टोक्यो,9 फरवरी (युआईटीवी)- जापान की राजनीति में रविवार को एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिला,जब सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने आम चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया। 465 सदस्यों वाले निचले सदन में 310 सीटें जीतकर एलडीपी ने न केवल अपनी स्थिति को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया,बल्कि प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को अपने कंजर्वेटिव पॉलिसी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए निर्णायक जनादेश भी दिलाया। क्योडो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक,युद्ध के बाद के जापान में यह पहली बार है,जब किसी एक पार्टी ने इतनी बड़ी बढ़त दर्ज की है।
इस शानदार जीत के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सनाए ताकाइची को उनकी “ऐतिहासिक जीत” पर बधाई दी। उन्होंने लिखा कि भारत और जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी वैश्विक शांति,स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है और उन्हें पूरा भरोसा है कि ताकाइची के नेतृत्व में दोनों देशों की दोस्ती और मजबूत होगी। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकियों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा हितों को भी रेखांकित करता है।
एलडीपी की यह जीत इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दो-तिहाई बहुमत के साथ पार्टी को अब संविधान में संशोधन कराने और अहम कानून पारित करने की शक्ति मिल गई है,भले ही ऊपरी सदन हाउस ऑफ काउंसलर्स में सत्ताधारी गठबंधन को फिलहाल पूर्ण बहुमत हासिल न हो। जापान की राजनीतिक व्यवस्था में निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत का मतलब बेहद मजबूत स्थिति होता है,क्योंकि इससे विपक्ष की भूमिका सीमित हो जाती है और सरकार अपने एजेंडे को अपेक्षाकृत कम बाधाओं के साथ लागू कर सकती है।
इस चुनावी जीत को प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की व्यक्तिगत लोकप्रियता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव से पहले एलडीपी के पास 198 सीटें थीं,लेकिन इस बार पार्टी ने रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ताकाइची की स्पष्ट नेतृत्व शैली,मजबूत राष्ट्रवादी रुख और आर्थिक व सुरक्षा मुद्दों पर आक्रामक लेकिन व्यावहारिक दृष्टिकोण ने मतदाताओं को आकर्षित किया। अक्टूबर में पद सँभालने के बाद से ही उनकी सरकार को अपेक्षाकृत स्थिर और निर्णायक माना जा रहा था,जिसका असर चुनावी नतीजों में साफ दिखाई दिया।
Congratulations Sanae Takaichi on your landmark victory in the elections to the House of Representatives!
Our Special Strategic and Global Partnership plays a vital role in enhancing…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 8, 2026
एलडीपी की सहयोगी पार्टी जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी),जिसे निप्पॉन इशिन के नाम से भी जाना जाता है,ने भी गठबंधन के रूप में निचले सदन में अपनी मौजूदगी बनाए रखी। जेआईपी ने एक सीट का इजाफा करते हुए 35 सीटें हासिल कीं। हालाँकि,पार्टी अपने सीनियर पार्टनर एलडीपी जैसी गति नहीं पकड़ सकी,लेकिन गठबंधन की मजबूती में उसका योगदान अहम माना जा रहा है। जीत के बाद एक टेलीविजन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा कि जनता ने उन्हें भारी जिम्मेदारी सौंपी है और अब उनकी सरकार का कर्तव्य है कि वह चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों को लगातार और ईमानदारी से पूरा करे।
ताकाइची ने यह भी संकेत दिया कि वह मौजूदा कैबिनेट लाइनअप को काफी हद तक बनाए रखेंगी। मौजूदा कैबिनेट को चार महीने से भी कम समय पहले गठित किया गया था और उसे अब तक जनता का अच्छा समर्थन मिला है। यह संकेत बाजारों और प्रशासनिक तंत्र के लिए भी स्थिरता का संदेश माना जा रहा है,क्योंकि इससे नीतिगत निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है।
जहाँ एलडीपी की जीत ने सत्ताधारी खेमे में उत्साह भर दिया है,वहीं विपक्ष के लिए यह चुनाव बड़ा झटका साबित हुआ। नई बनी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उसकी सीटें चुनाव से पहले की 167 से घटकर लगभग आधी रह गईं। इस हार के बाद गठबंधन के सह-नेता योशिहिको नोडा और टेटसुओ सैटो ने अपने पदों से इस्तीफा देने के संकेत दिए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि विपक्षी दल बढ़ती महँगाई,सुरक्षा चुनौतियों और मतदाताओं की बदलती प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से भुनाने में नाकाम रहे।
