वॉशिंगटन,20 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच उभरती प्रौद्योगिकी सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से अमेरिका के आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लिया। अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार हेलबर्ग 20 और 21 फरवरी को भारत के दौरे पर हैं और वह व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ इस महत्वपूर्ण समिट में शामिल हुए। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इकोसिस्टम वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में आ चुके हैं।
अमेरिकी विभाग ने बताया कि अवर सचिव द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे और सम्मेलन को संबोधित करेंगे। अपने भाषण में वह भारत के साथ अमेरिका के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा उभरती तकनीकों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे। विशेष रूप से एआई एक्शन प्लान के तहत अमेरिकी एआई एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम के अगले चरण को लॉन्च करने में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। यह पहल दोनों देशों के बीच तकनीकी नवाचार,निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित,उच्च गुणवत्ता और किफायती हैंडहेल्ड स्मार्टफोन डिवाइस के व्यापक प्रसार को बढ़ावा देने के लिए 200 मिलियन डॉलर तक की विदेशी सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया भी शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में भरोसेमंद तकनीकी बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है,जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार हो और नए उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित इंटरनेट पहुँच मिल सके। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है,जब वैश्विक स्तर पर डिजिटल संप्रभुता और डेटा सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बन चुके हैं।
एज एआई पैकेज के माध्यम से अमेरिकी विभाग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विश्वसनीय ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले अगली पीढ़ी के स्मार्टफोनों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने के लिए नए प्रस्ताव आमंत्रित कर रहा है। इन ऑपरेटिंग सिस्टम में एंड्रॉयड और आईओएस जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसका मकसद इस क्षेत्र के अगले एक अरब इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को एक खुले,इंटरऑपरेबल और नवाचार-केंद्रित सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल उपयोगकर्ताओं की संख्या में तेज वृद्धि होगी और ऐसे में सुरक्षित व पारदर्शी सॉफ्टवेयर ढाँचे की आवश्यकता और अधिक बढ़ेगी।
यह पहल केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है,बल्कि व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। अमेरिकी विभाग के अनुसार यह बाजार-आधारित विकल्प प्रदान करती है,जिससे जोखिम वाले विक्रेताओं पर निर्भरता कम की जा सके। इसके माध्यम से गैर-भरोसेमंद प्रदाताओं द्वारा संभावित मूल्य हेरफेर की आशंका घटेगी और एक विश्वसनीय एआई सॉफ्टवेयर प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा। इस रणनीति का उद्देश्य साझेदार देशों के डिजिटल ढांचे को सुरक्षित,स्वायत्त और बाहरी दबाव से मुक्त बनाए रखना है।
इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में अमेरिका की भागीदारी यह दर्शाती है कि दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल तकनीकी नवाचार के रूप में नहीं,बल्कि आर्थिक विकास और रणनीतिक सहयोग के साधन के रूप में देख रहे हैं। भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है और उसके पास विशाल प्रतिभा आधार,स्टार्टअप इकोसिस्टम और बढ़ता हुआ उपभोक्ता बाजार है। वहीं अमेरिका उन्नत अनुसंधान,पूँजी निवेश और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के अनुभव के साथ इस साझेदारी को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित डेवलपर टूल्स और नवाचार प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों लोगों को सशक्त बनाने की क्षमता है। इससे न केवल नई कंपनियों और रोजगार के अवसरों का सृजन होगा,बल्कि शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि और वित्त जैसे क्षेत्रों में भी डिजिटल समाधान विकसित किए जा सकेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इस पहल को “पैक्स सिलिका” के विजन से भी जोड़ा जा रहा है,जिसका उद्देश्य एक समृद्ध, आपस में जुड़ा और तकनीकी रूप से सशक्त क्षेत्र बनाना है।
भारत और अमेरिका के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग पहले से ही अर्धचालक निर्माण,साइबर सुरक्षा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में विस्तार पा रहा है। अब एआई और स्मार्ट डिवाइस पारिस्थितिकी तंत्र में साझेदारी दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को और गहरा कर सकती है। यह सहयोग न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाएगा,बल्कि वैश्विक तकनीकी मानकों और नीतियों को आकार देने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत होंगे। सुरक्षित,पारदर्शी और नवाचार-उन्मुख डिजिटल इकोसिस्टम की दिशा में उठाए गए ये कदम वैश्विक तकनीकी परिदृश्य को नई दिशा दे सकते हैं।
