बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान (तस्वीर क्रेडिट@EngrShahid_)

दो दशकों बाद सत्ता में वापसी: बांग्लादेश में बीएनपी सरकार का शपथ ग्रहण आज,नई राजनीतिक शुरुआत की उम्मीद

ढाका,17 फरवरी (युआईटीवी)- बांग्लादेश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिल रहा है। लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में वापसी करने जा रही है। मंगलवार को पार्टी के नए चुने गए सांसद शपथ लेंगे और देश को नया प्रधानमंत्री मिलेगा। 13वें संसदीय चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद बीएनपी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है,जिससे नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह घटनाक्रम न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति के लिए अहम है,बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के राजनीतिक परिदृश्य पर भी इसका असर पड़ सकता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,शपथ ग्रहण समारोह ढाका स्थित नेशनल पार्लियामेंट बिल्डिंग के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन प्रेसिडेंशियल पैलेस में किया जाता है,लेकिन इस बार परंपरा से हटकर साउथ प्लाजा को चुना गया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला जुलाई 2024 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से लिया गया है। उस दौरान देश में राजनीतिक अस्थिरता और व्यापक हिंसा देखने को मिली थी,जिसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में साउथ प्लाजा में शपथ ग्रहण का आयोजन एक प्रतीकात्मक संदेश भी माना जा रहा है।

सुबह 10 बजे सभी 297 नव-निर्वाचित सांसदों को मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन संसद के शपथ कक्ष में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएँगे। इसके बाद सांसद संवैधानिक सुधार परिषद की सदस्यता ग्रहण करेंगे। यह परिषद चुनावी वादों के अनुरूप शासन प्रणाली में आवश्यक सुधारों पर विचार करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बीएनपी के उस एजेंडे का हिस्सा है,जिसमें प्रशासनिक और संवैधानिक ढाँचे को मजबूत बनाने की बात कही गई थी।

बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान के नेतृत्व में पार्टी ने इस बार के चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज की है। 297 घोषित सीटों में से 209 पर बीएनपी उम्मीदवारों ने विजय हासिल की है। इसके अलावा,चटगांव-2 और चटगांव-4 सीटों पर पार्टी उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं,हालाँकि,हाई कोर्ट के निर्देश के बाद इन सीटों के आधिकारिक नतीजे फिलहाल रोके गए हैं। पार्टी के सहयोगियों ने भी तीन सीटों पर जीत दर्ज की है,जिससे सरकार का बहुमत और मजबूत हो गया है।

बांग्लादेश का 13वां संसदीय चुनाव 12 फरवरी को संपन्न हुआ था। चुनाव आयोग ने 13 फरवरी की रात 297 सीटों के अनौपचारिक नतीजों की घोषणा की थी। कुल 300 में से 299 सीटों पर मतदान हुआ,जबकि एक सीट पर चुनाव स्थगित रहा। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी मतदान की निगरानी की। हालाँकि,कुछ क्षेत्रों में छिटपुट झड़पों की खबरें आईं,लेकिन कुल मिलाकर चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माने गए।

शाम 4 बजे होने वाले मुख्य शपथ ग्रहण समारोह में देश और विदेश से लगभग 1,200 विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। इस समारोह में दक्षिण एशिया और अन्य देशों की कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति इसे अंतर्राष्ट्रीय महत्व प्रदान करती है। जिन नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है, उनमें भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे,भारत के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला,पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल,नेपाल के विदेश मंत्री बाला नंद शर्मा,श्रीलंका की स्वास्थ्य मंत्री नलिंदा जयतिसा,ब्रिटेन की इंडो-पैसिफिक मामलों की अवर सचिव सीमा मल्होत्रा और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजू शामिल हो सकते हैं। इन नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि नई सरकार क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता दे सकती है।

बीएनपी की वापसी ऐसे समय में हो रही है,जब बांग्लादेश आर्थिक चुनौतियों,महँगाई,बेरोजगारी और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और निवेशकों का विश्वास बहाल करना होगा। इसके अलावा,लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और राजनीतिक विरोधियों के साथ संवाद कायम करना भी अहम होगा। बीएनपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पारदर्शी शासन,न्यायिक सुधार और युवाओं के लिए रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने का वादा किया है।

विश्लेषकों का कहना है कि बीएनपी की यह जीत देश की राजनीतिक दिशा में बदलाव का संकेत हो सकती है। पिछले दो दशकों में सत्ता से बाहर रहने के बावजूद पार्टी ने अपनी संगठनात्मक ताकत को बनाए रखा और जमीनी स्तर पर समर्थन जुटाया। अब जब उसे स्पष्ट जनादेश मिला है,तो जनता की अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं। राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और विकास की गति को बनाए रखना नई सरकार की प्राथमिकता होगी।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस सत्ता परिवर्तन पर नजर रखी जा रही है। दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक संतुलन,क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर बांग्लादेश की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। नई सरकार के गठन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि वह भारत, चीन,अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को किस तरह संतुलित करती है।

बीएनपी की सत्ता में वापसी बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। साउथ प्लाजा में होने वाला शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक राजनीतिक औपचारिकता होगा,बल्कि यह उस नई शुरुआत का प्रतीक भी बनेगा,जिसकी उम्मीद देश की जनता कर रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि नई सरकार अपने वादों को किस हद तक पूरा कर पाती है और देश को स्थिरता व समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ा पाती है या नहीं।