विवेक ओबेरॉय(तस्वीर क्रेडिट@kamaalrkhan)

विवेक ओबरॉय को मिला पर्सनैलिटी राइट्स का कानूनी संरक्षण,बिना अनुमति नाम-तस्वीर-आवाज़ के इस्तेमाल पर सख्त रोक

मुंबई,9 फरवरी (युआईटीवी)- बॉलीवुड और डिजिटल दुनिया के बीच बढ़ती टकराहट के दौर में अब एक और बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। अभिनेता विवेक ओबरॉय के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अहम और निर्णायक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अभिनेता के नाम,छवि,आवाज और पहचान से जुड़ी किसी भी सामग्री का उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करना गैरकानूनी माना जाएगा। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसे किसी भी उल्लंघन को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस फैसले के साथ विवेक ओबरॉय भी उन बड़े फिल्मी सितारों की सूची में शामिल हो गए हैं,जिन्हें कोर्ट से पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा मिल चुकी है। इससे पहले सलमान खान,अमिताभ बच्चन,अजय देवगन,रजनीकांत,अनिल कपूर,ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन, ऋतिक रोशन और जैकी श्रॉफ जैसे दिग्गज कलाकार भी अपने नाम,पहचान और छवि के दुरुपयोग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं और उन्हें न्यायिक संरक्षण प्राप्त हुआ है।

विवेक ओबरॉय की ओर से अदालत में पक्ष रख रही वरिष्ठ अधिवक्ता सना रईस खान ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिनेता विवेक आनंद ओबेरॉय के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए उल्लंघनकारी सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। अदालत का यह आदेश सिर्फ मौजूदा सामग्री को हटाने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भविष्य में किसी भी तरह के उल्लंघन को रोकने के लिए एक सख्त चेतावनी भी है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में कानून से बच निकलने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।

अधिवक्ता सना रईस खान के अनुसार,विवेक ओबरॉय को जानबूझकर निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ओबरॉय न सिर्फ सिनेमा जगत के एक जाने-माने अभिनेता हैं,बल्कि बीते दो दशकों से सामाजिक और उद्यमशील गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। ऐसे में उनके नाम,छवि और आवाज का बिना इजाजत व्यावसायिक इस्तेमाल करना केवल कानूनी उल्लंघन नहीं,बल्कि उनके निजी जीवन और परिवार पर सीधा हमला है। इसका असर उनके परिवार और खासकर छोटे बच्चों पर भी पड़ सकता है,जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत के समक्ष यह भी रखा गया कि कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियाँ और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अभिनेता की तस्वीरों,वीडियो क्लिप्स,आवाज और यहाँ तक कि ब्रांडिंग के लिए उनके नाम का इस्तेमाल बिना अनुमति कर रहे थे। कुछ मामलों में एआई तकनीक के जरिए उनके चेहरे और आवाज की नकल कर विज्ञापन,प्रमोशनल कंटेंट और क्लिकबेट वीडियो तैयार किए जा रहे थे। यह सब न सिर्फ भ्रामक था,बल्कि अभिनेता की प्रतिष्ठा और पहचान को भी नुकसान पहुँचाने वाला था।

विवेक ओबरॉय की ओर से यह दलील भी दी गई कि कई बार संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट्स से ऐसी सामग्री हटाने का अनुरोध किया गया,लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद जब सामग्री हटाई नहीं गई,तब मजबूर होकर अदालत का सहारा लेना पड़ा। कोर्ट ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए माना कि डिजिटल युग में सेलेब्रिटीज़ के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े और स्पष्ट आदेशों की जरूरत है।

इस फैसले को कानूनी जानकार एक मजबूत मिसाल के तौर पर देख रहे हैं। अधिवक्ता सना रईस खान ने कहा कि यह आदेश यह साफ संदेश देता है कि किसी व्यक्ति का वंश,पहचान या व्यक्तित्व सार्वजनिक संपत्ति नहीं है। केवल व्यूज़,क्लिक या मुनाफा कमाने के लिए किसी के नाम और छवि के साथ किया गया खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसा करने वालों को न सिर्फ सामग्री हटानी पड़ेगी,बल्कि उन्हें कानूनी रूप से गंभीर परिणामों का सामना भी करना होगा।

डिजिटल युग में एआई,डीपफेक और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। सेलेब्रिटीज़ के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर फर्जी विज्ञापन,झूठी खबरें और भ्रामक कंटेंट बनाना अब आम बात होती जा रही है। यही वजह है कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े नाम अदालत का रुख कर रहे हैं,ताकि अपने अधिकारों और निजी पहचान की रक्षा कर सकें।

विवेक ओबरॉय की यह कानूनी जीत न सिर्फ उनके लिए राहत लेकर आई है,बल्कि यह पूरे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए एक मजबूत संदेश भी है। इससे पहले अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे कलाकारों के मामलों में भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया था,जिसमें कहा गया था कि किसी व्यक्ति की आवाज,चेहरा और पहचान उसकी निजी संपत्ति है और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल केवल अनुमति के साथ ही किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ सकती है,क्योंकि तकनीक के साथ दुरुपयोग के रास्ते भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में अदालतों के ये फैसले न सिर्फ सेलेब्रिटीज़ के अधिकारों की रक्षा करेंगे,बल्कि आम लोगों के लिए भी एक मिसाल बनेंगे कि उनकी पहचान और निजता का सम्मान किया जाना जरूरी है।

विवेक ओबरॉय के पक्ष में आया यह फैसला पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर भारतीय न्यायपालिका के सख्त और स्पष्ट रुख को दर्शाता है। यह आदेश बताता है कि डिजिटल युग में भी कानून व्यक्ति की पहचान,सम्मान और निजता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी तरह के दुरुपयोग को सख्ती से रोका जाएगा।