मुंबई, 18 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और फ्रांस ने मंगलवार को अपनी दशकों पुरानी मित्रता को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाते हुए द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में अपग्रेड करने की घोषणा की। मुंबई में आयोजित उच्च स्तरीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी दी। दोनों नेताओं ने इस उन्नत साझेदारी को वैश्विक स्थिरता,प्रगति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मजबूत कदम बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों का मुंबई में स्वागत करते हुए कहा कि यह शहर भारत का ‘विश्व का प्रवेश द्वार’ है और दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच संबंध गहरे विश्वास,साझा मूल्यों और वैश्विक मुद्दों पर समान दृष्टिकोण पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत के सबसे पुराने और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदारों में से एक रहा है। अब दोनों देश पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर रक्षा,तकनीक, नवाचार और वैश्विक शांति के लिए दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस यात्रा के दौरान रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। कर्नाटक के वेमगल में एच125 हेलिकॉप्टर की असेंबली लाइन का उद्घाटन किया गया। यह परियोजना फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी एयरबस से जुड़ी है,जो भारत में अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर निर्माण क्षमता विकसित करेगी। एच125 हेलिकॉप्टर अपनी उच्च ऊँचाई पर संचालन क्षमता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध है। इस संयंत्र में निर्मित हेलिकॉप्टर न केवल भारत की रक्षा और नागरिक आवश्यकताओं को पूरा करेंगे,बल्कि वैश्विक बाजार में निर्यात भी किए जाएँगे।
सरकार के अनुसार,यह पहल भारत की एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमता को नई मजबूती देगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को गति प्रदान करेगी। परियोजना से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। साथ ही, सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यमों को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने का अवसर मिलेगा,जिससे भारतीय उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी। कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी इस यात्रा ने नई दिशा प्रदान की है। भारत और फ्रांस ने अपने मौजूदा रक्षा सहयोग समझौते को उन्नत करते हुए सह-डिजाइन,सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर देने का निर्णय लिया है। इस ढाँचे के तहत उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म्स और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास में दोनों देशों की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम भारत की आयात निर्भरता को कम करने और घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी क्रम में भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस एवं रक्षा कंपनी सफरान के बीच संयुक्त उद्यम स्थापित करने की घोषणा की गई। इस साझेदारी के माध्यम से उच्च-सटीकता वाली रक्षा प्रणालियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय रक्षा उत्पादन क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी मजबूत होगी।
दोनों नेताओं ने कूटनीतिक सहयोग को और संस्थागत रूप देने के लिए वार्षिक विदेश मंत्रियों की संवाद प्रक्रिया स्थापित करने पर भी सहमति जताई। इस तंत्र के जरिए ‘रोडमैप होराइजन 2047’ के तहत तय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी और साझेदारी की प्रगति का आकलन किया जाएगा। यह संवाद तंत्र शिक्षा,संस्कृति,कौशल विकास और युवाओं की गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा देगा,जिससे दोनों देशों के नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
भारत और फ्रांस ने वर्ष 2026 को ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय भी लिया है। इस पहल के तहत ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन नेटवर्क’ की शुरुआत की गई,जिसका उद्देश्य स्टार्टअप्स,उद्योग,अनुसंधान संस्थानों,इनक्यूबेटर्स और निवेशकों को एक साझा मंच पर लाना है। यह नेटवर्क उभरती प्रौद्योगिकियों,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,जैव प्रौद्योगिकी,उन्नत सामग्री और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। दोनों देशों का मानना है कि भविष्य की आर्थिक प्रगति और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए इन क्षेत्रों में साझेदारी अत्यंत आवश्यक है।
टेक्नोलॉजी सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने और हरित ऊर्जा संक्रमण को गति देने पर भी सहमति बनी। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना दोनों देशों की प्राथमिकता है। इसके अलावा जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री विज्ञान में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया गया।
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं,बल्कि वे वैश्विक शांति,स्थिरता और समावेशी विकास के लिए भी मिलकर काम करेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों ने भी भारत को एक विश्वसनीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग का यह नया चरण वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उन्नत साझेदारी से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन मजबूत होगा और वैश्विक मंचों पर दोनों देशों की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा। रक्षा,नवाचार, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क को केंद्र में रखकर विकसित यह ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ आने वाले वर्षों में भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का आधार बनेगी।
