नई दिल्ली,26 फरवरी (युआईटीवी)- राजस्थान के रेगिस्तानी विस्तार में स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज एक बार फिर भारतीय सैन्य शक्ति के विराट प्रदर्शन का साक्षी बनने जा रहा है। 27 फरवरी को यहाँ आयोजित होने जा रहे ‘वायुशक्ति-26’ के तहत भारतीय वायुसेना अपनी अचूक मारक क्षमता,अत्याधुनिक तकनीक और चौबीसों घंटे युद्ध तत्परता का भव्य प्रदर्शन करेगी। पाकिस्तान सीमा के समीप स्थित इस रणनीतिक क्षेत्र में होने वाला यह आयोजन न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है,बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी है कि भारतीय वायुसेना हर परिस्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है।
मुख्य आयोजन से पहले पोखरण में फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया,जिसमें सभी संचालन मानकों को सफलतापूर्वक परखा गया। अभ्यास के दौरान निर्धारित लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से भेदा गया,जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वायुसेना का समन्वय,तकनीकी दक्षता और युद्ध कौशल पूरी तरह तैयार है। रेगिस्तान की तपती धरती पर जब लड़ाकू विमान गरजते हुए लक्ष्य भेदते हैं,तो वह दृश्य केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं,बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक बन जाता है।
इस बार के आयोजन की खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना ने पहली बार आधिकारिक वीडियो में S-400 वायु रक्षा प्रणाली की फायरिंग का दृश्य साझा किया है। यह वही अत्याधुनिक प्रणाली है,जो दुश्मन के लड़ाकू विमानों,बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य बड़े हवाई खतरों को लंबी दूरी से ही नष्ट करने में सक्षम है। एस-400 की मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग क्षमता और उन्नत रडार तकनीक इसे दुनिया की सबसे प्रभावी वायु रक्षा प्रणालियों में शामिल करती है। ‘वायुशक्ति-26’ में इसका लाइव प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की बहु-स्तरीय सुरक्षा ढाँचे को प्रदर्शित करेगा।
इस अभ्यास में वायुसेना के लगभग 120 से अधिक एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे। स्वदेशी तेजस से लेकर अत्याधुनिक राफेल,भारी मारक क्षमता वाले सुखोई-30 एमकेआई,बहुउद्देश्यीय मिग-29,सटीक हमलों के लिए प्रसिद्ध मिराज-2000 और गहरे प्रहार में सक्षम जगुआर जैसे लड़ाकू विमान अपनी समन्वित क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इन विमानों के जरिए यह दिखाया जाएगा कि भारतीय वायुसेना हवा में दबदबा बनाने और लंबी दूरी तक सटीक वार करने में कितनी सक्षम है।
केवल लड़ाकू विमान ही नहीं,बल्कि भारी-भरकम परिवहन विमान भी इस अभ्यास का अहम हिस्सा होंगे। सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस और सी-295 जैसे विमान रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। ये विमान युद्ध के समय सैनिकों और उपकरणों की त्वरित तैनाती के साथ-साथ आपदा के समय राहत सामग्री पहुँचाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
हेलिकॉप्टर बेड़े में अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर,भारी लिफ्ट क्षमता वाला चिनूक,स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर और एमआई-17 जैसे हेलिकॉप्टर शामिल होंगे। इसके अलावा ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम भी अभ्यास का हिस्सा बनेंगे,जो आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं।
‘वायुशक्ति-26’ का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे दिन,शाम और रात—तीनों परिस्थितियों में संचालित किया जाएगा। अलग-अलग मिशनों के माध्यम से वायुसेना यह दिखाएगी कि वह चौबीसों घंटे,हर मौसम और हर परिस्थिति में ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम है। रात के अँधेरे में सटीक निशाना साधना और दिन के उजाले में समन्वित हमले करना,दोनों ही आधुनिक युद्धक रणनीति के महत्वपूर्ण तत्व हैं।
अभ्यास के दौरान हाल के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का भी उल्लेख किया जाएगा,जिसमें भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक सटीक प्रहार की क्षमता का प्रदर्शन किया था। यह संकेत स्पष्ट है कि यदि दुश्मन कोई दुस्साहस करता है,तो उसे तुरंत और प्रचंड जवाब दिया जाएगा।
इस आयोजन में आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन होगा। स्वदेशी आकाश मिसाइल,स्पाइडर एयर डिफेंस सिस्टम,शॉर्ट रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन और एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म दिखाए जाएँगे। ये प्रणालियाँ सीमित दूरी के हवाई खतरों से लेकर ड्रोन हमलों तक को निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। इस तरह वायुसेना अपनी बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली का व्यापक चित्र प्रस्तुत करेगी।
भारतीय वायुसेना को अक्सर “सबसे पहले,सबसे तेज और सबसे प्रचंड जवाब देने वाली शक्ति” के रूप में जाना जाता है। ‘वायुशक्ति-26’ इसी पहचान को सुदृढ़ करेगा। यह अभ्यास केवल युद्धक क्षमता का प्रदर्शन नहीं,बल्कि समन्वय,तकनीकी श्रेष्ठता और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। स्वदेशी और विदेशी तकनीकों के संगम से तैयार यह शक्ति संरचना भारत की रक्षा रणनीति को नई मजबूती देती है।
वायुसेना के अनुसार,यह अभ्यास केवल युद्धकालीन परिदृश्यों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें यह भी दिखाया जाएगा कि शांति और आपदा के समय वायुसेना किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। देश और विदेश में संकटग्रस्त क्षेत्रों में त्वरित निकासी,राहत और बचाव अभियानों की क्षमता भी प्रदर्शित की जाएगी। कोविड काल से लेकर प्राकृतिक आपदाओं तक,वायुसेना ने बार-बार यह साबित किया है कि वह केवल युद्ध की शक्ति नहीं,बल्कि मानवीय सहायता की भी अग्रिम पंक्ति की ताकत है।
रेगिस्तान की धरती पर जब लड़ाकू विमान समवेत गर्जना करेंगे और मिसाइलें सटीकता से लक्ष्य भेदेंगी,तब पोखरण एक बार फिर भारत की सैन्य शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक बन जाएगा। ‘वायुशक्ति-26’ के जरिए देश को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि उसकी हवाई सुरक्षा अभेद्य है,उसका प्रहार अचूक है और उसकी तैयारी हर चुनौती के लिए पूर्ण है।
27 फरवरी का यह आयोजन केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं,बल्कि भारत की सशक्त,सजग और आत्मनिर्भर रक्षा नीति का जीवंत संदेश है। जब आकाश में भारतीय वायुसेना की ताकत गूँजेगी,तब यह स्पष्ट होगा कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और हर खतरे का जवाब देने के लिए आसमान में एक मजबूत ढाल और तेज धार दोनों मौजूद हैं।
