ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम (तस्वीर क्रेडिट@Surendra21286)

टी20 विश्व कप 2026 से ऑस्ट्रेलिया की विदाई: ओमान पर बड़ी जीत भी नहीं बचा सकी अभियान,मिशेल मार्श ने जताई गहरी निराशा

कैंडी,21 फरवरी (युआईटीवी)- टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया का सफर ओमान के खिलाफ शानदार जीत के साथ जरूर समाप्त हुआ,लेकिन इस जीत में वह संतोष नहीं था जिसकी उम्मीद टीम और उसके समर्थकों को थी। पल्लेकेले में खेले गए आखिरी ग्रुप मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने ओमान को 9 विकेट से हराकर अपना अभियान खत्म किया,मगर सेमीफाइनल की दौड़ से पहले ही बाहर हो जाने का दर्द खिलाड़ियों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था। खासकर कप्तान मिशेल मार्श की प्रतिक्रिया में निराशा और आत्ममंथन दोनों झलक रहे थे।

श्रीलंका के खूबसूरत शहर पल्लेकेले स्थित पल्लेकेले क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस गंवाया और पहले गेंदबाजी करनी पड़ी। ओमान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की शुरुआत सँभली हुई रही,लेकिन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट चटकाकर उन्हें बड़े स्कोर तक पहुँचने का मौका नहीं दिया। पूरी ओमानी टीम 104 रन पर सिमट गई। लक्ष्य बड़ा नहीं था,लेकिन टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी टीम के लिए यह मैच सम्मान बचाने का था।

105 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रीय क्रिकेट टीम ने आक्रामक अंदाज अपनाया। कप्तान मिशेल मार्श ने जिम्मेदारी सँभाली और नाबाद 64 रनों की पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच झलक रही थी। महज 9.4 ओवर में 1 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया गया। आँकड़ों के लिहाज से यह एकतरफा मुकाबला था,लेकिन टूर्नामेंट की तस्वीर इससे पहले ही तय हो चुकी थी।

मैच के बाद मार्श ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि टीम बेहद निराश है। उन्होंने कहा कि हर टीम की तरह ऑस्ट्रेलिया ने भी पिछले दो वर्षों तक विश्व कप की तैयारी की थी। रणनीतियाँ बनाई गईं,खिलाड़ियों को मौके दिए गए,संयोजन पर काम हुआ,लेकिन कुछ अहम मुकाबलों में टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकी। उनके अनुसार यही बड़े टूर्नामेंट की सच्चाई है कि छोटी सी चूक भी भारी पड़ जाती है।

ऑस्ट्रेलिया को ग्रुप स्टेज में चार मुकाबले खेलने थे। टीम को जिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट टीम और श्रीलंका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा,जबकि आयरलैंड राष्ट्रीय क्रिकेट टीम और ओमान के खिलाफ जीत मिली। जिम्बाब्वे के खिलाफ मिली हार को मार्श ने निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि उस मैच के बाद टीम पर अतिरिक्त दबाव आ गया था। जिम्बाब्वे ने उस दिन शानदार खेल दिखाया और जीत का पूरा श्रेय उन्हें जाता है,लेकिन ऑस्ट्रेलिया उस झटके से पूरी तरह उबर नहीं सकी।

कंडीशन को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मार्श ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कोलंबो की पिच धीमी जरूर थी,लेकिन टीम ने उसके लिए तैयारी की थी। यहाँ उल्लेखनीय है कि ग्रुप के कुछ मुकाबले कोलंबो में भी खेले गए थे,जहाँ स्पिन और धीमी गेंदों का प्रभाव देखने को मिला। मार्श के मुताबिक पिच या हालात को हार का बहाना नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने स्वीकार किया कि टीम के पास संतुलित और मजबूत संयोजन था,लेकिन विश्व कप जैसे मंच पर थोड़ा भी खराब प्रदर्शन आपको बैकफुट पर धकेल सकता है।

ऑस्ट्रेलिया की पहचान बड़े टूर्नामेंट में मजबूत मानसिकता और दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन की रही है,लेकिन इस बार टीम उस धार को कायम नहीं रख सकी। कई मौकों पर बल्लेबाजी इकाई सामूहिक रूप से विफल रही,जबकि गेंदबाजी में भी वह धार नजर नहीं आई,जिसने उन्हें अतीत में खिताब दिलाए थे। मार्श ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में टीम के पास खुद को साबित करने के मौके थे,लेकिन जब सबसे ज्यादा जरूरत थी,तब वे बेहतर क्रिकेट नहीं खेल पाए।

उन्होंने यह भी कहा कि एक खिलाड़ी और एक टीम के तौर पर अब समय आत्मविश्लेषण का है। असफलता हमेशा कुछ न कुछ सिखाती है और यह अनुभव भी भविष्य के लिए सबक बनेगा। मार्श के शब्दों में दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि अभी निराशा स्वाभाविक है,लेकिन टीम घर लौटकर ईमानदारी से सोचेगी कि कहाँ कमी रह गई और आगे कैसे बेहतर बनना है। उनका मानना है कि अगर इस ग्रुप को फिर मौका मिलता है,तो वे इस अनुभव का उपयोग करते हुए और मजबूत होकर लौटेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया की टीम प्रतिभा से भरपूर थी,लेकिन टीम संयोजन और निर्णायक क्षणों में रणनीति की कमी उन्हें भारी पड़ी। जिम्बाब्वे और श्रीलंका के खिलाफ हार ने अंक तालिका में उनकी स्थिति कमजोर कर दी। टी20 प्रारूप में हर मैच का महत्व बहुत ज्यादा होता है और नेट रन रेट जैसी गणनाएँ भी समीकरण बदल देती हैं। ऐसे में शुरुआती झटके से उबर पाना आसान नहीं होता।

ओमान के खिलाफ जीत भले ही सांत्वना मात्र रही हो,लेकिन इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने अपने पुराने अंदाज की झलक जरूर दिखाई। आक्रामक बल्लेबाजी,सटीक गेंदबाजी और सकारात्मक बॉडी लैंग्वेज ने यह संकेत दिया कि टीम में क्षमता की कमी नहीं है। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या वे बड़े मंच पर निरंतरता बनाए रख सकते हैं।

टी20 विश्व कप 2026 से बाहर होना ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ा झटका है,क्योंकि यह टीम हमेशा खिताब की दावेदार मानी जाती है। अब नजरें इस बात पर होंगी कि चयनकर्ता और टीम प्रबंधन आगे की रणनीति कैसे तय करते हैं। क्या टीम में बदलाव होगा या मौजूदा खिलाड़ियों पर भरोसा कायम रखा जाएगा,यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इतना तय है कि ओमान पर 9 विकेट की जीत भी उस दर्द को कम नहीं कर सकी,जो टूर्नामेंट से समय से पहले बाहर होने के कारण ऑस्ट्रेलियाई खेमे में महसूस किया जा रहा है।