रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर ने पहली बार फाइनल में बनाई जगह (तस्वीर क्रेडिट@ShashiTharoor)

रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर का ऐतिहासिक कारनामा,बंगाल को हराकर पहली बार फाइनल में एंट्री

कल्याणी,18 फरवरी (युआईटीवी)- भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में मजबूत और अनुभवी बंगाल टीम को 6 विकेट से हराकर जम्मू-कश्मीर ने पहली बार फाइनल में जगह बनाई है। यह जीत न केवल टीम के लिए,बल्कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। वर्षों की मेहनत,संघर्ष और प्रतिभा का यह नतीजा है कि जम्मू-कश्मीर की टीम अब रणजी ट्रॉफी के खिताब से सिर्फ एक कदम दूर है।

कल्याणी स्थित बंगाल क्रिकेट अकादमी ग्राउंड में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए 126 रन का लक्ष्य मिला था। दबाव की स्थिति में भी टीम ने संयम बनाए रखा और 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। वंशराज शर्मा ने 43 रन की अहम पारी खेली,जबकि अब्दुल समद 30 रन बनाकर नाबाद लौटे। दोनों के बीच 55 रन की नाबाद साझेदारी ने मैच का रुख पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर की ओर मोड़ दिया। इस साझेदारी ने न केवल जीत सुनिश्चित की,बल्कि टीम के आत्मविश्वास को भी नई ऊँचाई दी।

मुकाबले की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने के फैसले से हुई। बंगाल की टीम ने पहली पारी में मजबूत बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। सुदीप कुमार ने शानदार 146 रन बनाकर टीम की पारी को मजबूती दी। कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन ने 49 रन का योगदान दिया,जबकि शहबाज अहमद ने 42 और सुमंता गुप्ता ने 39 रन बनाए। इन पारियों की बदौलत बंगाल ने पहली पारी में 328 रन का प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया।

जम्मू-कश्मीर की ओर से आकिब नबी ने घातक गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट झटके। सुनील कुमार ने 3 विकेट अपने नाम किए,जबकि युदवीर सिंह और आबिद मुश्ताक को 1-1 सफलता मिली। गेंदबाजों के सामूहिक प्रयास ने बंगाल को और बड़े स्कोर तक पहुँचने से रोका।

पहली पारी में जवाब देने उतरी जम्मू-कश्मीर की टीम ने भी दमदार प्रदर्शन किया। हालाँकि,टीम 302 रन पर सिमट गई,लेकिन बल्लेबाजों ने संघर्षपूर्ण पारियाँ खेलीं। अब्दुल समद ने 82 रन बनाकर टीम को संकट से उबारा। कप्तान पारस डोगरा ने 58 रन की जिम्मेदार पारी खेली,जबकि आकिब नबी ने बल्ले से भी योगदान देते हुए 42 रन बनाए। युदवीर सिंह ने 22 रन जोड़े। हालाँकि,टीम पहली पारी में 26 रन से पिछड़ गई,लेकिन यह अंतर बहुत बड़ा नहीं था।

बंगाल की ओर से अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 8 विकेट झटके,जबकि मुकेश कुमार ने 2 विकेट हासिल किए। शमी की घातक गेंदबाजी ने जम्मू-कश्मीर की पारी को ज्यादा आगे बढ़ने से रोका,लेकिन मैच अभी पूरी तरह खुला हुआ था।

दूसरी पारी में बंगाल की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई। जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों ने सटीक लाइन और लेंथ के साथ आक्रामक गेंदबाजी की,जिसके सामने बंगाल की टीम महज 99 रन पर सिमट गई। यह मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। पहली पारी की बढ़त के बावजूद बंगाल जम्मू-कश्मीर को बड़ा लक्ष्य नहीं दे सकी।

इस तरह जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए 126 रन का लक्ष्य मिला। लक्ष्य छोटा जरूर था,लेकिन सेमीफाइनल का दबाव किसी भी टीम को अस्थिर कर सकता था। शुरुआती झटकों के बाद वंशराज शर्मा और अब्दुल समद ने संयमित बल्लेबाजी की। दोनों ने जोखिम भरे शॉट्स से बचते हुए स्ट्राइक रोटेट की और खराब गेंदों पर रन बटोरे। उनकी साझेदारी ने दर्शकों में उत्साह भर दिया और अंततः टीम ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।

इस मुकाबले में 9 विकेट लेने और 42 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलने वाले आकिब नबी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनकी हरफनमौला क्षमता ने मैच का रुख बदल दिया।

जम्मू-कश्मीर की इस जीत को भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह दिखाता है कि अब पारंपरिक रूप से मजबूत मानी जाने वाली टीमों के अलावा अन्य राज्य भी कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से शीर्ष स्तर तक पहुँच सकते हैं। टीम के खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह का जज्बा दिखाया है,वह प्रेरणादायक है।

अब सभी की नजरें फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं। जम्मू-कश्मीर की टीम इस ऐतिहासिक लय को बरकरार रखना चाहेगी और खिताब जीतकर अपने सफर को यादगार बनाना चाहेगी। सेमीफाइनल की यह जीत लंबे समय तक याद रखी जाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।