अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

टैरिफ विवाद पर ट्रंप का तीखा हमला,बोले- ‘एक डॉलर भी नहीं ले सकता,लेकिन व्यापार पूरी तरह बंद कर सकता हूँ’

वाशिंगटन,21 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका में टैरिफ को लेकर जारी संवैधानिक और राजनीतिक टकराव ने एक नया मोड़ ले लिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को “शर्मनाक” और “बेकार” करार दिया,जिसमें अदालत ने उनके द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया था। ट्रंप ने कहा कि अदालत ने उन्हें एक डॉलर तक का शुल्क लगाने की अनुमति नहीं दी,लेकिन विडंबना यह है कि उनके पास किसी भी देश के साथ व्यापार पूरी तरह बंद करने का अधिकार है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने तीखे शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिन चीजों को गलत तरीके से खारिज किया है,उनकी जगह लेने के लिए प्रशासन अन्य विकल्पों का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि उनके पास “बहुत अच्छे विकल्प” हैं और इन विकल्पों का इस्तेमाल करने से अमेरिका को पहले से ज्यादा राजस्व मिल सकता है। उनके मुताबिक यह स्थिति अंततः अमेरिका को और अधिक मजबूत बनाएगी।

ट्रंप ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “कोर्ट ने कहा कि मैं एक डॉलर भी शुल्क नहीं लगा सकता। मैं एक डॉलर भी नहीं ले सकता। यह फैसला जरूर उन दूसरे देशों की सुरक्षा के लिए लिया गया होगा,न कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए,जिसकी रक्षा उन्हें करनी चाहिए।” उन्होंने अदालत की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जजों का काम देश के हितों की रक्षा करना है,लेकिन इस फैसले से ऐसा नहीं लगता।

राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि भले ही अदालत ने टैरिफ लगाने की शक्ति सीमित कर दी हो,लेकिन उनके पास किसी भी देश के साथ व्यापार या कारोबार को पूरी तरह बंद करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे उस देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। ट्रंप ने कहा,“दूसरे शब्दों में,मैं व्यापार को खत्म कर सकता हूँ। मैं उस देश की अर्थव्यवस्था को खत्म कर सकता हूँ। ”

ट्रंप ने लाइसेंस और शुल्क के उदाहरण देते हुए अदालत के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कौन-सा लाइसेंस ऐसा है,जो बिना शुल्क के जारी होता है? उनके अनुसार जब भी कोई लाइसेंस दिया जाता है,तो उसके साथ शुल्क जुड़ा होता है,लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ के मामले में अलग रुख अपनाया। उन्होंने इसे न्यायिक असंगति बताया।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान न केवल अदालत पर सीधा हमला है,बल्कि यह उनके समर्थकों के लिए एक राजनीतिक संदेश भी है। वे लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि विदेशी देश अमेरिका के बाजार का फायदा उठाते हैं और सख्त टैरिफ नीति से ही अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की रक्षा की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उन्होंने उसी नीति पर हमला बताया है।

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति को व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाने के लिए सीमित कानूनी अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है। यह फैसला कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के संतुलन को रेखांकित करता है। हालाँकि,ट्रंप का तर्क है कि राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के मुद्दे पर उन्हें अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

ट्रंप के बयान के बाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार जगत में भी चिंता बढ़ गई है। यदि अमेरिका वास्तव में किसी देश के साथ व्यापार पूरी तरह बंद करने की दिशा में कदम उठाता है,तो इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएँ अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं और अचानक व्यापार प्रतिबंध से व्यापक आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।

अमेरिका के भीतर भी इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग ट्रंप के सख्त रुख को राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी मानते हैं,जबकि अन्य इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह बताते हैं। आलोचकों का कहना है कि टैरिफ और व्यापार प्रतिबंध से वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।

ट्रंप ने हालाँकि,स्पष्ट कर दिया है कि वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद प्रशासन के पास पर्याप्त कानूनी और नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। उनके अनुसार,यदि टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं है,तो वे अन्य उपायों के जरिए विदेशी वस्तुओं के प्रवेश को नियंत्रित कर सकते हैं।

यह विवाद आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है। अदालत के फैसले और राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया ने यह संकेत दिया है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच यह टकराव जल्द खत्म होने वाला नहीं है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप प्रशासन आगे कौन-सा कदम उठाता है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।