अहमदाबाद,19 फरवरी (युआईटीवी)- टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम ने नीदरलैंड के खिलाफ 17 रन की अहम जीत दर्ज कर अपने अभियान को मजबूती दी,लेकिन कप्तान सूर्यकुमार यादव ने साफ कर दिया कि यह मुकाबला केवल जश्न मनाने का अवसर नहीं,बल्कि सीख लेने का भी मौका है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट पर 193 रन बनाए और जवाब में नीदरलैंड की टीम 176/7 तक ही पहुँच सकी। जीत के बाद कप्तान ने संतोष तो जताया,लेकिन साथ ही टीम के प्रदर्शन के कई पहलुओं पर आत्ममंथन की जरूरत भी स्वीकार की।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला करने वाले सूर्यकुमार ने कहा कि टीम की योजना शुरुआत से ही स्कोरबोर्ड पर बड़ा कुल लगाने की थी। उन्होंने माना कि शाम के समय हल्की ओस ने गेंदबाजों के लिए परिस्थितियाँ थोड़ी चुनौतीपूर्ण बना दी थीं,लेकिन इसके बावजूद टीम ने संयम बनाए रखा। कप्तान के मुताबिक, “हम पहले बल्लेबाजी करना चाहते थे और 190 से ऊपर का स्कोर खड़ा करना हमारा लक्ष्य था। गेंदबाजी के दौरान थोड़ी ओस थी,जिससे गेंद पकड़ने और लाइन-लेंथ बनाए रखने में मुश्किल आई,लेकिन दिन के अंत में हम बहुत खुश हैं।”
भारतीय पारी की शुरुआत अपेक्षा के अनुरूप तेज नहीं रही,लेकिन मध्यक्रम ने जिम्मेदारी सँभाली। कप्तान ने इस बात पर जोर दिया कि टी20 जैसे प्रारूप में हर बल्लेबाज को अपनी भूमिका स्पष्ट रूप से समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआती ओवरों में पिच का मिजाज समझना और मिडिल ओवर्स में परिस्थिति के मुताबिक खेलना बेहद अहम होता है। सूर्यकुमार के अनुसार, “शुरुआत थोड़ी धीमी हो सकती है,लेकिन यह जरूरी है कि हर बल्लेबाज जानता हो कि उसकी जिम्मेदारी क्या है। जब हम मिडिल ओवर्स में विकेट के व्यवहार को समझ लेते हैं,तब हमारे पास हार्दिक पंड्या,शिवम दुबे,रिंकू सिंह,अक्षर पटेल या वाशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी हैं,जो मैच को शानदार अंदाज में खत्म कर सकते हैं।”
कप्तान ने यह भी स्वीकार किया कि जीत के बावजूद सब कुछ परफेक्ट नहीं था। उन्होंने कहा कि टीम हर मुकाबले के बाद खुद का आकलन करती है और यह प्रक्रिया जीत के बाद भी उतनी ही जरूरी है,जितनी हार के बाद। “ऐसा नहीं कह सकते कि सब कुछ पूरी तरह सही था। जीत में भी सीख मिलती है। उन्होंने कहा,”हमने कुछ बातें नोट की हैं और गुरुवार को आराम के दिन बैठकर उन पर चर्चा करेंगे।”
इस मुकाबले में कप्तान स्वयं भी लय में नजर आए। उन्होंने 28 गेंदों में 34 रन बनाए,जिसमें एक छक्का और दो चौके शामिल थे। भले ही यह बड़ी पारी नहीं थी,लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने टीम को स्थिरता दी। अपनी पारी पर प्रतिक्रिया देते हुए सूर्यकुमार ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी लय वापस आ रही है। उन्होंने कहा, “मैं खुश हूँ कि चीजें सही दिशा में जा रही हैं। लगभग हर बल्लेबाज योगदान दे रहा है और यही मैं चाहता हूँ। हमारी पारी में छोटी-छोटी साझेदारियाँ बनती रहें,यही सफलता की कुंजी है।”
टीम की जीत में सबसे बड़ा योगदान शिवम दुबे का रहा,जिन्होंने 31 गेंदों में 66 रन की धमाकेदार पारी खेली। उनकी इस पारी में छह छक्के और चार चौके शामिल थे। कप्तान ने दुबे की खुलकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने मिडिल ओवर्स में जिस तरह दबाव को कम किया,वह मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। सूर्यकुमार ने याद दिलाया कि दुबे ने इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ विशाखापट्टनम में भी शानदार पारी खेली थी और अब नीदरलैंड के खिलाफ फिर से वही आत्मविश्वास दिखाया।
कप्तान ने कहा, “दुबे ने जिस तरह बल्लेबाजी की,उससे पूरी टीम पर से दबाव हट गया। इस विकेट पर 190 तक पहुँचना वाकई बहुत अच्छा स्कोर था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब मैच थोड़ा टाइट होता है,तब एक या दो खिलाड़ियों का बड़ा योगदान अहम हो जाता है,लेकिन लगातार अच्छे स्कोर के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
गेंदबाजी के दौरान भारतीय टीम को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। नीदरलैंड की टीम ने लक्ष्य का पीछा करते हुए बीच-बीच में तेजी दिखाई और अंतिम ओवरों तक मुकाबला जीवित रखा। हालाँकि,भारतीय गेंदबाजों ने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट निकालकर दबाव बनाए रखा। कप्तान ने गेंदबाजों की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाला।
सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में आक्रामक लेकिन संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। बल्लेबाजी क्रम में गहराई और गेंदबाजी में विविधता टीम की ताकत बनकर उभरी है। कप्तान का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में निरंतरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है और इसके लिए हर खिलाड़ी को मानसिक रूप से तैयार रहना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि टीम का लक्ष्य केवल मैच जीतना नहीं,बल्कि हर मुकाबले में बेहतर बनना है। कप्तान ने कहा, “हम जानते हैं कि आगे के मुकाबले और कठिन होंगे। इसलिए जरूरी है कि हम हर मैच से कुछ न कुछ सीखें और खुद को सुधारते रहें।”
नीदरलैंड के खिलाफ यह जीत अंक तालिका में भारत की स्थिति को मजबूत करती है,लेकिन कप्तान का फोकस भविष्य पर है। आराम के दिन के बाद टीम रणनीति पर चर्चा करेगी और अगले मुकाबले की तैयारी शुरू करेगी। सूर्यकुमार यादव के शब्दों में, “यह टूर्नामेंट लंबा है और हमें हर दिन बेहतर बनना होगा।”
इस तरह भारत ने जीत के साथ आत्मविश्वास तो हासिल किया ही,साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि टीम केवल परिणाम से संतुष्ट नहीं है,बल्कि प्रदर्शन की गुणवत्ता पर भी बराबर ध्यान दे रही है। कप्तान का संतुलित दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी है और हर जीत को आगे की तैयारी का हिस्सा मान रही है।