चुनाव का एक बड़ा मुद्दा लंबे समय से जारी महँगाई और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव रहे। खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में इजाफे ने घरों के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री ताकाइची ने चुनाव प्रचार के दौरान “जिम्मेदार लेकिन आक्रामक” वित्तीय नीति अपनाने का वादा किया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार खाने पर लगने वाले 8 प्रतिशत उपभोग-कर को दो साल के लिए निलंबित करने पर चर्चा को तेज करेगी,जो एलडीपी के प्रमुख चुनावी वादों में से एक था। इस घोषणा ने खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के मतदाताओं को आकर्षित किया।
सुरक्षा नीति भी इस चुनाव का एक अहम पहलू रही। बदलते अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा माहौल,खासकर पूर्वी एशिया में बढ़ते तनाव और उत्तर कोरिया तथा चीन से जुड़ी चिंताओं के बीच,ताकाइची ने जापान की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का वादा किया। सत्ताधारी गठबंधन ने रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए जनता से समर्थन माँगा और यह तर्क दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत रक्षा ढाँचा जरूरी है। चुनावी नतीजों से साफ है कि मतदाताओं ने इस रुख को व्यापक समर्थन दिया।
जेआईपी के नेता हिरोफुमी योशिमुरा ने ओसाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि यह चुनाव एलडीपी के भारी दबदबे के बीच लड़ा गया। उन्होंने कहा कि एलडीपी की मजबूत संगठनात्मक क्षमता और प्रधानमंत्री ताकाइची की लोकप्रियता ने अन्य दलों के लिए मुकाबला कठिन बना दिया। इसके बावजूद,जेआईपी ने गठबंधन में अपनी भूमिका निभाने और जिम्मेदारियाँ साझा करने की बात दोहराई है,भले ही उसने फिलहाल कैबिनेट पद न लेने का फैसला किया हो।
इस चुनाव में छोटी पार्टियों का प्रदर्शन भी दिलचस्प रहा। “जापानी फर्स्ट” प्लेटफॉर्म पर चुनाव लड़ने वाली पॉपुलर पार्टी सैनसेइटो ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज करते हुए 13 सीटें जीतीं,जबकि पिछली बार उसके पास केवल दो सीटें थीं। वहीं,राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर देने वाली टीम मिराई ने पहली बार निचले सदन में प्रवेश किया और नौ सीटें हासिल कीं। यह संकेत देता है कि जापानी राजनीति में नए विचारों और वैकल्पिक एजेंडों के लिए भी जगह बन रही है,भले ही मुख्यधारा पर अभी एलडीपी का दबदबा बना हुआ है।
चुनाव प्रक्रिया की बात करें तो इस बार लगभग 1300 उम्मीदवारों ने मैदान में उतरकर किस्मत आजमाई। इनमें से 289 सीटों का फैसला सिंगल-मेंबर जिलों में हुआ,जबकि 176 सीटें 11 क्षेत्रीय ब्लॉकों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व के जरिए तय की गईं। शुरुआती वोटिंग के आँकड़ों के अनुसार करीब 27.02 मिलियन बैलेट डाले गए,जो 2024 के चुनाव की तुलना में लगभग छह मिलियन ज्यादा थे। यह आँकड़ा मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी और राजनीतिक मुद्दों के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
क्योडो के शुरुआती आँकड़ों के मुताबिक,इस चुनाव में वोटर टर्नआउट लगभग 56.23 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया,जो पिछले चुनाव से करीब दो प्रतिशत ज्यादा है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जापान में मतदाता उदासीनता लंबे समय से एक चुनौती रही है। खास बात यह भी रही कि 36 साल में पहली बार फरवरी महीने में आम चुनाव कराए गए। यह फैसला खुद प्रधानमंत्री ताकाइची ने लिया था,हालाँकि इसकी आलोचना भी हुई क्योंकि कई इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण चुनाव प्रचार और वोटिंग प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इसके बावजूद,खराब मौसम और आलोचनाओं के बीच हुए इस चुनाव में एलडीपी की भारी जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि ताकाइची के नेतृत्व को जनता का मजबूत समर्थन हासिल है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वह इस जनादेश का इस्तेमाल किस तरह करती हैं—चाहे वह आर्थिक सुधार हों,सामाजिक नीतियाँ हों या फिर संविधान संशोधन जैसे संवेदनशील मुद्दे। इतना तय है कि इस ऐतिहासिक जीत के साथ जापान की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है,जिसमें प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और उनकी पार्टी एलडीपी की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा निर्णायक होने वाली है।
