सुल्तानपुर,20 फरवरी (युआईटीवी)- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि प्रकरण में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को सुल्तानपुर की एमपी/एमएलए अदालत में पेश हुए। अदालत में लगभग 20 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान उनका बयान दर्ज किया गया। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई नौ मार्च को निर्धारित की है। इस पेशी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में पहले से ही हलचल थी,जिसके चलते अदालत परिसर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
राहुल गांधी निर्धारित समय से पहले ही सुल्तानपुर पहुँचे। वे लखनऊ हवाई अड्डे से सड़क मार्ग के जरिए सुल्तानपुर आए। अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने का अंतिम अवसर दिया था। निर्धारित समय पर वे दीवानी न्यायालय परिसर पहुंचे और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद अदालत कक्ष में उपस्थित हुए। उनके वकील ने बताया कि मुकदमा पूर्व निर्धारित तिथि पर सूचीबद्ध था और गांधी ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए अपना बयान दर्ज कराया। अब इस मामले में अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी।
अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिले। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले डॉग स्क्वायड से पूरे परिसर की सघन जाँच कराई गई। सुरक्षा घेरा मजबूत रखने के लिए एक अपर पुलिस अधीक्षक,चार क्षेत्राधिकारी सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अदालत परिसर के भीतर और बाहर बैरिकेडिंग की गई थी,ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे और न्यायिक प्रक्रिया निर्बाध रूप से संपन्न हो सके। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि पेशी के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
अदालत परिसर के बाहर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी मौजूद रहे। पार्टी नेताओं ने इसे नियमित न्यायिक प्रक्रिया बताया और कहा कि उन्हें अदालत से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और विपक्ष की आवाज को दबाने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया है। राहुल गांधी ने भी अदालत में कहा कि उनके खिलाफ यह मुकदमा राजनीतिक कारणों से दायर किया गया है।
इससे पहले लखनऊ हवाई अड्डे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जोरदार स्वागत किया। कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच उनका काफिला सड़क मार्ग से मोहनलालगंज और रायबरेली होते हुए सुल्तानपुर के लिए रवाना हुआ। प्रशासन ने हवाई अड्डे से लेकर दीवानी न्यायालय परिसर तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की गई थी और संवेदनशील बिंदुओं पर विशेष निगरानी रखी गई।
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2018 से जुड़ी है। आरोप है कि कर्नाटक में एक प्रेसवार्ता के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता विजय मिश्र ने सुल्तानपुर की अदालत में मानहानि का परिवाद दायर किया था। अदालत ने परिवाद स्वीकार करते हुए मामले में सुनवाई प्रारंभ की थी।
राहुल गांधी इससे पहले 26 जुलाई 2024 को भी इस मामले में अदालत में पेश हुए थे। हालाँकि,बाद की तिथियों पर अनुपस्थित रहने के कारण न्यायालय ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। 19 जनवरी को अदालत ने आदेश दिया था कि वे 20 फरवरी को स्वयं उपस्थित होकर बयान दर्ज कराएँ। इसी क्रम में शुक्रवार को वे अदालत पहुँचे और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की।
कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि राहुल गांधी नियमित कानूनी प्रक्रिया के तहत पेशी पर आए हैं और पार्टी को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष के नेताओं को झूठे और फर्जी मुकदमों में उलझाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अदालत से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद है और सत्य की जीत होगी।
दूसरी ओर,भाजपा नेताओं का कहना है कि यह मामला व्यक्तिगत मानहानि से जुड़ा है और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को अपने वक्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए। यदि कोई टिप्पणी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाती है,तो उसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना लोकतांत्रिक अधिकार है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक विमर्श की भाषा और उसकी मर्यादा से भी जुड़ा है। भारतीय दंड संहिता के तहत मानहानि से संबंधित प्रावधानों में यह देखा जाता है कि कथित बयान से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा या नहीं। अदालत को साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर यह तय करना होगा कि कथित टिप्पणी मानहानि की श्रेणी में आती है या नहीं।
राहुल गांधी की यह पेशी ऐसे समय में हुई है,जब वे राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख विपक्षी चेहरे के रूप में सक्रिय हैं। संसद और देश के विभिन्न हिस्सों में वे लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में यह मामला राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है। हालाँकि,अदालत में कार्यवाही के दौरान पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हुई और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
अब सभी की नजरें नौ मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन अदालत आगे की कार्यवाही और संभावित दिशा तय कर सकती है। फिलहाल,राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज कराकर न्यायिक प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित की है। यह मामला आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोणों से चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
