एयर इंडिया

डीजीसीए ने एयर इंडिया पर लगाया 1 करोड़ का जुर्माना,बिना वैध एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट के उड़ान भरने का मामला

नई दिल्ली,14 फरवरी (युआईटीवी)- नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती बरतते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयर इंडिया पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उस गंभीर उल्लंघन के बाद की गई है,जिसमें एयर इंडिया ने एक एयरबस ए320 विमान को वैध एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (एआरसी) के बिना आठ बार उड़ाया। विमानन नियामक ने इस चूक को बेहद गंभीर मानते हुए कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।

डीजीसीए द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एयरबस ए320 विमान को पिछले वर्ष 24 और 25 नवंबर के बीच नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद के बीच कई उड़ानों में संचालित किया गया,जबकि उसके पास अनिवार्य एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं था। यह प्रमाणपत्र हर विमान के लिए वार्षिक रूप से अनिवार्य होता है और यह सुनिश्चित करता है कि विमान सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर खरा उतरता है। इस प्रमाणपत्र के बिना उड़ान भरना विमानन नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

एआरसी वह दस्तावेज है,जिसे विमानन नियामक द्वारा तब जारी किया जाता है,जब विमान विस्तृत निरीक्षण और तकनीकी जाँच में सफल होता है। इसके तहत विमान के ढाँचे,इंजन, नेविगेशन सिस्टम, सुरक्षा उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण घटकों की जाँच की जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि विमान सुरक्षित रूप से उड़ान भरने के लिए पूरी तरह सक्षम है। ऐसे में बिना वैध एआरसी के विमान का संचालन यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के साथ जोखिम उठाने के समान है।

सूत्रों के अनुसार,डीजीसीए ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एयरलाइन से विस्तृत स्पष्टीकरण माँगा था। जाँच में पाया गया कि निर्धारित समय पर आवश्यक प्रमाणन न होने के बावजूद विमान को व्यावसायिक उड़ानों के लिए उपयोग में लाया गया। नियामक ने इसे केवल तकनीकी त्रुटि नहीं,बल्कि प्रक्रियात्मक लापरवाही के रूप में देखा है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की चूक से विमानन सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

डीजीसीए के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी इस आदेश की प्राप्ति की पुष्टि करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला वर्ष 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट की गई एक घटना से संबंधित है। प्रवक्ता के अनुसार,पहचानी गई सभी कमियों को संतोषजनक रूप से दूर कर लिया गया है और इसकी जानकारी प्राधिकरण को दे दी गई है। उन्होंने दोहराया कि एयर इंडिया परिचालन की विश्वसनीयता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

हालाँकि,यह घटना ऐसे समय में सामने आई है,जब एयर इंडिया पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पिछले वर्ष जून में अहमदाबाद में हुए एक विमान हादसे ने कंपनी को बड़ा झटका दिया था। उस दुर्घटना ने सुरक्षा मानकों और परिचालन प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। निजीकरण प्रक्रिया के तहत सरकार से अधिग्रहण के बाद टाटा समूह द्वारा एयर इंडिया के पुनरुद्धार की योजना बनाई गई थी,लेकिन अपेक्षित वित्तीय सुधार अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है।

रिपोर्टों के अनुसार,एयर इंडिया अपने मौजूदा प्रमुख कैंपबेल विल्सन की जगह नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश कर रही है। विल्सन का अनुबंध 2027 के मध्य तक है,लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे आगे कार्य जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं। बताया जा रहा है कि संभावित नेतृत्व परिवर्तन आपसी सहमति से हो सकता है। इस संदर्भ में टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बड़े एयरलाइन संचालन का अनुभव रखने वाले कुछ संभावित उम्मीदवारों से प्रारंभिक बातचीत भी की है।

प्रबंधन स्तर पर बदलाव की चर्चा के पीछे एक प्रमुख कारण कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन माना जा रहा है। एयर इंडिया ने 31 मार्च तक ब्रेक-ईवन हासिल करने का लक्ष्य रखा था,लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह लक्ष्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण प्रतीत हो रहा है। जून 2025 में अहमदाबाद में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर दुर्घटना ने न केवल कंपनी की छवि को प्रभावित किया,बल्कि उसकी पुनरुद्धार योजना को भी झटका पहुँचाया।

इसके अतिरिक्त,पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद किए जाने से भी एयर इंडिया की परिचालन लागत बढ़ गई है। लंबे उड़ान मार्गों के कारण ईंधन खर्च और समय दोनों में वृद्धि हुई है,जिसका सीधा असर कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर प्रतिस्पर्धा और बढ़ती लागत के बीच कंपनी को संतुलन बनाना कठिन हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियामकीय दंड से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि विमानन सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है। डीजीसीए की यह कार्रवाई अन्य एयरलाइंस के लिए भी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है कि नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यात्रियों का भरोसा बनाए रखने के लिए सुरक्षा मानकों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

एयर इंडिया के लिए यह समय आत्ममंथन का है। एक ओर उसे वित्तीय और परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है,वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन को लेकर सख्ती भी बढ़ी है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इन चुनौतियों से कैसे उबरती है और अपने पुनरुद्धार अभियान को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।