वाशिंगटन,10 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिधि ग्रेग स्ट्यूबी ने इस विवादास्पद वीजा योजना को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक नया कानून पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून का नाम “एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट” रखा गया है,जिसे संक्षेप में एक्साइल एक्ट कहा जा रहा है। इस विधेयक के जरिए इमिग्रेशन और नेशनलिटी एक्ट में संशोधन करने का प्रस्ताव है,ताकि एच-1बी वीजा योजना को चरणबद्ध तरीके से नहीं,बल्कि सीधे तौर पर खत्म किया जा सके।
एच-1बी वीजा योजना के तहत अमेरिकी कंपनियों को तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा,वित्त और अन्य विशेष कौशल वाले क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है। यह योजना दशकों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था का हिस्सा रही है और खासतौर पर सिलिकॉन वैली जैसी तकनीकी अर्थव्यवस्थाओं में इसकी अहम भूमिका मानी जाती रही है। हालाँकि,इसके साथ ही यह योजना लगातार विवादों में भी घिरी रही है। आलोचकों का आरोप है कि इसका इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की जगह सस्ते विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए किया जाता है,जिससे स्थानीय कर्मचारियों के वेतन और रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।
ग्रेग स्ट्यूबी ने अपने बयान में कहा कि एच-1बी वीजा प्रोग्राम अमेरिकी नागरिकों के हितों के खिलाफ काम कर रहा है। उनके अनुसार, “अमेरिकी नागरिकों की भलाई और समृद्धि के बजाय विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देना हमारे मूल्यों और राष्ट्रीय हितों को कमजोर करता है। हमारे कर्मचारियों और युवाओं को एच-1बी वीजा प्रोग्राम से लगातार विस्थापित और अधिकारहीन किया जा रहा है,जो हमारे वर्कफोर्स की कीमत पर कंपनियों और विदेशी प्रतिस्पर्धियों को फायदा पहुँचाता है।” स्ट्यूबी का कहना है कि यह योजना अमेरिकी युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित कर रही है और देश के भीतर प्रतिभा विकास को नुकसान पहुँचा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि जब तक अमेरिका अपने नागरिकों को प्राथमिकता नहीं देगा,तब तक “अमेरिकी सपना” सुरक्षित नहीं रह सकता। स्ट्यूबी के शब्दों में, “हम अपने बच्चों के लिए अमेरिकी सपने को तब तक सुरक्षित नहीं रख सकते,जब तक हम उसका हिस्सा गैर-नागरिकों को देते रहेंगे। इसलिए मैं काम करने वाले अमेरिकियों को फिर से प्राथमिकता देने के लिए एक्साइल एक्ट पेश कर रहा हूँ।” उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि यह प्रस्ताव केवल आव्रजन नीति से जुड़ा नहीं है,बल्कि अमेरिका की घरेलू राजनीति और राष्ट्रवादी सोच से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
स्ट्यूबी के कार्यालय की ओर से जारी की गई जानकारी में दावा किया गया है कि एच-1बी वीजा पाने वालों में 80 प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय या चीनी नागरिक होते हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि कंपनियाँ अक्सर कम उम्र के विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं,जिन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन पर काम कराया जा सकता है। आलोचकों का मानना है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों को न सिर्फ नौकरी के अवसरों से वंचित होना पड़ता है,बल्कि वेतन वृद्धि और करियर प्रगति पर भी असर पड़ता है।
कानून के मसौदे के मुताबिक,साल 2027 से हर वित्तीय वर्ष में जारी किए जाने वाले एच-1बी वीजा की संख्या शून्य कर दी जाएगी। इसका मतलब यह होगा कि यह योजना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और अमेरिकी कंपनियाँ भविष्य में इस श्रेणी के तहत विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त नहीं कर सकेंगी। अगर यह कानून पारित हो जाता है,तो इसका असर न केवल अमेरिकी टेक इंडस्ट्री पर पड़ेगा,बल्कि उन लाखों विदेशी पेशेवरों पर भी पड़ेगा,जो अमेरिका में काम करने का सपना देखते हैं।
एच-1बी वीजा योजना की शुरुआत मूल रूप से इस उद्देश्य से की गई थी कि अमेरिका उन क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी को पूरा कर सके,जहाँ देश के भीतर पर्याप्त योग्य पेशेवर उपलब्ध नहीं होते। समय के साथ यह योजना भारत और चीन जैसे देशों के इंजीनियरों,आईटी पेशेवरों और वैज्ञानिकों के लिए अमेरिका में काम करने का एक बड़ा रास्ता बन गई। कई अमेरिकी कंपनियों का तर्क रहा है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभा की जरूरत है और एच-1बी वीजा इस जरूरत को पूरा करने का एक अहम जरिया है।
हालाँकि,इस योजना को लेकर विरोध भी उतना ही मजबूत रहा है। अमेरिका में श्रमिक संगठनों और कुछ राजनीतिक समूहों का कहना है कि एच-1बी वीजा का दुरुपयोग होता है और इसका फायदा बड़ी कंपनियों को मिलता है,जबकि आम अमेरिकी कर्मचारी नुकसान उठाते हैं। उनका आरोप है कि कंपनियाँ इस योजना का इस्तेमाल लागत कम करने और कर्मचारियों पर दबाव बनाए रखने के लिए करती हैं।
ग्रेग स्ट्यूबी का प्रस्ताव ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका में आव्रजन नीति एक बार फिर चुनावी राजनीति का अहम मुद्दा बनती जा रही है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर “अमेरिका फर्स्ट” जैसी सोच को समर्थन देने वाले नेता लंबे समय से सख्त आव्रजन कानूनों की माँग करते रहे हैं। वहीं,डेमोक्रेटिक पार्टी और टेक इंडस्ट्री से जुड़े कई संगठन एच-1बी वीजा को नवाचार और आर्थिक विकास के लिए जरूरी मानते हैं।
फिलहाल यह देखना बाकी है कि एक्साइल एक्ट को कांग्रेस में कितना समर्थन मिलता है और क्या यह कानून का रूप ले पाता है या नहीं,लेकिन इतना तय है कि इस प्रस्ताव ने एच-1बी वीजा को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अगर यह कानून आगे बढ़ता है,तो इसका असर न केवल अमेरिकी श्रम बाजार पर पड़ेगा,बल्कि भारत जैसे देशों के उन हजारों पेशेवरों पर भी पड़ेगा,जिनके लिए एच-1बी वीजा अमेरिका में करियर बनाने का सबसे बड़ा जरिया रहा है।
