केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (तस्वीर क्रेडिट@PiyushGoyal)

भारत-अमेरिका रिश्तों में असीम संभावनाएँ, 5-6 साल में 500 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है द्विपक्षीय व्यापार: पीयूष गोयल

नई दिल्ली,9 फरवरी (युआईटीवी)- केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को लेकर बड़ा भरोसा जताते हुए कहा है कि आने वाले 5 से 6 वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 500 अरब डॉलर के आँकड़ें को छू सकता है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्तों में अपार संभावनाएँ हैं और हाल ही में घोषित ट्रेड डील फ्रेमवर्क इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। पीयूष गोयल का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है,लेकिन भारत लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है।

एनडीटीवी प्रॉफिट कॉन्क्लेव में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर भारत के उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने बताया कि इस समझौते से न सिर्फ व्यापार को बढ़ावा मिलेगा,बल्कि निवेश,नई तकनीक और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उनके मुताबिक,भारत सरकार ऐसे समझौतों पर फोकस कर रही है,जो देश की आर्थिक मजबूती को बढ़ाएँ और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और सशक्त बनाएँ।

पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील फ्रेमवर्क से कई प्रमुख सेक्टरों में नई संभावनाएँ खुलेंगी। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,डेटा सेंटर,सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को इससे बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से मजबूत हो रहा है और अमेरिका के साथ साझेदारी से यह और रफ्तार पकड़ेगा। इससे भारत न सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता बनेगा,बल्कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते से भारत को अमेरिका से आने वाले उत्पादों का लाभ मिलेगा,वहीं देश के भीतर नए निवेश के अवसर भी पैदा होंगे। इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुँच मिलेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा संतुलित व्यापार ढाँचा तैयार करना है,जिसमें घरेलू उद्योगों के हित सुरक्षित रहें और साथ ही विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन मिले।

अमेरिका के अलावा भारत अन्य देशों के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। पीयूष गोयल ने बताया कि भारत अब तक 9 एफटीए पर हस्ताक्षर कर चुका है,जिनके जरिए 38 देशों के साथ व्यापार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से भारत को वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिली है और निर्यातकों को नए अवसर मिले हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत इस समय कनाडा के साथ एफटीए को लेकर बातचीत कर रहा है। इसके अलावा एक और देश के साथ समझौता लगभग अंतिम चरण में है,हालाँकि उस देश का नाम उन्होंने सार्वजनिक नहीं किया।

पीयूष गोयल ने कहा कि मुश्किल वैश्विक हालात के बावजूद भारत का कुल व्यापार इस साल 5 से 6 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता,भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटें देखने को मिल रही हैं,लेकिन भारत इन चुनौतियों के बीच भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह स्थिर नीतियाँ,सुधारों पर सरकार का फोकस और निवेशकों का बढ़ता भरोसा है।

उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि भारत एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पीयूष गोयल के मुताबिक,सरकार की नीतियों में निरंतरता और पारदर्शिता ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाया है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर,मैन्युफैक्चरिंग,डिजिटल इकॉनमी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में हो रहे सुधारों का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है।

अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर पीयूष गोयल ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सौहार्दपूर्ण और बिना किसी तनाव के संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच खुलकर चर्चा हुई और सभी पक्षों का सहयोग मिला। उनके अनुसार,इस तरह की सकारात्मक बातचीत ही मजबूत और टिकाऊ व्यापारिक रिश्तों की नींव रखती है। सरकार का फोकस ऐसे समझौते करने पर है जो सिर्फ आँकड़ों तक सीमित न रहें,बल्कि जमीन पर वास्तविक आर्थिक बदलाव लाएं।

पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि भारत साल 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि व्यापार में लगातार हो रही बढ़ोतरी और दुनिया के कई देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत की इस यात्रा को समर्थन दे रही है। उनके मुताबिक,भारत की युवा आबादी,बढ़ता उपभोक्ता बाजार और तकनीकी क्षमताएँ देश को आने वाले दशकों में वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाएँगी।

यह बयान ऐसे समय पर आया है,जब भारत-अमेरिका ट्रेड डील फ्रेमवर्क की घोषणा हुई है और इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता सही तरीके से लागू होता है,तो भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते नई ऊँचाइयों को छू सकते हैं और इसका सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।