प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@BJP4India)

रमजान मुबारक: पीएम मोदी और राहुल गांधी ने दी शुभकामनाएँ,जामा मस्जिद से पवित्र महीने का ऐलान

नई दिल्ली,19 फरवरी (युआईटीवी)- देशभर में रमजान को लेकर उत्साह और आध्यात्मिक उमंग का माहौल देखने को मिल रहा है। पवित्र महीने की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों को रमजान की हार्दिक बधाई दी। उनकी यह शुभकामना रमजान के पहले रोजे से एक दिन पहले आई,जिसे सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “रमजान मुबारक। यह पवित्र महीना हमारे समाज में एकता की भावना को और बढ़ाए। हर जगह शांति और खुशहाली हो।” उनके इस संदेश को देशभर में व्यापक प्रतिक्रिया मिली और लोगों ने इसे आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाला संदेश बताया।

वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी रमजान के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा,“रमजान मुबारक। यह पवित्र महीना सभी के लिए शांति,समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है।” विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा दिए गए इन संदेशों को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है,जो धार्मिक विविधता के बीच राष्ट्रीय एकता को रेखांकित करता है।

इससे पहले दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने चंद्रमा दिखने की पुष्टि के बाद घोषणा की कि पूरे देश में गुरुवार से रमजान का पवित्र महीना शुरू होगा। इस ऐलान के साथ ही मस्जिदों और मुस्लिम बहुल इलाकों में तैयारियाँ तेज हो गईं। बाजारों में रौनक बढ़ गई है और लोग इफ्तार व सहरी के लिए जरूरी सामान की खरीदारी में जुट गए हैं।

रमजान इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है और इसे आत्मशुद्धि, संयम और इबादत का महीना माना जाता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं,नमाज अदा करते हैं और कुरान की तिलावत करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना रहमत,मगफिरत और नजात का महीना है। पहले दस दिन रहमत यानी दया के,अगले दस दिन मगफिरत यानी माफी के और अंतिम दस दिन नजात यानी मुक्ति के माने जाते हैं।

रमजान के दौरान इफ्तार और सहरी की परंपरा विशेष महत्व रखती है। सहरी में रोजेदार सुबह सूर्योदय से पहले भोजन करते हैं और इफ्तार में सूर्यास्त के बाद रोजा खोलते हैं। मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की जाती है और कई लोग पूरे महीने में कुरान शरीफ का पाठ पूरा करने का संकल्प लेते हैं। इस पवित्र महीने में दान और जकात देने की परंपरा भी अहम मानी जाती है,जिससे जरूरतमंदों की सहायता की जाती है और सामाजिक समानता का संदेश दिया जाता है।

रमजान के ऐलान के बाद दिल्ली के एक स्थानीय निवासी ने कहा कि, “माशाल्लाह, यह रमजान का महीना है और यह अच्छाई व बरकत का महीना है। इस मुबारक महीने का पहला हिस्सा रहमत है,दूसरा माफी है और तीसरा मोक्ष का रास्ता है।” एक अन्य निवासी ने कहा, “यह इबादत के लिए बहुत मुबारक महीना है। इसमें अमीर-गरीब सब एक साथ रहते हैं। इसमें अल्लाह बरकत देता है। हम इबादत करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं।”

देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशासन ने भी रमजान को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया है। मस्जिदों और प्रमुख बाजारों के आसपास विशेष इंतजाम किए गए हैं,ताकि रोजेदारों को किसी तरह की असुविधा न हो। कई सामाजिक और धार्मिक संगठन इफ्तार कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं,जहाँ विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ बैठकर रोजा खोलते हैं और आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं।

रमजान का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह आत्मअनुशासन,धैर्य और करुणा का अभ्यास भी है। रोजा रखने से व्यक्ति को भूख और प्यास का अनुभव होता है,जिससे वह जरूरतमंदों की पीड़ा को समझ पाता है। यही कारण है कि इस महीने में चैरिटी और सामाजिक सहयोग पर विशेष जोर दिया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी सहित विभिन्न नेताओं के संदेशों के बीच देशभर में रमजान की शुरुआत आध्यात्मिक उत्साह और सामाजिक सद्भाव के माहौल में हो रही है। पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही मस्जिदों में नमाज और इबादत का सिलसिला तेज हो जाएगा और लोग शांति,समृद्धि तथा भाईचारे की कामना के साथ इस महीने का स्वागत करेंगे।