नई दिल्ली,26 फरवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर इजरायल की राजधानी तेल अवीव पहुँचे,जहाँ उनका भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। वर्ष 2017 के बाद यह उनका पहला इजरायल दौरा है और नौ वर्षों में दूसरी यात्रा मानी जा रही है। इस दौरे को भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने और साझा विजन को आगे बढ़ाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेल अवीव के बेन गुरियन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने स्वयं उपस्थित होकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर गर्मजोशी का परिचय दिया,जो दोनों देशों के बीच गहरे होते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को विशेष गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया,जिससे इस यात्रा की औपचारिक और कूटनीतिक महत्ता स्पष्ट हो गई।
इजरायल पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने आगमन की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि उन्हें प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनकी पत्नी की ओर से एयरपोर्ट पर मिले सम्मानजनक स्वागत से गौरवान्वित महसूस हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी द्विपक्षीय वार्ताएँ सकारात्मक और परिणामोन्मुखी होंगी,जो भारत और इजरायल के बीच मित्रता को और सुदृढ़ करेंगी।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री के इजरायल पहुँचने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का अवसर है। मंत्रालय के अनुसार,यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और दोनों देश विज्ञान,तकनीक,रक्षा,कृषि और नवाचार जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वे इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से भी मुलाकात करेंगे। कार्यक्रम के अनुसार,प्रधानमंत्री इजरायली संसद को संबोधित करेंगे और कई उच्च स्तरीय बैठकों तथा कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इन बैठकों में रक्षा सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक,साइबर सुरक्षा,जल प्रबंधन,कृषि नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
भारत और इजरायल के संबंध पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से प्रगाढ़ हुए हैं। रक्षा क्षेत्र में इजरायल भारत का एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। ड्रोन तकनीक,मिसाइल सिस्टम, निगरानी उपकरण और सीमा सुरक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट दोनों देशों के सहयोग से संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में भी इजरायल की उन्नत तकनीकों ने भारतीय किसानों को आधुनिक सिंचाई और उत्पादन प्रणालियों का लाभ पहुँचाया है। जल प्रबंधन और मरुस्थलीय कृषि में इजरायल की विशेषज्ञता को भारत में कई राज्यों ने अपनाया है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत हुई है। स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में भारत और इजरायल को समान सोच वाले राष्ट्रों के रूप में देखा जाता है। दोनों देश भविष्य की तकनीकों,जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता,साइबर सुरक्षा और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने के इच्छुक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इन क्षेत्रों में नई परियोजनाओं और समझौतों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है,बल्कि पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का भी संकेत है। भारत ने हाल के वर्षों में क्षेत्र के कई देशों के साथ संतुलित और मजबूत संबंध बनाए हैं। ऐसे में इजरायल के साथ उच्चस्तरीय वार्ता भारत की बहुपक्षीय विदेश नीति को और मजबूती प्रदान कर सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह इजरायल दौरा दोनों देशों के बीच भरोसे,साझा हितों और भविष्य की साझेदारी को नई गति देने वाला माना जा रहा है। गर्मजोशी भरे स्वागत से लेकर प्रस्तावित उच्च स्तरीय बैठकों तक,यह यात्रा संकेत देती है कि भारत और इजरायल अपने संबंधों को एक नए और अधिक व्यापक आयाम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले दिनों में इस दौरे से जुड़े ठोस परिणामों पर सबकी नजर रहेगी,जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और गहराई प्रदान कर सकते हैं।
