नई दिल्ली,16 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और फ्रांस के बीच 17 फरवरी को बेंगलुरु में होने जा रहा छठा वार्षिक रक्षा संवाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। सैन्य तकनीक,रक्षा उत्पादन और दीर्घकालिक सहयोग के लिहाज से यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस संवाद की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे,जबकि फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वाउटरिन भी इसमें भाग लेंगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
इस उच्चस्तरीय संवाद के समानांतर एक और महत्वपूर्ण घटना होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर्नाटक के वेमगल में टाटा एयरबस की एच-125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति देगी। एच-125 हेलीकॉप्टर का भारत में असेंबली शुरू होना न केवल तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा देगा,बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।
दरअसल,भारत और फ्रांस के संबंधों में रक्षा सहयोग एक मजबूत स्तंभ रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कई दशकों से रक्षा क्षेत्र में गहरा तालमेल रहा है। ‘शक्ति’, ‘वरुणा’ और ‘गरुड़’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं,जो थल, जल और वायु सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत बनाते हैं। इन अभ्यासों ने दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और रणनीति को समझने का अवसर दिया है।
बेंगलुरु में होने वाले इस रक्षा संवाद में दोनों देशों के बीच मौजूदा रक्षा समझौते की व्यापक समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार,इस समझौते को अगले दस वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही हैमर मिसाइलों के संयुक्त निर्माण को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते की संभावना जताई जा रही है। यदि यह समझौता होता है,तो भारत में उन्नत मिसाइल प्रणालियों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
इस बैठक में सैन्य अधिकारियों की आपसी तैनाती को लेकर भी चर्चा हो सकती है। यदि इस दिशा में सहमति बनती है,तो दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण और रणनीतिक सहयोग और मजबूत होगा। यह कदम न केवल सैन्य तालमेल को बढ़ाएगा,बल्कि साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा।
फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वाउटरिन की यह पहली भारत यात्रा होगी,जो उन्होंने अक्टूबर 2025 में पदभार सँभालने के बाद की है। उनकी यह यात्रा इस बात का संकेत है कि फ्रांस भारत के साथ रक्षा सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय आदान-प्रदान ने रणनीतिक संबंधों को नई ऊँचाई दी है। जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के बास्तील दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रहे थे,जबकि 2024 के गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे। इन यात्राओं ने दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया।
इस रक्षा संवाद से पहले रक्षा मंत्रालय की एक अहम बैठक में मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल की खरीद को मंजूरी दी जा चुकी है। 12 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए नए डसॉल्ट राफेल लड़ाकू विमानों,आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलों और हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट की खरीद को हरी झंडी दी गई। राफेल विमान पहले से ही भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा हैं और उनकी दो स्क्वाड्रन सक्रिय सेवा में हैं।
राफेल सौदे को भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। यह विमान लंबी दूरी तक सटीक हमला करने,अत्याधुनिक रडार प्रणाली और आधुनिक हथियारों से लैस है। बीते वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल विमानों की मदद से पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इस अभियान ने राफेल की मारक क्षमता और रणनीतिक उपयोगिता को स्पष्ट कर दिया।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि नए राफेल सौदे के तहत अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे,बल्कि देश में उच्च तकनीकी कौशल का विकास भी होगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है और दीर्घकाल में भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।
भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग केवल उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण,संयुक्त अनुसंधान और उत्पादन भी शामिल है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। फ्रांस, जिसकी हिंद महासागर में भी रणनीतिक उपस्थिति है,भारत को इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है।
बेंगलुरु में होने वाला यह छठा वार्षिक रक्षा संवाद कई मायनों में निर्णायक साबित हो सकता है। एक ओर जहाँ यह बैठक मौजूदा परियोजनाओं की समीक्षा करेगी,वहीं दूसरी ओर भविष्य की साझेदारी का खाका भी तैयार करेगी। रक्षा उद्योग में संयुक्त निर्माण, मिसाइल प्रणालियों का विकास,हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन और राफेल जैसे अत्याधुनिक विमानों की खरीद—ये सभी पहलू इस बात का संकेत हैं कि भारत और फ्रांस अपने रक्षा संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस संवाद से कौन-कौन से ठोस निर्णय निकलते हैं। हालाँकि,संकेत स्पष्ट हैं कि दोनों देश दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत और फ्रांस का यह सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा,बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी योगदान देगा।
