चेन्नई,11 फरवरी (युआईटीवी)- भारतीय निर्वाचन आयोग आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतदाता जागरूकता अभियान को नई तकनीक के साथ जोड़ने जा रहा है। तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी समेत चार राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले आयोग ने मतदाताओं तक प्रभावी तरीके से पहुँच बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह पहली बार है,जब आयोग आधिकारिक रूप से मतदाता शिक्षा सामग्री तैयार करने में एआई तकनीक को बढ़ावा दे रहा है।
जानकारी के अनुसार,निर्वाचन आयोग ने मीडिया एजेंसियों,क्रिएटिव प्रोफेशनल्स और आम लोगों को आमंत्रित किया है कि वे एआई आधारित जागरूकता वीडियो तैयार करें। इन वीडियो का फोकस चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर होगा,जिनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की कार्यप्रणाली,वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट की भूमिका,नैतिक मतदान व्यवहार और बिना किसी डर या लालच के मतदान प्रक्रिया में भाग लेने की अहमियत शामिल है। आयोग चाहता है कि मतदाता न केवल अपने मतदान अधिकार को समझें,बल्कि उसे जिम्मेदारी के साथ निभाएँ।
यह पूरा अभियान व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी कार्यक्रम,जिसे स्वीप के नाम से जाना जाता है,के तहत संचालित किया जाएगा। स्वीप कार्यक्रम निर्वाचन आयोग का सबसे बड़ा मतदाता संपर्क प्लेटफॉर्म है,जिसके जरिए वर्षों से मतदाता जागरूकता की पहल की जाती रही है। पहले इस कार्यक्रम के अंतर्गत मीडिया हाउस द्वारा निर्मित लघु फिल्में,जिंगल,गीत और सूचना आधारित विज्ञापन जारी किए जाते थे,लेकिन इस बार तकनीकी नवाचार के रूप में एआई आधारित सामग्री को शामिल किया गया है।
आयोग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक,एआई आधारित वीडियो संवादात्मक और सरल भाषा में होने चाहिए,ताकि आम मतदाता आसानी से उन्हें समझ सकें। इन वीडियो का प्रारूप ऐसा हो कि वे शिक्षाप्रद होने के साथ-साथ आकर्षक भी हों। एजेंसियों या व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत की गई स्क्रिप्ट को पहले चुनाव विभाग द्वारा जाँचा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद ही प्रोडक्शन कार्य शुरू किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी सामग्री तथ्यों के अनुरूप हो और उसमें किसी प्रकार की भ्रामक जानकारी न हो।
निर्वाचन आयोग ने इस पहल के लिए सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी वीडियो पूरी तरह गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष होने चाहिए। इनमें किसी भी राजनीतिक दल,उम्मीदवार या विचारधारा का प्रत्यक्ष या परोक्ष प्रचार नहीं होना चाहिए। सामग्री पूरी तरह तटस्थ,समावेशी और बिना किसी भेदभाव के तैयार की जानी चाहिए। आयोग का लक्ष्य केवल मतदाता जागरूकता बढ़ाना है,न कि किसी राजनीतिक पक्ष को लाभ पहुँचाना।
वीडियो तमिल या अंग्रेजी भाषा में बनाए जा सकते हैं। हालाँकि,तमिल भाषा में तैयार किए गए वीडियो में व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अंग्रेजी सबटाइटल अनिवार्य होंगे। इससे विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के मतदाताओं तक संदेश प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा। निर्वाचन अधिकारियों का मानना है कि भाषा की सरलता और दृश्य प्रस्तुति की प्रभावशीलता मतदाताओं पर सकारात्मक असर डालेगी।
इस पहल को प्रोत्साहित करने के लिए आयोग ने वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया है। प्रत्येक स्वीकृत एआई आधारित वीडियो परियोजना को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे स्वतंत्र क्रिएटर्स और छोटी एजेंसियों को भी इस अभियान में भाग लेने का अवसर मिलेगा। आयोग का उद्देश्य अधिक से अधिक रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित करना है,ताकि विविध दृष्टिकोणों से मतदाता शिक्षा सामग्री तैयार हो सके।
एआई संचालित कंटेंट के अलावा आयोग सेलिब्रिटी आधारित मतदाता जागरूकता वीडियो भी जारी करने की योजना बना रहा है। इन वीडियो में लोकप्रिय हस्तियाँ लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करती नजर आ सकती हैं। आयोग का मानना है कि जानी-मानी हस्तियों की भागीदारी से संदेश का प्रभाव बढ़ेगा और युवा मतदाताओं तक भी आसानी से पहुँच बनाई जा सकेगी।
तैयार किए गए वीडियो को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाएगा। इन्हें मूवी थिएटर,टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाने के लिए अनुकूल बनाया जाएगा। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सोशल मीडिया पर इन वीडियो की पहुँच खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोग चाहता है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मतदाता इन संदेशों से जुड़ें और चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें।
चुनाव अधिकारियों का मानना है कि एआई को मतदाता जागरूकता में शामिल करने से संदेशों की प्रस्तुति अधिक प्रभावशाली और आधुनिक होगी। एआई तकनीक के माध्यम से स्थानीय संदर्भों के अनुरूप सामग्री तैयार की जा सकती है,जिससे मतदाताओं को अधिक जुड़ाव महसूस होगा। यह पहल देश में चुनावी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है,तो भविष्य में अन्य राज्यों के चुनावों में भी एआई आधारित मतदाता शिक्षा अभियान को अपनाया जा सकता है। इससे भारत में एक गैर-दलीय,निष्पक्ष और तकनीक-संचालित ‘वोट के लिए बाहर निकलो’ अभियान को मजबूती मिल सकती है। निर्वाचन आयोग की यह पहल न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है,बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सहभागी और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
