षमता रखती है। इस सफलता ने युवा खिलाड़ियों और टेनिस प्रशंसकों के बीच नई ऊर्जा भर दी है।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी ऋषभ पंत ने भी इस ऐतिहासिक जीत की सराहना की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “डेविस कप क्वालिफायर में भारतीय टेनिस के लिए बड़ी जीत। नीदरलैंड्स को हराकर दूसरे राउंड के लिए क्वालीफाई करने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। शानदार खेल,लड़कों।” पंत का यह संदेश इस बात का संकेत है कि भारतीय खेल जगत के अन्य खिलाड़ी भी इस उपलब्धि को कितनी अहम नजर से देख रहे हैं।
बेंगलुरु में मिली यह जीत सिर्फ एक टाई की जीत नहीं है, बल्कि यह भारतीय टेनिस के आत्मविश्वास की वापसी का प्रतीक है। अब जब भारत सितंबर में क्वालिफायर्स के दूसरे राउंड में उतरेगा, तो टीम के पास न केवल अनुभव होगा, बल्कि यह विश्वास भी होगा कि वह दुनिया की किसी भी मजबूत टीम को कड़ी टक्कर दे सकती है।
