भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

फर्जी एसटीटी नोटिस और ‘अकाउंट हैंडलिंग’ ठगी से सावधान रहें निवेशक,सेबी ने जारी की सख्त चेतावनी

मुंबई,28 फरवरी (युआईटीवी)- पूँजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी ) ने निवेशकों को फर्जी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) नोटिस और तथाकथित ‘अकाउंट हैंडलिंग’ सेवाओं के नाम पर बढ़ती ठगी को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं,जिनमें ठग सेबी के नाम और अधिकार का दुरुपयोग कर लोगों से धन ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं।

सेबी के अनुसार,ठग निवेशकों को फर्जी नोटिस भेज रहे हैं,जिनमें बकाया एसटीटी भुगतान की माँग की जाती है। इन नोटिसों में सेबी के नकली लेटरहेड,लोगो और मुहर का इस्तेमाल किया जाता है,ताकि वे आधिकारिक और विश्वसनीय प्रतीत हों। इतना ही नहीं,इन दस्तावेजों में सेबी अधिनियम,1992 के तहत अधिकार होने का झूठा दावा भी किया जाता है,जिससे निवेशक भ्रमित होकर भुगतान करने को बाध्य हो जाएँ।

नियामक ने स्पष्ट किया है कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) हर ट्रेड के समय संबंधित ब्रोकर द्वारा स्वतः वसूला जाता है। यह प्रावधान वित्त अधिनियम,2004 के तहत लागू है। सेबी स्वयं एसटीटी की वसूली के लिए किसी निवेशक को अलग से डिमांड नोटिस जारी नहीं करता। ऐसे में यदि किसी को सेबी के नाम से एसटीटी बकाया का नोटिस प्राप्त होता है,तो वह फर्जी होने की आशंका प्रबल है।

सेबी ने एक अन्य बयान में उन तथाकथित ‘पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस’ (पीएमएस) प्रदाताओं या ‘एक्सपर्ट फंड मैनेजरों’ से भी सावधान रहने को कहा है,जो बिना जोखिम के मुनाफा दिलाने का दावा करते हैं। नियामक के मुताबिक,ये लोग निवेशकों को लुभाने के लिए दूसरे व्यक्तियों के नाम पर किए गए ट्रेड दिखाते हैं और बड़े लाभ का दावा करते हैं। इसी रणनीति के जरिए वे नए निवेशकों को अपने जाल में फँसाते हैं और बाद में भारी रकम ठग लेते हैं।

सेबी ने निवेशकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के संदेश,ईमेल या नोटिस की प्रामाणिकता की जाँच अवश्य करें। नियामक ने बताया कि उसकी आधिकारिक ईमेल आईडी केवल “@sebi.gov.in” से समाप्त होती है। इसके अतिरिक्त,सेबी द्वारा की जाने वाली सभी प्रवर्तन कार्रवाइयों और आदेशों की जानकारी उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहती है। यदि किसी निवेशक को किसी प्रकार का भुगतान करने के लिए कहा जाता है,तो उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भुगतान केवल सेबी के अधिकृत पेमेंट गेटवे के माध्यम से ही किया जाए।

बयान में यह भी कहा गया है कि ठग लोग सेबी अधिकारियों की नकली पहचान बनाकर निवेशकों से संपर्क कर रहे हैं। वे विभिन्न कार्यालयों के नाम और ईमेल आईडी का दुरुपयोग करते हैं और स्वयं को सेबी का अधिकारी बताकर संदेश भेजते हैं। ऐसे मामलों में वे आधिकारिक दिखने वाले दस्तावेजों के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। सेबी ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों को ऐसे किसी भी दावे पर आँखें मूँदकर विश्वास नहीं करना चाहिए।

निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे केवल सेबी-पंजीकृत मध्यस्थों के साथ ही लेन-देन करें। किसी भी ब्रोकर,सलाहकार या सेवा प्रदाता का पंजीकरण स्टेटस सेबी की आधिकारिक वेबसाइट पर आसानी से जाँचा जा सकता है। इसके अलावा,ट्रेडिंग के लिए केवल अधिकृत और सत्यापित मोबाइल ऐप या प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना चाहिए। अनधिकृत ऐप या लिंक पर क्लिक करने से न केवल आर्थिक नुकसान हो सकता है,बल्कि व्यक्तिगत डेटा भी खतरे में पड़ सकता है।

निवेशकों की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से सेबी ने हाल ही में ‘सेबी चेक’ नामक एक नई सुविधा शुरू की है। इस सुविधा के तहत निवेशक क्यूआर कोड स्कैन करके या संबंधित बैंक विवरण दर्ज करके यह सत्यापित कर सकते हैं कि किसी सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ की यूपीआई आईडी या बैंक खाता असली है या नहीं। इस कदम को डिजिटल युग में बढ़ती साइबर ठगी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन निवेश के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में नियामक की यह चेतावनी समयोचित है। निवेशकों को चाहिए कि वे किसी भी आकर्षक ऑफर,गारंटीड रिटर्न या त्वरित लाभ के दावे से सतर्क रहें। पूँजी बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के साथ जुड़ा होता है और बिना जोखिम के मुनाफे का दावा अक्सर धोखाधड़ी का संकेत होता है।

सेबी ने यह भी दोहराया है कि यदि किसी निवेशक को संदेहास्पद कॉल,संदेश या नोटिस प्राप्त होता है,तो वह तुरंत उसकी शिकायत दर्ज कराए। नियामक का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना है और इसके लिए निवेशकों की सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है।

फर्जी एसटीटी नोटिस और ‘अकाउंट हैंडलिंग’ सेवाओं के नाम पर हो रही ठगी ने बाजार नियामक को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर किया है। निवेशकों को चाहिए कि वे आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें और किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले पूरी सावधानी बरतें,ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।