अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@OpIndia_in)

ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजने के विकल्प पर ट्रंप की रुचि,मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच नई बहस

वाशिंगटन,7 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निजी तौर पर ईरान में अमेरिकी सैनिकों की संभावित तैनाती के विकल्प में रुचि दिखाई है। यह जानकारी वॉशिंगटन से सामने आई एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दी गई है,जिसमें कहा गया है कि ट्रंप ने इस विषय पर अपने करीबी सहयोगियों और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा की है।

रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव किसी बड़े पैमाने के सैन्य आक्रमण से जुड़ा नहीं है। इसके बजाय योजना सीमित संख्या में विशेष मिशनों के लिए अमेरिकी सैनिकों की तैनाती पर केंद्रित बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह विचार मुख्य रूप से रणनीतिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर सामने आया है। हालाँकि,अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है और यह केवल विचार-विमर्श के स्तर पर ही है।

इस संभावित योजना को लेकर वॉशिंगटन के राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में ईरान में सीमित सैन्य तैनाती पर विचार करता है,तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम केवल एक रणनीतिक विकल्प के रूप में सामने रखा गया हो सकता है,ताकि कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप ने युद्ध के बाद के संभावित ईरान को लेकर भी अपने सहयोगियों के सामने एक प्रारंभिक रूपरेखा रखी है। इस योजना में ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना और भविष्य में एक नई ईरानी सरकार के साथ तेल उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग की संभावना शामिल बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव को अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पहले से मौजूद तेल व्यवस्था के समान मॉडल पर विकसित करने की बात भी की गई है।

हालाँकि,इस खबर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कैरोलिन लीविट ने कहा कि यह रिपोर्ट अनाम स्रोतों के अनुमानों पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों का हवाला दिया जा रहा है,वे राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का हिस्सा नहीं हैं। उनके अनुसार ऐसी खबरों को अंतिम नीति निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

व्हाइट हाउस की ओर से यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सभी विकल्प खुले रखते हैं। लीविट के मुताबिक यह कहना सही नहीं होगा कि राष्ट्रपति ने किसी एक विकल्प को चुन लिया है या उसका समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका अपने रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए हर संभावना पर विचार कर रहा है।

इस सप्ताह ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में भी इस मुद्दे पर संकेत दिया था। उन्होंने कहा कि जहां पिछले कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने जमीनी स्तर पर सैनिक भेजने से परहेज किया है,वहीं उनका मानना है कि भविष्य में इसकी जरूरत पड़ सकती है। ट्रंप ने कहा कि संभव है कि ऐसा कदम उठाने की आवश्यकता ही न पड़े,लेकिन यदि परिस्थितियाँ माँग करती हैं,तो यह विकल्प भी मौजूद होना चाहिए।

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिका पहले ही ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला रहा है। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान के बाद से अमेरिकी बलों ने ईरान के अंदर 3,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं। इसके अलावा 43 ईरानी जहाजों को भी नुकसान पहुँचाया गया या नष्ट कर दिया गया है।

यह सैन्य अभियान तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़े हमले शुरू किए। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए। रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई भी मारे गए,जिससे पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य तनाव और अधिक बढ़ गया।

इन घटनाओं के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरानी सेना और उसके सहयोगी समूहों ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू कर दी है। इस कारण मध्य पूर्व में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और कई देशों ने संभावित बड़े संघर्ष की आशंका जताई है।

ईरान की ओर से भी सख्त रुख देखने को मिला है। देश के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने स्पष्ट कहा है कि ईरान फिलहाल किसी युद्धविराम की माँग नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में तेहरान को वॉशिंगटन के साथ बातचीत का कोई कारण नजर नहीं आता।

अरागची के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं,तो कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ कम हो सकती हैं और संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।

मध्य पूर्व लंबे समय से वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र रहा है। ऊर्जा संसाधनों,रणनीतिक मार्गों और क्षेत्रीय गठबंधनों के कारण यहाँ होने वाली हर घटना का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में अमेरिका द्वारा ईरान में संभावित सैनिक तैनाती पर विचार की खबर ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान फिर से इस क्षेत्र की ओर खींच लिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह प्रस्ताव केवल रणनीतिक चर्चा तक सीमित रहता है या फिर अमेरिका वास्तव में कोई ठोस सैन्य निर्णय लेता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर बेहद जटिल बना दिया है।