नई दिल्ली,17 फरवरी (युआईटीवी)- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह इजरायल के दौरे पर जा सकते हैं। इस संभावित यात्रा की जानकारी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दी। हालाँकि,भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है,लेकिन नेतन्याहू के बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में इस यात्रा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यह दौरा रक्षा सहयोग,आतंकवाद-रोधी रणनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों में साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो सकता है।
यदि यह यात्रा होती है तो यह प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल में इजरायल का पहला दौरा होगा। इससे पहले वह 2017 में इजरायल गए थे,जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला स्वतंत्र इजरायल दौरा था। उस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊँचाई दी थी और कृषि,रक्षा,जल प्रबंधन तथा नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार मिला था। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह संभावित दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ भी तेजी से बदल रही हैं।
हाल ही में मेजर अमेरिकन ज्यूइश ऑर्गनाइजेशन्स के अध्यक्षों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि अगले सप्ताह इजरायल की संसद में एक महत्वपूर्ण भाषण होने वाला है और उसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने मंच से कहा कि “अगले हफ्ते यहाँ कौन आ रहा है? नरेंद्र मोदी।” उनके इस बयान ने उपस्थित लोगों के बीच उत्साह पैदा कर दिया। नेतन्याहू ने भारत को एक विशाल और प्रभावशाली देश बताते हुए कहा कि भारत में इजरायल को लेकर सकारात्मक धारणा है और दोनों देशों के बीच संबंध असाधारण रूप से मजबूत हैं।
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में भारत की जनसंख्या और वैश्विक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि 1.5 अरब आबादी वाले देश के साथ घनिष्ठ सहयोग इजरायल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देश इजरायल के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं। लैटिन अमेरिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने अर्जेंटीना सहित अन्य देशों को इजरायल का मित्र बताया और कहा कि क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव आ रहा है।
संभावित भारत दौरे के संदर्भ में यह भी माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार दिया जा सकता है। भारत इजरायल से उन्नत रक्षा प्रणालियाँ और तकनीकी उपकरण खरीदता रहा है। ड्रोन तकनीक,मिसाइल प्रणाली और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत सहयोग मौजूद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाएँ बढ़ रही हैं,जहाँ दोनों देश मिलकर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,नेतन्याहू ने अपने संबोधन में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक संभावित डील करने के इच्छुक हैं,लेकिन इजरायल को इस मुद्दे पर गंभीर चिंताएँ हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को अपने सभी समृद्ध यूरेनियम भंडार को हटाना होगा,एनरिचमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को समाप्त करना होगा और बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक और सख्त अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण किसी भी समझौते की अनिवार्य शर्त होनी चाहिए।
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने गाजा में जारी संघर्ष का भी उल्लेख किया और कहा कि इजरायल अपने घोषित उद्देश्यों को लेकर दृढ़ है। उन्होंने कहा कि सभी बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना,हमास की सैन्य क्षमताओं को समाप्त करना और उसके प्रशासनिक नियंत्रण को खत्म करना आवश्यक है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि गाजा का पूर्ण विसैन्यीकरण होना चाहिए और हमास को हथियार डालने होंगे।
ऐसे परिदृश्य में यदि प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा होता है तो यह केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। भारत परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया में संतुलित नीति अपनाता रहा है, जहाँ वह इजरायल के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखते हुए फिलिस्तीन के समर्थन की अपनी ऐतिहासिक नीति को भी बरकरार रखता है। ऐसे में यह यात्रा कूटनीतिक संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है,लेकिन नेतन्याहू के बयान के बाद यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की प्रक्रिया सक्रिय है। यदि यह दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होता है तो भारत-इजरायल संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है,जो रक्षा,तकनीक,नवाचार और वैश्विक सुरक्षा सहयोग के क्षेत्रों में और गहराई तक जाएगा।
