राष्ट्रपति लूला ने नई दिल्ली में एपेक्स कार्यालय का किया उद्घाटन (तस्वीर क्रेडिट@InvGurInd)

भारत-ब्राजील रिश्तों को नई रफ्तार: राष्ट्रपति लूला ने नई दिल्ली में एपेक्स कार्यालय का किया उद्घाटन

नई दिल्ली,21 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और ब्राजील के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देते हुए लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने शनिवार को नई दिल्ली में ब्राजीलियन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी एपेक्स के पहले भारतीय कार्यालय के उद्घाटन की घोषणा की। इस अवसर को दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। राष्ट्रपति लूला इस समय भारत के उच्च-स्तरीय राजकीय दौरे पर हैं,जिसमें उनके साथ अब तक का सबसे बड़ा ब्राजीलियाई व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है।

सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में राष्ट्रपति लूला ने कहा कि एपेक्स एजेंसी विदेशों में ब्राजीलियाई उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देने तथा ब्राजील की अर्थव्यवस्था के रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित करने का काम करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ब्राजील ग्लोबल साउथ के दो प्रमुख देश हैं और दोनों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच 15.2 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ,जो आने वाले वर्षों में और अधिक बढ़ सकता है।

नई दिल्ली में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में ब्राजील के कई वरिष्ठ मंत्री और एपेक्स के अध्यक्ष जॉर्ज वियाना भी उपस्थित रहे। यह पहल ऐसे समय पर की गई है,जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अमेरिकी नीतियों,विशेषकर टैरिफ संबंधी कदमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संतुलन में परिवर्तन हो रहा है। ऐसे में भारत और ब्राजील जैसे उभरते आर्थिक शक्तियाँ अपने पारस्परिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही हैं।

राष्ट्रपति लूला के इस दौरे में 260 से अधिक ब्राजीलियाई कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल, लगभग 14 कैबिनेट मंत्री और कई प्रमुख उद्योगपति तथा सीईओ शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि ब्राजील इस यात्रा को महज एक औपचारिक दौरे के रूप में नहीं,बल्कि एक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के अवसर के रूप में देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एपेक्स का भारत में कार्यालय खुलने से दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

भारत और ब्राजील के संबंधों को वर्ष 2006 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। तब से लेकर अब तक दोनों देशों ने कृषि,ऊर्जा,रक्षा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता ने इस रिश्ते को मजबूती दी है। दोनों देश वैश्विक मंचों पर भी एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते रहे हैं।

राष्ट्रपति लूला ने नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भी भाग लिया,जहाँ उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने प्रौद्योगिकी को समावेशी विकास का माध्यम बताते हुए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की सराहना की। इस संदर्भ में भारत की डिजिटल पहलें ब्राजील के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं। एआई और डिजिटल तकनीक में सहयोग को दोनों देशों के संबंधों का उभरता हुआ नया आयाम माना जा रहा है।

21 फरवरी को राष्ट्रपति लूला की मुलाकात नरेंद्र मोदी के साथ निर्धारित है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,इस व्यापक द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार,निवेश,ऊर्जा,रक्षा सहयोग,डिजिटल तकनीक और लोगों के बीच संपर्क जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही,वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार,बहुपक्षीय संस्थाओं में समन्वय और ग्लोबल साउथ से जुड़े साझा मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

भारत और ब्राजील दोनों ही ब्रिक्स,जी20,संयुक्त राष्ट्र,विश्व व्यापार संगठन और यूनेस्को जैसे मंचों पर सक्रिय सहयोगी रहे हैं। इन बहुपक्षीय संगठनों के माध्यम से दोनों देश विकासशील राष्ट्रों की आवाज को मजबूत करने का प्रयास करते हैं। ग्लोबल साउथ की चिंताओं—जैसे जलवायु परिवर्तन,खाद्य सुरक्षा, सतत विकास और वित्तीय समावेशन पर भारत और ब्राजील का दृष्टिकोण काफी हद तक समान रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन के इस दौर में भारत और ब्राजील के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है। दोनों देशों के पास विशाल उपभोक्ता बाजार,प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी क्षमता है। यदि व्यापार और निवेश के अवसरों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए,तो यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय स्तर पर बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन में भी सकारात्मक योगदान दे सकती है।

राष्ट्रपति लूला का यह दौरा केवल एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते विश्वास और साझेदारी का प्रतीक है। एपेक्स कार्यालय का उद्घाटन इस दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है,जो व्यापारिक संपर्क को संस्थागत आधार देगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश अपने साझा लक्ष्यों को किस तरह ठोस परियोजनाओं और समझौतों में परिवर्तित करते हैं। फिलहाल,इस यात्रा ने भारत-ब्राजील संबंधों को नई ऊर्जा और नई संभावनाओं से भर दिया है।