नई दिल्ली,11 फरवरी (युआईटीवी)- दिल्ली के रोहिणी इलाके में सीवर का ढक्कन खुला होने की वजह से एक 32 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सोमवार,9 फरवरी को हुआ,लेकिन इसकी सूचना पुलिस को अगले दिन 10 फरवरी की शाम करीब 4 बजे दी गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार,बेगमपुर थाने को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुँचीं और जाँच शुरू की गई। मृतक की पहचान बृजू के रूप में हुई है,जो बिहार के समस्तीपुर जिले का रहने वाला था। वह दिल्ली में मजदूरी का काम करता था और रोहिणी क्षेत्र में ही रह रहा था। बताया जा रहा है कि उसकी उम्र करीब 32 वर्ष थी। हादसे के समय वह अपने एक दोस्त के साथ था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक,जिस स्थान पर यह घटना हुई,वहाँ सीवर का ढक्कन पूरी तरह से खुला हुआ था। इतना ही नहीं,आसपास के कई अन्य सीवर भी बिना ढक्कन के पड़े थे,जिससे इलाके में खतरे की स्थिति बनी हुई थी। बृजू अनजाने में खुले सीवर में गिर गया,जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के वक्त उसके साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति ने तुरंत इसकी जानकारी किसी को नहीं दी। जब बाद में बृजू की तलाश शुरू हुई,तब उसने पूरी घटना के बारे में बताया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। हालाँकि,स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद आनन-फानन में सीवर के ढक्कन लगाए गए,जिससे यह साफ होता है कि पहले से ही यहाँ सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। स्थानीय अधिवक्ता तेजपाल यादव ने इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
तेजपाल यादव ने बताया कि सोमवार को दो दोस्त मजदूरी का काम कर रहे थे। उसी दौरान एक दोस्त खुले सीवर में गिर गया। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के आसपास मौजूद किसी भी सीवर पर ढक्कन नहीं लगा था। हादसे के बाद जब वे शाम करीब 7 बजे मौके पर पहुँचे,तो वहाँ डीडीए के अधिकारी मौजूद थे और अपने साथ सीवर के ढक्कन लाकर लगा रहे थे। उन्होंने संदेह जताया कि यदि यह नियमित मरम्मत का काम होता,तो संबंधित विभाग पहले से सूचित होता।
तेजपाल यादव के मुताबिक,उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि यहाँ प्राइवेट टैंकर क्यों लगाए जा रहे हैं और संबंधित विभाग के अधिकारी कहाँ हैं। जब उन्होंने 112 पर कॉल किया,तब पता चला कि किसी भी विभाग को पहले से इस घटना की जानकारी नहीं दी गई थी। इससे यह आशंका और गहरा गई कि हादसे के बाद स्थिति को संभालने के लिए जल्दबाजी में कदम उठाए गए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह इलाका कॉलोनी से जुड़ी मुख्य सड़क के पास है और यहाँ बच्चे भी खेलते हैं। ऐसे में खुले सीवर किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद सीवर के ढक्कन नहीं लगाए गए। अब एक व्यक्ति की जान जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया है।
मृतक बृजू के बारे में बताया गया है कि उसकी पत्नी और बच्चे गाँव में रहते हैं। वह जल्द ही अपने गाँव लौटने की योजना बना रहा था। परिवार को इस घटना की सूचना दे दी गई है। बृजू की असामयिक मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह मेहनतकश और सीधा-सादा व्यक्ति था,जो रोजाना की मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह भी जाँच की जा रही है कि संबंधित विभाग की ओर से लापरवाही तो नहीं बरती गई। यदि सीवर का ढक्कन लंबे समय से खुला था और इसकी शिकायतें पहले की गई थीं,तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में बुनियादी ढाँचे की स्थिति और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले सीवर,टूटी सड़कें और अधूरे निर्माण कार्य अक्सर हादसों की वजह बनते हैं,लेकिन समय रहते सुधार नहीं किए जाते। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अब भी प्रशासन नहीं चेता,तो आगे भी ऐसे हादसे हो सकते हैं।
रोहिणी की इस दर्दनाक घटना ने एक परिवार को उजाड़ दिया है और यह याद दिलाया है कि छोटी सी लापरवाही भी किसी की जान ले सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जाँच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
