नई दिल्ली,19 फरवरी (युआईटीवी)- नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं,जिनमें एस्टोनिया गणराज्य के राष्ट्रपति और भूटान के प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकातें विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं। इन बैठकों में भविष्य की प्रौद्योगिकियों,डिजिटल सहयोग,ऊर्जा,संपर्क और क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई,जिससे भारत की तकनीकी और कूटनीतिक भूमिका और अधिक सशक्त होती नजर आई।
प्रधानमंत्री मोदी ने एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार करिस से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष पेरिस में आयोजित एआई एक्शन समिट के दौरान हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए उसे गर्मजोशी और सकारात्मक संवाद का आधार बताया। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच लोकतंत्र,कानून के शासन और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता जैसे साझा मूल्यों पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
बैठक के दौरान जनवरी 2026 में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन का भी उल्लेख हुआ,जिसमें भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के सफल समापन के साथ दोनों पक्षों के संबंधों में महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रगति दर्ज की गई थी। इस उपलब्धि का दोनों नेताओं ने स्वागत किया और इसे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। एस्टोनिया,जो डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है,उसके साथ सहयोग भारत के डिजिटल मिशन को नई गति दे सकता है।
आईटी और डिजिटलीकरण के क्षेत्र में जारी सहयोग पर विशेष चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,साइबर सुरक्षा,भविष्य की उभरती प्रौद्योगिकियों,ई-गवर्नेंस, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र,शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने की संभावनाओं पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर वैश्विक स्तर पर नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।
Had an excellent meeting with President Alar Karis of Estonia, a nation which has made remarkable strides in tech and AI. Discussed how to add further vigour to our economic partnership, particularly in the context of the India-EU FTA, which is a historical agreement. We also… pic.twitter.com/2EZ9HcD48k
— Narendra Modi (@narendramodi) February 18, 2026
इसके अलावा,स्वच्छ ऊर्जा और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने टिकाऊ विकास के क्षेत्र में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ,जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत और एस्टोनिया वैश्विक मंचों पर समन्वय बढ़ाने के इच्छुक हैं।
सांस्कृतिक संबंधों और जन-संपर्क को लेकर भी दोनों नेताओं ने संतोष व्यक्त किया। राष्ट्रपति करिस ने एस्टोनिया में भारतीय पेशेवरों के योगदान की सराहना की और कहा कि भारतीय समुदाय वहाँ की अर्थव्यवस्था और समाज में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। दोनों पक्ष टैलेंट मोबिलिटी और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए,जिससे लोगों के बीच संपर्क और अधिक मजबूत हो सके।
एस्टोनिया के राष्ट्रपति से मुलाकात के अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से भी द्विपक्षीय वार्ता की। प्रधानमंत्री तोबगे भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए भारत आए हैं। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की भूटान यात्रा के बाद सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। उस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक नई ऊर्जा का प्रतीक माना गया था।
प्रधानमंत्री तोबगे ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए भारत के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने गेलेफु माइंडफुलनेस सिटी परियोजना में भारत के सहयोग की सराहना की,जिसे भूटान के भविष्य के विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से भूटान सतत विकास,आध्यात्मिकता और आधुनिक बुनियादी ढाँचे का संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने ऊर्जा,विशेषकर जलविद्युत परियोजनाओं,परिवहन और संपर्क,तथा विकास साझेदारी के प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और भूटान के बीच पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं और यह बैठक उस विश्वास और मित्रता को और सुदृढ़ करने का अवसर बनी।
नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट केवल तकनीकी विमर्श का मंच नहीं रहा,बल्कि यह भारत की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व की झलक भी पेश करता है। प्रधानमंत्री मोदी की इन मुलाकातों से स्पष्ट है कि भारत उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ अपने पारंपरिक मित्र देशों के साथ विकास और रणनीतिक सहयोग को भी समान प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में इन बैठकों के परिणाम द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर नई पहल के रूप में सामने आ सकते हैं।
