नई दिल्ली,20 फरवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच गुरुवार को नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का संकेत दिया है। एआई इम्पैक्ट समिट के अवसर पर हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भविष्य की तकनीकों,विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश और सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। यह क्राउन प्रिंस की भारत की दूसरी आधिकारिक यात्रा है,जो दोनों देशों के बीच निरंतर बढ़ते विश्वास और संवाद को दर्शाती है।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि क्राउन प्रिंस के साथ उनकी चर्चा अत्यंत फलदायी रही और दोनों देशों ने भविष्य की प्रौद्योगिकियों में सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,सुपरकंप्यूटर और भारत में डेटा सेंटर में निवेश जैसे क्षेत्र आने वाले समय में आर्थिक विकास और नवाचार के प्रमुख स्तंभ बनेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में बताया गया कि दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा,व्यापार और निवेश,शिक्षा तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
विशेष रूप से व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। 18 फरवरी 2026 को इस समझौते पर हस्ताक्षर के चार वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवधि में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। समझौते ने व्यापारिक बाधाओं को कम करने,बाजारों तक बेहतर पहुँच प्रदान करने और निवेश को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिकारियों का मानना है कि इस समझौते ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती दी है और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच परस्पर निर्भरता को बढ़ाया है।
बैठक के दौरान द्विपक्षीय निवेश प्रवाह पर भी चर्चा हुई। संयुक्त अरब अमीरात के सॉवरेन वेल्थ फंड्स की भारत में सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए दोनों नेताओं ने निवेश को और बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारतीय अवसंरचना,अक्षय ऊर्जा,लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाओं पर विचार किया गया। ‘लइमाद’ जैसे नए सॉवरेन फंड की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई,जिससे दीर्घकालिक और रणनीतिक निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर भी जोर दिया गया। अंतरिक्ष,परमाणु ऊर्जा, उन्नत प्रौद्योगिकी और नवाचार को भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में साझेदारी को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखा जा सकता,बल्कि ज्ञान,अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भी गहराई तक ले जाना होगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के लिए भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा संयुक्त अरब अमीरात के स्वास्थ्य एवं रोकथाम मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिए जाने का स्वागत किया गया। इस समझौते के तहत पेशेवर आदान-प्रदान,संस्थागत सहयोग,संयुक्त अनुसंधान,डिजिटल स्वास्थ्य समाधान,फार्मास्यूटिकल्स और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। कोविड-19 महामारी के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है और यह समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग को ठोस रूप देने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग,जी42 और मोहम्मद बिन जायद यूनिवर्सिटी ऑफ एआई के बीच भारत में सुपरकंप्यूटर क्लस्टर की तैनाती के लिए टर्म शीट को अंतिम रूप दिया गया। यह सुपरकंप्यूटर क्लस्टर ‘एआई इंडिया मिशन’ का हिस्सा होगा और सार्वजनिक तथा निजी दोनों क्षेत्रों के लिए अनुसंधान,अनुप्रयोग विकास और व्यावसायिक उपयोग हेतु उपलब्ध रहेगा। इससे उच्च स्तरीय डेटा प्रोसेसिंग,मशीन लर्निंग मॉडल के प्रशिक्षण और जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान में भारत की क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अवसंरचना न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी,बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी।
दोनों नेताओं ने गुजरात के गिफ्ट सिटी में अबू धाबी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के कार्यालय की स्थापना का भी स्वागत किया। गिफ्ट सिटी को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है और वहाँ विदेशी वित्तीय संस्थानों की उपस्थिति भारत के वित्तीय क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इससे बीमा,पुनर्बीमा और वित्तीय नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
क्राउन प्रिंस ने एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी और कहा कि इस तरह के मंच वैश्विक स्तर पर तकनीकी सहयोग और संवाद को प्रोत्साहित करते हैं। प्रधानमंत्री ने भी आगामी एआई समिट की मेजबानी के लिए स्विट्जरलैंड और उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात की पहल का स्वागत किया। यह दर्शाता है कि एआई को लेकर वैश्विक स्तर पर सहयोग की एक नई धारा विकसित हो रही है,जिसमें भारत और संयुक्त अरब अमीरात सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
