चेन्नई,19 फरवरी (युआईटीवी)- तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इस बार राजनीतिक परिदृश्य में सबसे ज्यादा चर्चा अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को लेकर हो रही है। पार्टी ने चुनावी मैदान में अपने संगठित और रणनीतिक प्रवेश का स्पष्ट संकेत देते हुए 27 फरवरी को अपना घोषणा-पत्र जारी करने की घोषणा की है। यह कदम इस बात का संकेत है कि टीवीके अब सिर्फ एक नई राजनीतिक पहल नहीं,बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में गंभीर दावेदारी पेश करने की तैयारी में है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक,राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की पहचान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रारंभिक चरण में हर सीट के लिए तीन संभावित उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि टीवीके जल्दबाजी में नहीं,बल्कि सुनियोजित ढंग से चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि संभावित उम्मीदवारों की सूची में लगभग 80 प्रतिशत नाम जिला सचिवों के हैं। इससे पार्टी की प्राथमिकता साफ झलकती है कि वह जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे लाकर संगठन को मजबूत आधार देना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति टीवीके की दीर्घकालिक सोच को दर्शाती है। एक ओर जहाँ पार्टी स्थानीय स्तर पर सक्रिय और समर्पित नेताओं को मौका दे रही है,वहीं दूसरी ओर राज्य स्तरीय पदाधिकारियों और अनुभवी प्रशासकों के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं। इससे संगठनात्मक निष्ठा और प्रशासनिक अनुभव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश नजर आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई पार्टी के लिए यह संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है,क्योंकि चुनावी राजनीति में केवल लोकप्रियता नहीं,बल्कि संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक समझ भी निर्णायक भूमिका निभाती है।
कुछ हाई-प्रोफाइल सीटों को लेकर भी चर्चाएँ तेज हैं। विल्लिवक्कम में हाल ही में पार्टी में शामिल हुए पूर्व एआईएडीएमके विधायक के बेटे को उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें हैं। एआईएडीएमके यानी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से जुड़े इस संभावित चेहरे को मैदान में उतारने का कदम टीवीके की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसके तहत वह पारंपरिक दलों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मजबूत चुनौती देना चाहती है। वहीं कोलाथुर सीट पर एक प्रसिद्ध उद्योगपति के चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है,जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी संसाधन और प्रभाव दोनों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
तेनकासी जिले के अलंगुलम क्षेत्र में एक प्रमुख थिएटर मालिक के बेटे और वासुदेवनल्लूर के पूर्व विधायक को भी उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। इन संभावित नामों से यह स्पष्ट होता है कि टीवीके स्थानीय सामाजिक समीकरणों और प्रभावशाली परिवारों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चयन कर रही है। तमिलनाडु की राजनीति में स्थानीय पहचान और सामाजिक नेटवर्क का काफी महत्व होता है और टीवीके इस तथ्य को भलीभांति समझती नजर आ रही है।
सबसे अधिक चर्चा विजय की संभावित सीट को लेकर हो रही है। आधिकारिक घोषणा भले अभी तक नहीं हुई हो,लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विजय नागपट्टिनम जिले के वेदारण्यम से चुनाव लड़ सकते हैं। वेदारण्यम फिलहाल ओएस मणियन के पास है,जो पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर डीएमके उम्मीदवार बेहद कम अंतर से हार गया था,जिससे यह सीट काफी प्रतिस्पर्धी मानी जाती है। डीएमके यानी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का इस क्षेत्र में मजबूत आधार रहा है,ऐसे में विजय का यहाँ से चुनाव लड़ना सीधा मुकाबला और अधिक दिलचस्प बना सकता है।
वेदारण्यम क्षेत्र में मछुआरों और किसानों की बड़ी आबादी है,जिन्हें चुनाव में निर्णायक मतदाता माना जाता है। पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षणों के अनुसार,यदि विजय यहाँ से चुनाव लड़ते हैं,तो उनकी जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है। विजय की फिल्मी लोकप्रियता और युवाओं के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए पार्टी को उम्मीद है कि वे पारंपरिक वोट बैंक के समीकरणों को बदल सकते हैं। हालाँकि,राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि फिल्मी लोकप्रियता को वोटों में बदलना आसान नहीं होता और इसके लिए मजबूत बूथ स्तर की तैयारी जरूरी है।
टीवीके का 27 फरवरी को जारी होने वाला घोषणा-पत्र भी काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी के करीबी सूत्रों का कहना है कि इसमें युवाओं के रोजगार,किसानों की आय,मछुआरों की सुरक्षा,शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी। साथ ही भ्रष्टाचार विरोधी रुख और पारदर्शी प्रशासन का वादा भी इसमें शामिल हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि टीवीके अपने एजेंडे को पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से किस तरह अलग पहचान देती है।
घोषणा-पत्र जारी होने और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुँचने के साथ टीवीके अपने पहले बड़े विधानसभा चुनाव में निर्णायक प्रभाव छोड़ने के लिए तैयार दिखाई दे रही है। तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से स्थापित द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है,लेकिन विजय की एंट्री ने चुनावी समीकरणों को नया आयाम दे दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या टीवीके अपनी लोकप्रियता को संगठित वोटों में बदल पाती है और क्या विजय की राजनीतिक पारी उतनी ही सफल होगी,जितनी उनकी फिल्मी यात्रा रही है। आने वाले हफ्ते तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।
