नई दिल्ली,13 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। भारत को भी इस बोर्ड में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण मिला है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में इस बात की पुष्टि करते हुए एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अमेरिकी सरकार की ओर से भारत को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है और फिलहाल भारत इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं की समीक्षा कर रहा है।
रणधीर जायसवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत ने पश्चिम एशिया में शांति,स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का हमेशा समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने उन सभी पहलों का समर्थन किया है,जो गाजा समेत पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस प्रस्ताव को गंभीरता से देख रहा है और उसके कूटनीतिक,रणनीतिक तथा क्षेत्रीय प्रभावों का आकलन किया जा रहा है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की अवधारणा शुरुआत में एक सीमित उद्देश्य के साथ सामने आई थी। इसे वैश्विक नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में तैयार किया गया था,जिसका मुख्य लक्ष्य गाजा युद्धविराम योजना की निगरानी करना था। हालाँकि,बाद में ट्रंप प्रशासन ने इसके दायरे को विस्तारित करने के संकेत दिए। माना जा रहा है कि अब इस बोर्ड को केवल गाजा संघर्ष तक सीमित न रखकर व्यापक वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता की भूमिका देने की योजना है। इस विस्तार के तहत कई देशों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है।
भारत को मिला यह न्योता ऐसे समय में आया है,जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। भारत के इस क्षेत्र के साथ मजबूत आर्थिक और सामरिक संबंध हैं। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में कार्यरत हैं और भारत का ऊर्जा आयात भी बड़े पैमाने पर इसी क्षेत्र से होता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने परंपरागत रूप से संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है और सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति पर जोर दिया है।
इसी बीच इस्लामाबाद ने घोषणा की है कि वह 19 फरवरी को वाशिंगटन में प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में हिस्सा लेगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस बैठक में भाग लेंगे और उनके साथ उप प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री इशाक डार भी मौजूद रहेंगे। पाकिस्तान उन 14 देशों में शामिल है,जिन्होंने 22 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे।
पाकिस्तान की सक्रिय भागीदारी और भारत को मिला निमंत्रण दक्षिण एशिया की कूटनीति में भी नए समीकरण बना सकता है। भारत के लिए यह निर्णय केवल एक औपचारिक भागीदारी का मुद्दा नहीं है,बल्कि इसके दीर्घकालिक रणनीतिक निहितार्थ हो सकते हैं। यदि यह बोर्ड भविष्य में वैश्विक संघर्षों के समाधान में बड़ी भूमिका निभाता है,तो उसमें भारत की मौजूदगी उसे एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है। वहीं,भारत को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसकी स्वतंत्र विदेश नीति और सामरिक स्वायत्तता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि बोर्ड की संरचना, अधिकार और कार्यप्रणाली कैसी होगी। यदि यह मंच संतुलित,पारदर्शी और बहुपक्षीय सिद्धांतों पर आधारित होता है,तो भारत इसमें सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। हालाँकि,यदि इसे किसी एक देश की नीतिगत प्राथमिकताओं से जोड़ा जाता है,तो भारत सावधानी बरत सकता है।
फिलहाल विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और कोई अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। आने वाले दिनों में भारत का फैसला यह तय करेगा कि वह इस उभरते वैश्विक मंच का हिस्सा बनकर शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाता है या फिर दूरी बनाए रखकर अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक राह पर आगे बढ़ता है।
