आईडीएफसी फर्स्ट बैंक

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामला: 590 करोड़ के गबन में चार आरोपी सात दिन की पुलिस रिमांड पर,556 करोड़ की रिकवरी का दावा

चंडीगढ़,26 फरवरी (युआईटीवी)- हरियाणा में पंचायत विभाग के फंड से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में जाँच ने तेजी पकड़ ली है। इस मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश किया गया,जहाँ से उन्हें सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस अब रिमांड के दौरान गबन की पूरी साजिश,धन के ट्रांजैक्शन और संभावित मिलीभगत की परतें खोलने की कोशिश करेगी।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रिभव ऋषि,अभिषेक सिंगला,अभय कुमार और स्वाति सिंगला के रूप में हुई है। हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल अर्शिंदर सिंह चावला के अनुसार, 23 फरवरी को पंचायत विभाग के फंड के गबन से संबंधित एक पत्र प्राप्त हुआ था। प्रारंभिक जाँच और सरकारी आदेश के बाद तत्काल केस दर्ज किया गया। इसके बाद गंगा राम पूनिया के नेतृत्व में गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

जाँच एजेंसियों के मुताबिक,इस पूरे मामले के कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि और अभय कुमार बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार,पंचकूला निवासी रिभव ऋषि ने लगभग छह महीने पहले बैंक की नौकरी छोड़ दी थी,जबकि अभय कुमार ने पिछले वर्ष अगस्त में पद से इस्तीफा दिया था। जाँच में यह भी सामने आया है कि बैंक की चंडीगढ़ शाखा से जुड़े लेन-देन में अनियमितताएँ पाई गईं और आशंका है कि बीच तथा निचले स्तर पर कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। हालाँकि,अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की गई है।

इस मामले में एक अहम पहलू तेजी से हुई धनराशि की रिकवरी है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने 24 घंटे के भीतर 556 करोड़ रुपये की राशि रिकवर कर ली है,जिसमें लगभग 22 करोड़ रुपये ब्याज भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों,बोर्डों और निगमों से संबंधित पूरी राशि बैंक ने संबंधित विभागों के खातों में वापस जमा करा दी है। उन्होंने इस त्वरित कार्रवाई का श्रेय हरियाणा सरकार और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय को दिया।

मुख्यमंत्री सैनी ने विधानसभा में यह भी कहा कि यह धनराशि राज्य के 2.8 करोड़ लोगों की मेहनत की कमाई है और सरकार इसे पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता का एक-एक रुपया सुरक्षित रहेगा और केवल उनके कल्याण के लिए खर्च किया जाएगा। इस बयान के जरिए सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है,जिसकी अध्यक्षता वित्त सचिव करेंगे। यह समिति पूरे प्रकरण की गहन जाँच करेगी और यह तय करेगी कि किन कर्मचारियों या अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है। जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई और सिफारिशें भी इसी समिति द्वारा की जाएँगी। सरकार का कहना है कि चाहे कोई सरकारी अधिकारी हो या बैंक कर्मचारी,दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं,बैंक की ओर से संकेत मिला है कि गड़बड़ियाँ मुख्य रूप से उसकी चंडीगढ़ शाखा से संबंधित थीं। बैंक प्रबंधन ने आंतरिक जाँच शुरू कर दी है और नियामकीय मानकों के अनुरूप सहयोग करने की बात कही है। सूत्रों के अनुसार,यह देखा जा रहा है कि फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया में किस स्तर पर नियंत्रण तंत्र विफल हुआ और किस प्रकार इतनी बड़ी राशि का गबन संभव हुआ।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से गहन पूछताछ होगी,जिससे धन के उपयोग,संभावित सहयोगियों और तकनीकी खामियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। यह भी जाँच का विषय है कि क्या फंड को अन्य खातों में ट्रांसफर कर निवेश या निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। यदि ऐसा पाया जाता है,तो मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आर्थिक अपराधों की धाराएँ भी जोड़ी जा सकती हैं।

यह मामला न केवल वित्तीय संस्थानों की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर सवाल उठाता है,बल्कि सरकारी फंड के प्रबंधन में सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बैंकिंग सिस्टम में ऑडिट,डिजिटल मॉनिटरिंग और जवाबदेही तंत्र को और मजबूत करना होगा।

फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँगे और जनता के धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और खुलासे सामने आ सकते हैं,जो पूरे वित्तीय तंत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेतक साबित होंगे।