वाशिंगटन,10 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के साथ व्यापार समझौते की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और कई अहम मुद्दों पर बातचीत आगे भी जारी रहेगी। भले ही दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते के ढाँचे पर सहमति जता दी हो और कुछ बड़े फैसलों को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया गया हो,लेकिन टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं जैसे कई संवेदनशील विषय अभी भी चर्चा के दायरे में हैं। व्हाइट हाउस की ओर से जारी फैक्ट शीट में कहा गया है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े नियमों,तकनीकी अड़चनों और बाजार पहुँच को लेकर गहन बातचीत जारी रहेगी।
यह फैक्ट शीट उस संयुक्त बयान के बाद सामने आई है,जो पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद जारी किया गया था। इस उच्चस्तरीय संवाद में दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका आपसी व्यापार को मजबूत करने के लिए एक अंतरिम समझौते के ढाँचे पर सहमति जताई थी। साथ ही,उन्होंने भविष्य में एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई थी। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक रिश्ते न सिर्फ आर्थिक विकास,बल्कि रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी बेहद अहम हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार,बातचीत का अगला चरण काफी व्यापक होगा। इसमें शेष टैरिफ बाधाओं के अलावा अतिरिक्त नॉन-टैरिफ अवरोधों पर चर्चा की जाएगी, जो लंबे समय से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में अड़चन बने हुए हैं। इसके साथ ही व्यापार में तकनीकी बाधाओं,सीमा शुल्क प्रक्रियाओं,व्यापार सुविधा और नियम व्यवस्था को सरल व पारदर्शी बनाने जैसे विषयों पर भी सहमति बनाने की कोशिश होगी। अमेरिका का मानना है कि इन सुधारों से दोनों देशों के व्यापारियों और निवेशकों को समान अवसर मिलेंगे और आपसी व्यापार में तेजी आएगी।
व्यापार समझौते की बातचीत केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है। सेवाओं,निवेश,बौद्धिक संपदा अधिकार,श्रम और पर्यावरण जैसे विषय भी बातचीत के एजेंडे में शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी खरीद और सरकारी कंपनियों की कथित अनुचित व्यापार नीतियों को लेकर भी अमेरिका अपनी चिंताओं को सामने रख रहा है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि इन सभी क्षेत्रों में संतुलित और पारदर्शी नियमों की जरूरत है,ताकि व्यापार का लाभ दोनों देशों को समान रूप से मिल सके।
हालाँकि,कई मुद्दों पर सहमति अभी बाकी है,लेकिन अंतरिम समझौते के तहत कुछ अहम फैसले तत्काल प्रभाव से लागू करने पर दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले सामान पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने का फैसला किया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक,यह कदम भारत की उस प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया है,जिसमें उसने रूस से तेल खरीदना बंद करने की बात कही है। इस फैसले को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। इस संबंध में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर कर दिए हैं,जिससे यह निर्णय औपचारिक रूप से लागू हो गया है।
इसके अलावा अमेरिका ने भारत पर लगाए जाने वाले पारस्परिक शुल्क में भी कटौती करने का फैसला किया है। पहले यह शुल्क 25 प्रतिशत था,जिसे अब घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह रियायत इसलिए दी गई है क्योंकि भारत ने व्यापार असंतुलन को कम करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अमेरिका के साथ सहयोग करने की इच्छा दिखाई है। अमेरिका लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि भारत के ऊँचे आयात शुल्क अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बनाते हैं।
भारत की ओर से भी कुछ अहम वादे किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत भारत ने अमेरिका से ज्यादा मात्रा में सामान और सेवाएँ खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके साथ ही भारत ने यह भी स्वीकार किया है कि वह उन नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर काम करेगा,जो नियमों और प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण व्यापार में रुकावट बनती हैं। दोनों देशों ने मूल नियमों यानी ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ पर बातचीत करने पर भी सहमति जताई है,ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यापार समझौते से मिलने वाले फायदे मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को ही मिलें,न कि किसी तीसरे देश को।
डिजिटल व्यापार इस अंतरिम समझौते का एक और अहम स्तंभ बनकर उभरा है। व्हाइट हाउस के अनुसार,भारत ने डिजिटल सेवा कर हटाने पर सहमति जताई है,जिसे लेकर अमेरिका लंबे समय से आपत्ति जता रहा था। इसके बदले में दोनों देशों ने डिजिटल व्यापार के लिए द्विपक्षीय नियम तैयार करने का फैसला किया है। इन नियमों के तहत ऑनलाइन लेन-देन पर सीमा शुल्क नहीं लगाया जाएगा और किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण नियमों से बचा जाएगा। अमेरिका का मानना है कि इससे टेक्नोलॉजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को नई संभावनाएँ मिलेंगी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना भी इस समझौते का अहम हिस्सा है। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सप्लाई चेन को ज्यादा लचीला और सुरक्षित बनाना जरूरी है। इसके लिए भारत और अमेरिका प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएँगे,खासकर सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और उभरती तकनीकों में। व्हाइट हाउस का कहना है कि इस सहयोग से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगी।
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में भारत के ऊँचे आयात शुल्कों का भी जिक्र किया गया है। अमेरिका के अनुसार,भारत अब तक अमेरिकी सामानों पर अपेक्षाकृत ज्यादा शुल्क लगाता रहा है। उदाहरण के तौर पर कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक और कुछ ऑटोमोबाइल पर 100 प्रतिशत से भी अधिक शुल्क लगाए जाते हैं। अमेरिका इन शुल्कों को कम करने की माँग करता रहा है,ताकि उसके उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुँच मिल सके। हालाँकि,भारत का तर्क रहा है कि ये शुल्क घरेलू किसानों और उद्योगों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है,लेकिन यह साफ है कि बातचीत का रास्ता अभी लंबा है। अंतरिम समझौते से दोनों देशों को तत्काल कुछ राहत और संकेत जरूर मिले हैं,लेकिन एक व्यापक और संतुलित व्यापार समझौते के लिए अभी कई दौर की बातचीत बाकी है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश अपने-अपने हितों के बीच संतुलन बनाते हुए किस तरह इस रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हैं।
