इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी रोबोट डॉग पर घमासान (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी रोबोट डॉग पर घमासान,गलगोटिया और विप्रो के दावों से बढ़ा विवाद

नई दिल्ली,19 फरवरी (युआईटीवी)- नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान एक रोबोट डॉग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और तकनीकी बहस का विषय बन गया है। समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित किए गए रोबोट डॉग ‘ओरियन’ को लेकर यह आरोप सामने आया कि वह वास्तव में चीन की एक कंपनी द्वारा निर्मित मॉडल है,जिसे विश्वविद्यालय ने अपना आविष्कार बताया। इसी कार्यक्रम में आईटी कंपनी विप्रो लिमिटेड ने भी एक चीनी रोबोट डॉग का प्रदर्शन किया,लेकिन कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी प्रकार का हार्डवेयर निर्माण का दावा नहीं किया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई,जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के एक प्रतिनिधि ने मीडिया से बातचीत में ‘ओरियन’ नामक एआई-संचालित रोबोट डॉग को अपने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की खोज बताया। उन्होंने इसके फीचर्स और तकनीकी विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी,जिससे यह धारणा बनी कि यह पूरी तरह से स्वदेशी नवाचार है। हालाँकि,बाद में तकनीकी जानकारों और मीडिया रिपोर्टों में यह सामने आया कि प्रदर्शित मॉडल चीन की रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा निर्मित ‘गो2’ रोबोट डॉग से मिलता-जुलता है।

इसी समिट में विप्रो के प्रतिनिधि ने ‘टीजे’ नामक एआई-संचालित रोबोट डॉग का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि यह रोबोट आपदा,दुर्घटना और अन्य जोखिम भरी परिस्थितियों में इंसानों की जगह काम कर सकता है। हालाँकि,बाद में कंपनी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि विप्रो एक सॉफ्टवेयर कंपनी है और उसने कभी यह दावा नहीं किया कि वह हार्डवेयर निर्माता है। सूत्रों ने कहा कि उनका मामला गलगोटिया विश्वविद्यालय से पूरी तरह अलग है और उन्होंने केवल एआई सॉफ्टवेयर क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए हार्डवेयर प्लेटफॉर्म का उपयोग किया।

विप्रो के अनुसार,प्रदर्शित रोबोट डॉग मूल रूप से यूनिट्री का ‘गो2’ मॉडल है,जिस पर एआई आधारित समाधान और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन को दिखाया गया। कंपनी ने यह भी कहा कि उसने इसे अपना स्वदेशी हार्डवेयर बताने का कोई दावा नहीं किया। इसके विपरीत, गलगोटिया विश्वविद्यालय पर आरोप है कि उसने ‘ओरियन’ को अपने शोध और विकास का परिणाम बताया, जिससे विवाद और गहरा गया।

मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एआई समिट एक्सपो में कई उत्कृष्ट और नवाचारी समाधान प्रस्तुत किए गए हैं,लेकिन यदि किसी ने गलत जानकारी दी है या अनियमितता की है,तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है। मंत्री ने यह भी कहा कि लोगों को कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे आयोजन को कठघरे में खड़ा करने के बजाय अन्य सकारात्मक और नवोन्मेषी प्रयासों पर भी ध्यान देना चाहिए।

मंत्री का बयान ऐसे समय आया है,जब विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो गए हैं। उनका आरोप है कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के बीच विदेशी तकनीक को स्वदेशी बताने का प्रयास गंभीर सवाल खड़े करता है। हालाँकि,सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि समिट का उद्देश्य वैश्विक तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है और अंतर्राष्ट्रीय हार्डवेयर प्लेटफॉर्म पर भारतीय सॉफ्टवेयर समाधान प्रदर्शित करना असामान्य नहीं है।

सूत्रों के अनुसार,विवाद बढ़ने के बाद गलगोटिया विश्वविद्यालय को एआई एक्सपो से अपना स्टॉल हटाने के लिए कहा गया है। हालाँकि,स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी आधिकारिक सूचना की जानकारी नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी बयान जारी कर कहा है कि मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और उनका उद्देश्य सरकार के मिशन और विजन के अनुरूप एआई अनुसंधान को आगे बढ़ाना है।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर किसी उत्पाद की उत्पत्ति और विकास प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से बताना आवश्यक है,ताकि पारदर्शिता बनी रहे। यदि किसी विदेशी हार्डवेयर पर भारतीय सॉफ्टवेयर या एल्गोरिद्म विकसित किए गए हैं,तो उसे उसी रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इससे न केवल विश्वसनीयता बनी रहती है,बल्कि वैश्विक सहयोग को भी प्रोत्साहन मिलता है।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट जैसे मंच का उद्देश्य एआई की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करना और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना है। ऐसे में किसी भी प्रकार की भ्रमित करने वाली जानकारी आयोजन की साख को प्रभावित कर सकती है। हालाँकि,यह भी तथ्य है कि इस समिट में अनेक भारतीय स्टार्टअप्स और संस्थानों ने स्वास्थ्य,कृषि, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अभिनव समाधान प्रस्तुत किए हैं,जिन्हें व्यापक सराहना मिली है।

पूरा घटनाक्रम इस बात की याद दिलाता है कि एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और नवाचार के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित संस्थानों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है और यह विवाद किस दिशा में जाता है। फिलहाल, रोबोट डॉग ‘ओरियन’ और ‘टीजे’ को लेकर उठे सवालों ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है।