अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का बड़ा कदम: सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू,व्यापारिक रिश्तों पर गहराए सवाल

वाशिंगटन,21 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर हलचल मच गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के तुरंत बाद सभी देशों पर 10 प्रतिशत का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस से इस संबंध में एक आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह टैरिफ लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा। उनके इस फैसले ने न केवल अमेरिका के भीतर,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय में भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

दरअसल,अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इकोनॉमिक इमरजेंसी पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत सरकार द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ पावर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति आईईईपीए के तहत टैरिफ लगाने की कानूनी अथॉरिटी का उपयोग नहीं कर सकते। कोर्ट के इस निर्णय को ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था। हालाँकि,फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने एक नया रास्ता अपनाते हुए सेक्शन 122 लीगल अथॉरिटी के तहत 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ओवल ऑफिस से सभी देशों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ पर हस्ताक्षर करना उनके लिए सम्मान की बात है और यह लगभग तुरंत लागू होगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत ने उन्हें 1 डॉलर भी चार्ज करने की अनुमति नहीं दी,जबकि वह देश के हित में मामूली शुल्क लगाना चाहते थे।

इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने अदालत के निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के अनुसार वह किसी भी देश से 1 डॉलर भी चार्ज नहीं कर सकते,लेकिन उन्हें किसी भी देश के साथ व्यापार समाप्त करने या बैन लगाने की अनुमति है। उन्होंने इसे अजीब स्थिति करार देते हुए कहा कि उन्हें देश को बर्बाद करने की अनुमति है,लेकिन थोड़ी-सी फीस लेने की अनुमति नहीं है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में बहस को और तेज कर दिया है।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने आईईईपीए के तहत टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की कानूनी शक्ति को अस्वीकार कर दिया है। अधिकारी ने बताया कि जिन देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत की थी,उन पर सरकार आईईईपीए के माध्यम से टैरिफ लागू कर रही थी। अब जब यह कानूनी प्रावधान प्रभावी नहीं रहा,तो सेक्शन 122 लीगल अथॉरिटी के तहत 10 प्रतिशत का अस्थायी ग्लोबल टैरिफ लागू किया गया है।

व्हाइट हाउस के अनुसार,भारत,ब्रिटेन,यूरोपीय यूनियन और जापान जैसे देशों पर फिलहाल समान रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा,भले ही वे ट्रंप प्रशासन के साथ व्यापार समझौतों की प्रक्रिया में शामिल रहे हों। इन देशों ने हाल के वर्षों में अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन और शुल्क संरचना को लेकर वार्ता की थी। हालाँकि,नए आदेश के तहत इन सभी पर समान दर से शुल्क लगाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की व्यापार नीति को अधिक आक्रामक दिशा में ले जा सकता है। ट्रंप पहले भी अपने कार्यकाल के दौरान चीन और अन्य देशों पर टैरिफ बढ़ाकर व्यापार घाटे को कम करने की रणनीति अपना चुके हैं। दूसरी बार सत्ता में वापसी के बाद उन्होंने संकेत दिया था कि वह सभी देशों के साथ “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ही व्यापार करेंगे और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग दरों से टैरिफ लगाएँगे।

हालाँकि,सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी रणनीति को कानूनी चुनौती दे दी। अदालत का तर्क था कि आईईईपीए का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में आर्थिक प्रतिबंध लगाना है, न कि व्यापक व्यापारिक टैरिफ लागू करना। इस व्याख्या ने राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा को स्पष्ट किया और कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के बीच संतुलन की संवैधानिक बहस को फिर से केंद्र में ला दिया।

सेक्शन 122 के तहत लगाए गए नए 10 प्रतिशत टैरिफ को व्हाइट हाउस ने अस्थायी कदम बताया है। अधिकारी ने कहा कि सरकार अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है,ताकि पहले से तय या अधिक सटीक टैरिफ दरें लागू की जा सकें। तब तक यह समान 10 प्रतिशत शुल्क प्रभावी रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिन देशों ने अमेरिका के साथ व्यापारिक प्रतिबद्धताएँ की हैं,वे अपने वादों का पालन जारी रखेंगे और व्यापारिक अवरोधों को कम करने की दिशा में काम करेंगे।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि इस फैसले का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। यदि प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों ने जवाबी टैरिफ लगाए,तो वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव बढ़ सकता है। पहले भी अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था। ऐसे में नया ग्लोबल टैरिफ व्यापारिक अनिश्चितता को बढ़ा सकता है।

भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। अमेरिका भारत का एक बड़ा निर्यात बाजार है। यदि 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू होता है,तो भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालाँकि,यह भी संभव है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से समाधान निकाला जाए। ब्रिटेन,यूरोपीय यूनियन और जापान भी अमेरिका के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं और वे इस फैसले पर अपनी रणनीति तय करने में जुट गए हैं।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह घटनाक्रम अहम है। ट्रंप अपने समर्थकों के बीच कठोर व्यापार नीति और अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा के पक्षधर के रूप में लोकप्रिय रहे हैं। उनका तर्क है कि टैरिफ से घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलता है और अमेरिका का व्यापार घाटा कम होता है। दूसरी ओर,आलोचकों का कहना है कि टैरिफ का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों पर ही पड़ता है,क्योंकि आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद ट्रंप के कदम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका में व्यापार नीति अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं,बल्कि संवैधानिक और राजनीतिक विमर्श का भी केंद्र बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य देश इस 10 प्रतिशत टैरिफ का जवाब अपने कदमों से देते हैं या फिर कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से समाधान खोजा जाता है।

फिलहाल इतना तय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला वैश्विक व्यापार व्यवस्था में नई अनिश्चितताओं को जन्म दे चुका है। अमेरिकी प्रशासन इसे अस्थायी और रणनीतिक कदम बता रहा है,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इसे व्यापक आर्थिक प्रभावों के नजरिए से देख रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है,ऐसे में यह नया टैरिफ विवाद आने वाले समय में व्यापारिक संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।