प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@SonOfBharat7)

ईरान पर सख्त रुख में नेतन्याहू,गाजा में हमलों के बीच सीजफायर पर अनिश्चितता बरकरार

यरूशलम,16 फरवरी (युआईटीवी)- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई डील होती है तो उसमें परमाणु सामग्री को पूरी तरह हटाना,यूरेनियम संवर्धन पर रोक और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल होना चाहिए। उन्होंने तेहरान के इरादों पर गहरा संदेह जताते हुए कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से ही चरम पर है और गाजा में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं।

हाल ही में नेतन्याहू ने वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस बैठक को पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मुलाकात के बाद रविवार को आयोजित एक सार्वजनिक सम्मेलन में नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप संभावित डील की हर संभावना को गंभीरता से परखने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेतृत्व को लगता है कि मौजूदा परिस्थितियों में एक समझौता संभव हो सकता है,लेकिन इजरायल किसी भी समझौते की शर्तों को लेकर बेहद सतर्क रहेगा।

नेतन्याहू ने साफ कहा कि ईरान के साथ किसी भी डील का उद्देश्य केवल कागजी आश्वासन नहीं होना चाहिए,बल्कि ठोस और सत्यापित कदम उठाए जाने चाहिए। उनका कहना था कि यदि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को सीमित करने के लिए वास्तविक और पारदर्शी कदम नहीं उठाता,तो इजरायल को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र रूप से कदम उठाने होंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल अमेरिका के साथ अपने संबंधों को केवल सहायता प्राप्त करने वाले देश की छवि से आगे बढ़ाकर रणनीतिक साझेदारी में बदलना चाहता है।

नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायल एक आत्मनिर्भर घरेलू रक्षा उद्योग विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है,ताकि भविष्य में उसे बाहरी सहायता पर कम निर्भर रहना पड़े। उनका मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत हैं,लेकिन इजरायल अपनी स्वतंत्र रणनीतिक क्षमताओं को भी सुदृढ़ करना चाहता है।

इस बीच गाजा में जारी संघर्ष और वहाँ की स्थिति पर भी नेतन्याहू ने विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इजरायल ने गाजा में लगभग 500 किलोमीटर लंबी सुरंगों के नेटवर्क में से करीब 150 किलोमीटर को नष्ट कर दिया है। उनका कहना था कि इन सुरंगों का इस्तेमाल हमास द्वारा हथियार छिपाने,लड़ाकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने और सैन्य गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता रहा है। नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक हमास की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इजरायल गाजा सीजफायर योजना को एक मौका दे रहा है,लेकिन यदि हमास को खत्म करने के लिए जरूरी हुआ तो वह युद्ध फिर से शुरू करने में संकोच नहीं करेगा। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि मौजूदा संघर्षविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल का उद्देश्य केवल अस्थायी शांति नहीं,बल्कि स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

गाजा में स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार,10 अक्टूबर 2025 को हमास और इजरायल के बीच लागू हुए सीजफायर के बाद से इजरायली सेना की कार्रवाई में 601 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 1,607 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन आँकड़ों ने क्षेत्र में मानवीय संकट की गंभीरता को उजागर किया है। गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक,रविवार को हुए इजरायली एयरस्ट्राइक में कम से कम 11 फिलिस्तीनी मारे गए। शुरुआती रिपोर्ट में मृतकों की संख्या नौ बताई गई थी,जिसे बाद में संशोधित किया गया।

सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसल ने कहा कि इजरायली विमानों ने सुबह से दोपहर तक कई इलाकों में हवाई हमले किए। गाजा शहर के पश्चिम में तेल अल-हवा इलाके में ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। स्थानीय सूत्रों ने मृतक की पहचान इस्लामिक जिहाद मूवमेंट के सदस्य समी अल-दहदौह के रूप में की है। हालाँकि,इस्लामिक जिहाद की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

उत्तरी गाजा के बेत लाहिया क्षेत्र में एक अलग ड्रोन हमले में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा जबालिया रिफ्यूजी कैंप में बेघर लोगों को आश्रय दे रहे एक टेंट पर हुए हमले और दक्षिणी गाजा के खान यूनिस में एक सभा पर किए गए एयरस्ट्राइक में 10 लोगों की मौत की खबर है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,इजरायली सेना ने जबालिया के उत्तर में शेख जायद इलाके के पास घरों को भी गिरा दिया और तोपखाने का इस्तेमाल किया। पूर्वी गाजा शहर के अल-तुफ्फाह इलाके में भी गोलाबारी की सूचना है।

रविवार के इन हमलों पर इजरायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालाँकि,शनिवार को इजरायली सुरक्षा बलों ने दावा किया था कि सैनिकों ने उत्तरी गाजा में भूमिगत ढाँचे से निकल रहे कई हथियारबंद आतंकवादियों की पहचान की और उन पर कार्रवाई की,जिसमें दो या उससे अधिक लोग मारे गए। इजरायली रक्षा बलों ने इसे सीजफायर का खुला उल्लंघन बताया।

दूसरी ओर हमास के प्रवक्ता हजेम कासिम ने इजरायल पर संघर्षविराम का गंभीर उल्लंघन करने और नरसंहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि गाजा में नागरिकों को निशाना बनाना अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को हस्तक्षेप करना चाहिए। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात ने वैश्विक शक्तियों को भी चिंतित कर दिया है। एक ओर ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं,वहीं दूसरी ओर गाजा में हिंसा का चक्र थमता नजर नहीं आ रहा। नेतन्याहू का सख्त रुख इस बात का संकेत देता है कि इजरायल अपनी सुरक्षा नीतियों में किसी प्रकार की ढील देने के पक्ष में नहीं है। हालाँकि,यह भी स्पष्ट है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और अन्य अंतर्राष्ट्रीय शक्तियाँ ईरान के साथ संभावित समझौते और गाजा में संघर्षविराम को लेकर किस दिशा में कदम उठाती हैं। फिलहाल,नेतन्याहू के बयान ने संकेत दिया है कि इजरायल अपनी शर्तों पर ही किसी समझौते को स्वीकार करेगा और यदि उसे लगेगा कि उसकी सुरक्षा को खतरा है तो वह सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। गाजा में जारी घटनाक्रम और ईरान पर बढ़ता दबाव पश्चिम एशिया की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले जा सकता है।