प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@RitamVarta)

बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की बड़ी जीत,पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई,द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की जताई उम्मीद

नई दिल्ली,13 फरवरी (युआईटीवी)- बांग्लादेश के संसदीय चुनाव 2026 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की उल्लेखनीय सफलता के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश जारी कर कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के तारिक रहमान के नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक,प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि बांग्लादेश में संसदीय चुनावों में बीएनपी को बड़ी जीत दिलाने के लिए वह तारिक रहमान को दिल से बधाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यह जनादेश बांग्लादेश के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे का प्रमाण है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने तथा साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए रहमान के साथ काम करने को उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है,जब दक्षिण एशिया की राजनीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

बांग्लादेश के चुनाव परिणामों के अनुसार,बीएनपी ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। पार्टी 300 में से 299 सीटों पर हुए मतदान में 198 सीटों पर आगे चल रही है। एक सीट पर उम्मीदवार के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया था। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी 62 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है,जबकि नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) दो सीटों पर आगे है। मतगणना अभी जारी है,लेकिन रुझान स्पष्ट रूप से बीएनपी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।

तारिक रहमान ने ढाका-17 सीट से जीत दर्ज की है। यह उनकी देश वापसी के बाद पहली बड़ी चुनावी परीक्षा थी,जिसमें उन्होंने सफलता हासिल की। वह पिछले साल दिसंबर में 17 वर्षों से अधिक समय तक स्वैच्छिक निर्वासन में रहने के बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वापसी ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी थी। वापसी के तुरंत बाद उन्होंने व्यापक चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया और देशभर में बड़ी रैलियाँ कीं। उन्होंने कानून-व्यवस्था बहाल करने,बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का वादा किया।

जीत के बाद तारिक रहमान ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे विजय जुलूस निकालने के बजाय देशभर में शुक्रवार की नमाज के बाद विशेष दुआ का आयोजन करें। उनका यह संदेश संयम और जिम्मेदारी का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम चुनाव के बाद किसी भी संभावित तनाव को टालने और एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश है।

तारिक रहमान एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनकी माँ खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और लंबे समय तक देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहीं। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानी जाती थीं। रहमान की राजनीतिक विरासत और पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उनके नेतृत्व को एक विशेष पहचान दी है। हालाँकि,उनका राजनीतिक सफर विवादों और निर्वासन से भी जुड़ा रहा है,लेकिन उनकी वापसी और अब की जीत ने उन्हें फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।

भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक,सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार,कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में बांग्लादेश की नई राजनीतिक परिस्थिति पर नई दिल्ली की करीबी नजर है। प्रधानमंत्री मोदी का बधाई संदेश यह संकेत देता है कि भारत नई सरकार के साथ मिलकर द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में यह बदलाव दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी है,जिसके साथ सीमा प्रबंधन,आतंकवाद निरोध,नदी जल बँटवारा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे कई मुद्दे जुड़े हैं। यदि नई सरकार स्थिर और विकासोन्मुखी नीति अपनाती है, तो दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।

तारिक रहमान के लिए यह जीत व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। 17 साल के निर्वासन के बाद लौटकर इतनी बड़ी चुनावी सफलता हासिल करना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उनकी राजनीतिक रणनीति,जनसभाओं में सक्रियता और सुधारवादी वादों ने मतदाताओं को प्रभावित किया है। अब चुनौती यह होगी कि वे अपने वादों को किस तरह धरातल पर उतारते हैं और देश में स्थिरता बनाए रखते हैं।

बांग्लादेश के चुनाव परिणामों ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भारत की ओर से आई सकारात्मक प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि नई राजनीतिक परिस्थिति में भी दोनों देशों के संबंध सहयोग और पारस्परिक सम्मान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। आने वाले दिनों में नई सरकार के गठन और नीतिगत घोषणाओं पर सभी की नजर रहेगी,जो यह तय करेंगी कि बांग्लादेश किस दिशा में आगे बढ़ता है और भारत-बांग्लादेश संबंधों का अगला अध्याय किस रूप में सामने आता है।