रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

रूस ने व्हाट्सएप पर लगाई पाबंदी, क्रेमलिन बोला- घरेलू ऐप ‘मैक्स’ को बढ़ावा देना मकसद

मास्को,13 फरवरी (युआईटीवी)- रूस और टेक दिग्गज मेटा के बीच डिजिटल टकराव अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। व्हाट्सएप ने बयान जारी कर कहा है कि रूस ने देश के भीतर उसके मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है। इसके तुरंत बाद क्रेमलिन ने भी पुष्टि कर दी कि मेटा की मैसेजिंग सर्विस पर पाबंदी लगा दी गई है और लोगों को इसके स्थान पर रूस के नए सरकारी प्लेटफॉर्म ‘मैक्स’ का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इस घटनाक्रम ने रूस में डिजिटल स्वतंत्रता,निजता और सरकारी निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने बुधवार देर रात जारी बयान में कहा कि रूसी अधिकारियों की कार्रवाई का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को एक सरकारी निगरानी ऐप की ओर धकेलना है। कंपनी ने सीधे तौर पर ‘मैक्स’ का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि यह कदम रूस में उसके 10 करोड़ से अधिक यूजर्स को निजी और सुरक्षित संवाद के विकल्प से वंचित करने जैसा है। मेटा का कहना है कि व्हाट्सएप को ब्लॉक करना केवल तकनीकी या कानूनी मामला नहीं है,बल्कि यह नागरिकों की डिजिटल स्वतंत्रता को सीमित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

व्हाट्सएप ने अपने बयान में कहा कि 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को निजी और सुरक्षित संवाद से अलग करना उन्हें पीछे की ओर धकेलने जैसा है और इससे रूस के लोगों की सुरक्षा कम होगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने यूजर्स को जुड़े रहने में मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करती रहेगी। हालाँकि,मौजूदा हालात में यह साफ नहीं है कि रूस में व्हाट्सएप की सेवाएं किस स्तर तक बाधित होंगी और क्या यूजर्स वीपीएन या अन्य तकनीकी उपायों के जरिए ऐप तक पहुँच बना पाएँगे।

दूसरी ओर,क्रेमलिन का कहना है कि यह कदम घरेलू डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने और रूसी कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। रूसी न्यूज एजेंसी तास के अनुसार,क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि मेटा को अनब्लॉक होने के लिए रूसी कानून का पालन करना होगा। उनका संकेत इस ओर था कि विदेशी कंपनियों को रूस के डेटा लोकलाइजेशन और सामग्री नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। पेसकोव ने यह भी कहा कि सरकार देश के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए स्थानीय विकल्पों को प्राथमिकता दे रही है।

रूस की सरकार पहले ही एक्स (पूर्व में ट्विटर),फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर चुकी है। इनमें से फेसबुक और इंस्टाग्राम मेटा के स्वामित्व में हैं। 2022 में यूक्रेन पर रूस के व्यापक सैन्य अभियान के बाद से देश में ऑनलाइन पाबंदियों में तेजी आई है। कई स्वतंत्र मीडिया वेबसाइट्स और अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। ऐसे में व्हाट्सएप पर पाबंदी को उसी श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विदेशी तकनीकी कंपनियों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशें शामिल हैं।

‘मैक्स’ नामक नए सरकारी प्लेटफॉर्म का इन दिनों रूस में जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है। डेवलपर्स और सरकारी अधिकारियों ने इसे मैसेजिंग,ऑनलाइन सरकारी सेवाओं,भुगतान और अन्य डिजिटल सुविधाओं के लिए वन-स्टॉप शॉप के रूप में पेश किया है। दावा किया जा रहा है कि यह प्लेटफॉर्म सुरक्षित है और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप काम करेगा। साथ ही अधिकारियों का कहना है कि यूजर डेटा केवल तब उपलब्ध कराया जाएगा जब प्रशासन इसकी माँग करेगा। हालाँकि,आलोचकों का तर्क है कि सरकारी नियंत्रण वाले प्लेटफॉर्म पर निजता और स्वतंत्र अभिव्यक्ति को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

डिजिटल अधिकारों के विशेषज्ञों का मानना है कि रूस में विदेशी टेक कंपनियों पर बढ़ता दबाव इंटरनेट के वैश्विक ढाँचे को खंडित करने की दिशा में एक और कदम है। एक ओर जहाँ सरकार इसे डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रही है,वहीं दूसरी ओर टेक कंपनियाँ और मानवाधिकार समूह इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता के अधिकार पर अंकुश के रूप में देख रहे हैं।

व्हाट्सएप पर लगी इस पाबंदी से रूस के करोड़ों उपयोगकर्ता प्रभावित होंगे,जो निजी और व्यावसायिक संवाद के लिए इस प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मेटा और रूसी सरकार के बीच किसी समझौते की संभावना बनती है या फिर रूस का डिजिटल परिदृश्य और अधिक बंद ढाँचे की ओर बढ़ता है। फिलहाल,इतना तय है कि रूस में डिजिटल संप्रभुता बनाम वैश्विक कनेक्टिविटी की बहस और तेज हो गई है।