नई दिल्ली,20 फरवरी (युआईटीवी)- नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी कि 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे की प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट दुर्घटना के 30 दिनों के भीतर जारी कर दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के निर्धारित मानकों के अनुसार यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है और संभावना जताई जा रही है कि 27 फरवरी तक इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट होगी,जबकि विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट बाद में सभी तकनीकी तथ्यों और विश्लेषण के आधार पर जारी की जाएगी।
बारामती में हुए इस हादसे में महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता अजित पवार समेत विमान में सवार अन्य लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने देशभर में शोक और चिंता की लहर पैदा कर दी थी। हादसे के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए थे और विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो को तकनीकी जाँच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मंत्रालय के अनुसार जाँच पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है,ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की टीम ने घटनास्थल से प्राप्त मलबे की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। विमान के ढाँचे,इंजन,नियंत्रण प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को सुरक्षित तरीके से एकत्र कर उनका परीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही विमान के संचालन और रखरखाव से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन समीक्षा की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि विमान की नियमित जाँच,मरम्मत और तकनीकी परीक्षण निर्धारित मानकों के अनुसार किए गए थे या नहीं। यदि किसी उपकरण या पुर्जे में तकनीकी खराबी की आशंका पाई जाती है,तो उसे प्रयोगशाला में भेजकर विस्तृत परीक्षण कराया जाएगा।
मंत्रालय ने बताया कि विमान में दो फ्लाइट रिकॉर्डर लगे हुए थे,जिनमें से एक डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और दूसरा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर था। डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को सफलतापूर्वक नई दिल्ली स्थित विमान दुर्घटना जाँच केंद्र में डाउनलोड कर लिया गया है। इससे विमान की उड़ान के दौरान की गई गतिविधियों,ऊँचाई,गति,दिशा और अन्य तकनीकी आँकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इन आँकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि हादसे से ठीक पहले विमान की स्थिति क्या थी और पायलटों ने किस प्रकार की प्रतिक्रिया दी।
हालाँकि,कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को आग और अत्यधिक गर्मी के कारण नुकसान पहुँचा है। मंत्रालय के अनुसार यह रिकॉर्डर हनीवेल कंपनी द्वारा निर्मित था और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत इसकी तकनीकी जाँच के लिए संबंधित देश से विशेषज्ञ सहायता माँगी गई है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से पायलटों और सह-पायलट के बीच हुई बातचीत तथा किसी भी आपात स्थिति में दिए गए निर्देशों की जानकारी मिलती है,जो जाँच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस रिकॉर्डर से डेटा सफलतापूर्वक प्राप्त हो जाता है,तो दुर्घटना के कारणों को समझने में काफी सहायता मिलेगी।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 के दौरान नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने गैर-अनुसूचित विमान ऑपरेटरों के 51 ऑडिट किए थे। इन ऑडिट में सुरक्षा मानकों,उड़ान संचालन प्रक्रियाओं,रखरखाव प्रणाली और दस्तावेजी अनुपालन की जाँच की गई थी। संबंधित ऑपरेटर वीएसआर वेंचर्स की भी उड़ान सुरक्षा,ड्यूटी समय सीमा,रखरखाव प्रक्रियाओं और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई थी और जो भी कमियाँ सामने आई थीं,उन्हें समय रहते दूर कर लिया गया था।
हादसे के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को निर्देश दिया कि वह वीएसआर वेंचर्स की विशेष और व्यापक जाँच करे। इस विशेष जाँच में सुरक्षा व्यवस्था,संचालन प्रणाली,पायलट प्रशिक्षण,रखरखाव प्रक्रियाओं और फ्लाइट रिकॉर्डर की निगरानी सहित सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। यह जाँच 4 फरवरी से प्रारंभ हुई थी और मंत्रालय को उम्मीद है कि इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। जाँच पूरी होने के बाद नियमों और कानूनों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि केवल संबंधित ऑपरेटर ही नहीं,बल्कि वीआईपी और वीवीआईपी उड़ान संचालित करने वाले अन्य ऑपरेटरों तथा संबंधित हवाई अड्डों की भी विशेष जाँच के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी उड़ानें उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश न रहे। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह की व्यापक समीक्षा से विमानन क्षेत्र में सुरक्षा संस्कृति को और मजबूत किया जा सकेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरी जाँच पारदर्शिता और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप की जा रही है। मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों,मीडिया और आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अटकलों या अपुष्ट खबरों से बचें और आधिकारिक रिपोर्ट जारी होने तक धैर्य रखें। मंत्रालय का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दुर्घटना के संभावित कारणों का उल्लेख किया जाएगा,जबकि अंतिम रिपोर्ट में विस्तृत तकनीकी विश्लेषण,सिफारिशें और भविष्य के लिए सुरक्षा सुधारों का खाका प्रस्तुत किया जाएगा।
बारामती विमान हादसे ने एक बार फिर नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सरकार का दावा है कि वह इस घटना को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएँगे। अब सबकी निगाहें 27 फरवरी तक जारी होने वाली प्रारंभिक रिपोर्ट पर टिकी हैं,जो इस दुखद हादसे की परतें खोलने की दिशा में पहला आधिकारिक कदम होगी।
