अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@your_bhupesh)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप,टैरिफ रद्द होने को बताया शर्मनाक,अतिरिक्त शुल्क लगाने की दी चेतावनी

वाशिंगटन,21 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार जगत में उस समय हलचल मच गई,जब यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार देते हुए उसे रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1977 के आपातकालीन कानून के तहत राष्ट्रपति को भारत समेत दुनिया भर के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। इस फैसले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी और कोर्ट के निर्णय को “शर्मनाक” बताया।

ट्रंप ने कहा कि उन्हें ऐसे फैसले की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग वर्षों से अमेरिका को लूट रहे हैं और अब जब उनकी सरकार ने सख्त कदम उठाए,तो अदालत ने उसे रोक दिया। उनके अनुसार टैरिफ अमेरिका की आर्थिक राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक है और इसे रोकना देशहित के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कुछ सदस्यों पर “बेहद शर्म” आती है,क्योंकि उनमें देश के हित में सही निर्णय लेने का साहस नहीं है।

अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि जब लोग अदालत के असहमति वाले मत पढ़ेंगे,तो उन्हें समझ आएगा कि फैसले में गंभीर खामियाँ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत विदेशी हितों और एक छोटे से राजनीतिक आंदोलन से प्रभावित हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि यह आंदोलन आकार में बहुत छोटा है,लेकिन बेहद शोर मचाता है और कुछ जज उनसे डरते हैं। उनके शब्दों में, “वे घमंडी,अज्ञानी और बहुत शोर करने वाले लोग हैं,जिन्हें लगता है कि वे न्यायपालिका को प्रभावित कर सकते हैं।”

राष्ट्रपति ने अपनी चुनावी जीत का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भारी बहुमत से चुनाव जीता था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान धांधली हुई,लेकिन इसके बावजूद उनकी जीत इतनी बड़ी थी कि उसे पलटा नहीं जा सकता था। ट्रंप के अनुसार जनता ने उन्हें मजबूत आर्थिक नीतियाँ लागू करने का जनादेश दिया था,जिसमें टैरिफ भी शामिल थे। ऐसे में अदालत का यह फैसला जनता की इच्छा के विरुद्ध है।

टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप का रुख लंबे समय से आक्रामक रहा है। उनका मानना है कि कई देश,विशेष रूप से बड़े निर्यातक राष्ट्र,अमेरिका के बाजार का फायदा उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर अदालत ने एक रास्ता बंद किया है,तो उनके पास अन्य विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वे वैकल्पिक कानूनी उपायों के जरिए अतिरिक्त टैरिफ लागू कर सकते हैं। यहाँ तक कि उन्होंने यह भी कहा कि सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त वैश्विक टैरिफ लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ी तो किसी भी देश के साथ व्यापार बंद किया जा सकता है।

अदालत के फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में भी हलचल देखी गई। निवेशकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि यदि ट्रंप प्रशासन नए सिरे से टैरिफ लागू करता है,तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार समझौतों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा व्यापक टैरिफ लगाने से वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका फिर से बढ़ सकती है,जिसका असर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 1977 का इमरजेंसी कानून राष्ट्रपति को इतनी व्यापक शक्तियाँ नहीं देता कि वह बिना कांग्रेस की मंजूरी के बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्थिक आपातकाल की परिभाषा का उपयोग सीमित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। इस फैसले को संवैधानिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,क्योंकि इससे कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन को स्पष्ट किया गया है।

ट्रंप ने हालाँकि इसे अपनी ताकत में इजाफा बताया। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उनकी प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है और जो लोग इस निर्णय से खुश हैं,वे ज्यादा दिन खुश नहीं रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ पर अब और सख्त कदम उठाए जाएँगे। उनके अनुसार अमेरिका को “फिर महान बनाना” ही उनका लक्ष्य है और इसके लिए वे हर संभव उपाय करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद आने वाले चुनावी माहौल को भी प्रभावित कर सकता है। एक ओर ट्रंप अपने समर्थकों के बीच राष्ट्रवाद और आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा जोर-शोर से उठा रहे हैं,वहीं विपक्षी दल इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादा की जीत बता रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले को ध्यान से देखा जा रहा है,खासकर उन देशों द्वारा जिन पर संभावित अतिरिक्त टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है।

भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है,क्योंकि अमेरिका के साथ उनका बड़ा व्यापारिक संबंध है। यदि ट्रंप प्रशासन नए सिरे से टैरिफ लागू करता है,तो इससे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकता है। हालाँकि,फिलहाल अदालत का फैसला प्रभावी है और टैरिफ रद्द कर दिए गए हैं,लेकिन ट्रंप के बयानों से स्पष्ट है कि यह मुद्दा यहीं खत्म नहीं होने वाला।

अमेरिकी राजनीति में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है,लेकिन आर्थिक नीति जैसे संवेदनशील मुद्दे पर यह विवाद वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप प्रशासन कौन से वैकल्पिक कानूनी रास्ते अपनाता है और क्या कांग्रेस इस मामले में कोई नई भूमिका निभाती है। फिलहाल इतना तय है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और टैरिफ का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।